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सावधान! ऑनलाइन ठगी से बचें

कोरोना काल में जितनी तेजी से लोगों के काम धंधे ठप हुए हैं उतनी ही तेजी से ऑनलाइन ठगी में भी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि ऑनलाइन ठगी के पुराने तरीकों को करीब-करीब सभी लोग जान चुके हैं और उनसे बचने के लिए सतर्क भी हो गए हैं और इसी कारण साइबर अपराध करने वालों के हाथ कुछ नहीं लग रहा है। जिसको देखते हुए ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले अपराधियों ने अब नए तरीके अपनाने आरम्भ कर दिए हैं। वो अब चैटिंग और फेसबुक एकाउंट को हैक करके लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं। साथ ही आपदा के समय में कोरोना वैक्सीन का रजिस्ट्रेशन कराने और रेमडेसीवीर घर भिजवाने के नाम पर भी ऑनलाइन धोखाधड़ी हो रही हैं। अपराधी व्हाट्सएप चैटिंग के जरिए सबसे पहले लड़कियों को व्हाट्सएप कॉल, वीडियो कॉल और चैटिंग से बात करते है। वहीं इस दौरान वह उनका अश्लील वीडियो बनाते है। जिसे रिकॉर्ड करके ब्लैकमेल करती हैं और फिर उनसे पैसे ऐंठते है तथा अपराधियों ने इस संकट की घड़ी में भी अपने पैसे कमाने के तरीके ढूंढ लिए हैं। गौरतलब है कि अगर समय रहते इन अपराधियों से बचा नहीं गया तो यकीनन ही कई लोगों के घर तबाह हो जाएंगे। वैसे सरकार व पुलिस समय-समय पर इन जालसा...

मास्क! अनिवार्य या वैकल्पिक

कोविड़-19 के संक्रमण के आकड़े बेशक़ अब धीरे-धीरे कम हो रहे हैं लेकिन इस महामारी का प्रकोप अभी कई वर्षों तक रहने का अनूमान जताया जा रहा है। इस संकट की घड़ी में जो सबसे ज्यादा उपयोग रहा वो है मास्क। जिसका साथ हमारे साथ कब तक रहेगा हमें नहीं पता। हालांकि कई देशों में तो टीकाकरण होने के बाद मास्क से छुट मिल गई है लेकिन भारत में स्थिति बहुत अलग है। दूसरी लहर अभी भी उग्र है। आबादी के केवल एक छोटे से हिस्से को टीका लगाया गया है। लोगों की संवेदनशीलता पर टीकों के प्रभाव पर कम अध्ययन हुए हैं व भारत में इस्तेमाल होने वाले टीके भी अलग हैं। इसके अलावा, वायरस के कई प्रकार आबादी में घूम रहे हैं। इन म्यूटेंट के खिलाफ मौजूदा टीकों की प्रभावशीलता पर डेटा अभी भी एकत्र किया जा रहा है। साथ ही, नए वेरिएंट भी सामने आ रहे हैं। हालांकि मास्क छोड़ने को लोगों के लिए टीकाकरण के लिए एक प्रोत्साहन के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसका उल्टा प्रभाव भी हो सकता है। यह संदेश दे सकता है कि सब ठीक है। यह वैक्सीन के लिए हिचकिचाहट पैदा कर सकता है एंव भारत के मामले में, मास्क छोड़ने के विनाशकारी परिणाम हो सकते है...

बीमारियों! कब राहत मिलेगी

 देश एक के बाद एक आपदाओं से घिरता जा रहा है। जहां कोविड-19 से ठीक हो चुके लोगों में ब्लैक और वाइट फंगस के मामलों ने चिंता बढ़ा दी हैं, वहीं अब यलो फंगस का मामला भी सामने आया है। जिसे म्यूकर सेप्टिकस भी कहते हैं। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हाल ही में यलो फंगस से पीड़ित एक मरीज मिला है।कमजोरी, भूख कम या न लगना और वजन घटना व बीमारी बढ़ने के साथ-साथ मरीज में और गंभीर लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जैसे शरीर में हुए घावों से मवाद निकलना, घावों का जल्दी ठीक न होना, कमजोरी से आंखें धंसना आदि इसके अलावा बीमारी गंभीर होने पर ऑर्गन फेलियर और नेक्रोसिस यानी कि शरीर के सेल यानी कोशिकाओं की लिविंग टिशू मतलब जीवित उत्तिकाओं में वक्त से पहले ही मौत हो जाती है, यानी कि सेल वक्त से पहले ही खत्म होने लगती हैं। गौरतलब है कि यलो फंगस का संक्रमण घातक हो सकता है क्योंकि यह शरीर के अंदर से शुरू होता है, ऐसे में इसके लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है लेकिन चूंकि शुरुआत में लक्षणों को पकड़ पाना मुश्किल होता है, ऐसे में कुछ-कुछ मामलों में वक्त पर इलाज मिलना मुश्किल हो जाता है। ह...

दूसरी लहर! कब खत्म होगी

 भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर पिछले कई सप्ताह से तबाही मचा रही है। रोजाना नए संक्रमित मिल रहे हैं, जबकि हजारों लोगों की जान जा रही है। भारत ही नहीं, दुनिया के लगभग सभी देश कोरोना महामारी की चपेट में आ चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी को पुख्ता तौर पर यह नहीं मालूम हुआ है कि आखिर इसकी शुरुआत कैसे हुई। हालांकि, कोरोना वायरस की उत्पत्ति किसी लैब से होने वाली थ्योरी को तब तक ही गंभीरता से लेना चाहिए, जब तक यह गलत साबित नहीं हो जाए।बहरहाल साल 2019 के अंत में चीन के वुहान शहर से दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस ने लाखों लोगों की जान ली है, जबकि करोड़ों लोग इसके चपेट में आ चुके हैं। भारत-अमेरिका जैसे देशों को वायरस ने तकरीबन-तकरीबन घुटने के बल ला दिया है। डब्ल्यूएचओ की अगुवाई वाली टीम, जिसने जनवरी और फरवरी में वुहान और उसके आसपास चार सप्ताह बिताए थे, उनका कहना है कि वायरस संभवतः चमगादड़ से मनुष्यों में किसी अन्य जानवर के जरिए से आया हो सकता है। वहीं, लैब से बाहर आने वाली थ्योरी की संभावना नहीं है। वैसे तो दुनियाभर में वायरस की उत्पत्ति को लेकर नेताओं से लेकर साइंटिस्ट्स, तरह-तरह ...

नई पहल! लिखा जाएगा कोरोना का इतिहास

वैश्विक महामारी कोविड़-19 ने जिस कदर समूचे विश्व में अपना प्रभाव दिखाया है, शायद ही इसे कोई भूल पाएगा। बहरहाल गुप्त व मुगल काल की तरह ही कोरोना काल का भी अपना ही इतिहास होगा। जिससे आने वाली पीढ़ी को इस कठिन दौर से अवगत कराया जा सके। हालांकि हरियाणा सरकार ने तो इसका फैसला भी कर लिया है कि वह कोरोना काल का इतिहास लिखवाएगी। जिसके लिए एक टीम का गठन भी किया है। यह टीम मौजूदा हालात, चुनौतियों, सरकार की भूमिका और तैयारियों का उल्लेख इसमें करेगी। इतिहास लिखने का सिर्फ एक ही मुख्य कारण होता है कि, 50 या 100 साल बाद की हमारी पीढ़ी को इस महामारी के बारे में जानकारी मिल सके और अगर उनके सामने इस तरह की कोई आपदा या महामारी आती भी है तो उन्हें इससे निपटने में सहायता मिल सके। गौरतलब है कि इतिहास हमारे देश के ऐसक धरोहर है जिसे संजोग का रखना बेहद आवश्यक हैं। निधि जैन, लोनी गाजियाबाद 

अब! एक ओर आपदा

देश अभी तक वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से पूर्ण तरीके से उभरा नहीं है कि एक ओर महामारी ने देश में दस्तक दे दी है। मौजूदा समय में म्यूकोरमाइकोसिस को एक बड़ा और गंभीर ख़तरा माना जा रहा है। हालांकि इस फंगल इंफेक्शन के ज़्यादातर संक्रमण के मामले अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन एक अध्ययन में कहा गया है कि अगर समय रहते इस महामारी पर भी रोक नहीं लगाई गई तो अवश्य ही यह एक गंभीर आपदा में तब्दील हो जाएगी तथा इस व म्यूकोरमाइकोसिस बीमारी के लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना जानलेवा साबित हो सकता है। बहरहाल ये काला फंगल संक्रमण म्यूकोरमाइसाइट्स नामक सांचों के समूह के कारण होता है, जो हवा में मौजूद होते हैं व ये जटिलताओं का कारण तब बनते हैं, जब सांस के ज़रिए ये किसी बीमार रोगी के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं एंव साइनस गुहाओं, फेफड़ों और छाती गुहाओं में फैलने लगता है परन्तु अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि काली फंगस इंफेक्शन कोविड-19 से कैसे जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि अगर समय रहते इस संकट का निवारण नहीं मिला तो अवश्य ही देश एक ओर आपदा से घिर जाएगा, जिससे उभरने में इसे काफी वक्त लगेगा। निधि जैन, लोनी गा...

आखिर कब रूकेगी कालाबाजारी

कोविड़-19 महामारी की दूसरी लहर से शायद ही इस बार कोई अछूत रहा होगा। देखते ही देखते संक्रमण दर बढ़ती ही जारी हैं। शमशान घाट में चीता को आग के हवाले करने में घंटो का इंतजार करना पड़ रहा है। अपने इंसानियत भूलकर अपनों को नंदी में फेक रहें हैं। वहीं इन सबके बीच कई ऐसे लोग भी है, जो स्वयं के मुनाफे के लिए लोगों का फायदा उठा रहें हैं। दिल्ली एनसीआर सहित कई राज्यों में बड़े पैमाने पर अब भी मेडिकल उपकरणों की कालाबाजारी जारी है। कालाबाजारी करने वाले लोग इंटरनेट मीडिया पर लोगों की तलाश करके मुंहमांगे दाम पर ऐसे उपकरणों को बेच रहे हैं। हालांकि पुलिस ने कालाबाजारी करने वाले सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार भी किया हैं परन्तु उसके बाद भी इस काम पर रोक नहीं लग पा रही है। कालाबाजारी में इन सामानों के रेट सुनकर अच्छे अच्छों के होश उड़ जाते हैं। आरोपितों के कई मेडिकल सर्जिकल दुकानों पर संबंध होते हैं व यह लोग वहां से सस्ते दामों में मेडिकल उपकरण खरीदते हैं और महंगे दामों में इनकी बिक्री जरूरतमंद लोगों को करते हैं एंव यह लोग वाट्सएप व सोशल मीडिया के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को तलाशते हैं और उन्हें महंगे दाम...

इंटरनेट! बिन जीवन अधूरा

वैश्विक महामारी कोविड़-19 के कारण हर एक कार्य में बदलाव आया हैं चाहे वह स्कूलों में पढ़ाई का तरीका ही क्यों न हो। कोरोना काल में स्कूल बंद होने से सभी कक्षा के छात्र बीते एक साल से घर पर है। स्कूल की कक्षाएं ऑनलाइन होने की वजह से स्वजन ने उन्हें मोबाइल फोन दिलवा दिया है। हालांकि ऑनलाइन क्लास के बाद बच्चों को इंटरनेट पर गेम की लत लग गई है। स्वजन के समझाने पर तरह तरह के बहाने छात्रों के पास मौजूद रहते हैं। घर वाले निगरानी करने लगे तो चोरी-छिपे गेम खेलना, खाने-पीने से ध्यान हटना, बात-बात पर जवाब देना अब तो अधिकांश बच्चों की आदत में शुमार हो गया हैं। बहरहाल ऐसा कोई एक बच्चे का हाल नहीं है, ऐसे न जाने कितने परिवारों में यह रोज का किस्सा हो गया है। दरअसल, यह वायरस केवल मरीज और उनके परिवार के सदस्यों के मन-मस्तिष्क ही प्रभावित नहीं कर रहा है बल्कि बच्चों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इसकी प्रमुख वजह है मोबाइल पर लगातार गेम खेलना। चिकित्सकों के मुताबिक यह एक मनोरोग है, जिसे आईडी यानी इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर कहते हैं। शहरभर में इस समय काफी बच्चे इससे जूझ रहे हैं। यह व्यवहार से जुड़ी बीमारी है। वर्...

तीसरी लहर! कैसे बचा जाएगा इससे

  कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप ही अभी खत्म नहीं हुआ है कि अनुमान जताया जा रहा है, भारत में जल्द कोरोना की तीसरी लहर आ सकती है। जो अधिकांश बच्चो को प्रभावित कर सकती है। पूरे देश में कोरोना की दूसरी लहर में हाहाकार मच गया है। वही इसमें अधिकतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी फेल हो गई है। ऐसे में अब कोरोना वायरस की तीसरी लहर आने के अनुमान को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बच्चों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रखने के उपाय बताए हैं। जिसमें कहा गया है बच्चों के फेफड़ो को मजबूत करने के लिए उन्हें गुब्बारे फुलाने के लिए दें व साथ ही उन्हें पीने के लिए गुनगुना पानी दिया जा सकता है एंव वही अगर बच्चे थोड़े बड़े है तो उन्हें सांस वाली एक्सरसाइज करवाएं। वही उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए खट्टे फल खिलाएं। साथ ही उन्हें हल्दी वाला दूध भी पिलाएं। इतना ही नहीं उन्हें इस संक्रमण के बारे में और इससे बचने के बारे में भी समझाएं लेकिन तमाम उपाय बताने के बाद भी लोग इन उपायों का सख्ती से पालन करे तो उसमें समक्ष दारी हैं। निधि जैन, लोनी (गाजियाबाद)

कोरोना को लेकर ड़ब्लूएचओ की बड़ी चेतावनी

दुनियाभर में कोरोना वायरस के मामले और कोरोना से मौतो का आंकड़ा रोजाना लगातार बढ़ता जा रहा है, तमात कोशिशों के बावजूद भी कोरोना पर लगाम लगाने में पूरी तरह से कामयाबी हमारे देश को हासिल नहीं हो पाई है। हालांकि इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी ड़ब्लूएचओ ने हालही में एक बड़ी चेतावनी दी है कि यदि वायरस को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर कड़े कदम नहीं उठाए गए तो कोविड़-19 से होने वाली मौतों की संख्या बीस लाख तक जाने की आशंका है। वैसे अभी विश्व में कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या दस लाख पहुंचने के करीब है। ड़ब्लूएचओ की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दुनिया में कोरोना से मौत का आंकड़ा दस लाख के स्तर पर पहुंचने वाला है। जो अवश्य ही चिंता पूर्ण विषय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि, यदि महामारी से निपटने के लिए विभिन्न देश और लोग एक साथ नहीं आए तो, दस लाख और मौतों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। ड़ब्लूएचओ के आपातकालीन कार्यक्रम के निदेशक माइकल रेयान ने एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में कहा कि दस लाख का आंकड़ा डराने वाला है और अगले दस लाख पर विचार शुरू करने से पहले हमें ...

लड़की हूँ जिस्मों का खेल नहीं

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डर जाता है हर बाप जब उसकी बेटी जवान होती है क्योंकि कोई नहीं जानता किस इंसान की नियत कब खराब हो जाए। दरिंदों को तो बस अपनी हवस भुजानी होती है, इससे चाहें किसी की रूह का कत्ल ही क्यों न हो। तुम्हारा तो मन भर गया न, रूह को एक बार छलनी करके मन नहीं भरा तो आज फिर से किसी के जिस्म को छलनी करने के बारे में तो नहीं सोच रहें। आज भी ड़रना नहीं तुम कुछ गलत नहीं कर रहें, उसके चीखने चिल्लाने से तुम्हें क्या फर्क पढ़ता है, तुम्हारी तो हवस मिट गई न। तुम्हारी गलती की वजह से तुमने तो पापा की लाड़ली को उस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया, जहां सिर्फ तुम्हारे कारण वह मरने को तैयार है, अपने सारे सपनें खत्म करने को मजबूर हैं।  बहरहाल बलात्कार भारत में महिलाओं के खिलाफ चौथा सबसे आम अपराध है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी की 2019 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में 32,033 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए, और प्रतिदिन औसतन 88 मामले दर्ज हुए। 2019 में प्रत्येक दिन महिलाओं और लड़कियों पर बलात्कार, हमले और हिंसा के प्रयास में 3 नाबालिगों के साथ बलात्कार के शिकार किशोरियों को बलात्का...

हमेशा साथ हैं

इरफान खान जिनका नाम ही काफी हैं, एक ऐसी शख्सियत जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन से पूरे देश में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया। जिन्होंने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक कई सुपरहिट फिल्में दी। लंबे वक्त से अपनी सेहत से जूझ रहे इस अभिनेता ने अपनी हिम्मत को कभी पस्त नहीं होने दिया। हर चुनौती का डटकर सामना किया। बेशक, आज वो हमारे बीच में नहीं है पर उनका नाम कोई नहीं मिटा पाएगा। -निधि जैन

आर्टिफिशियल कोरोना वायरस

कोविड-19 ने दुनिया की तस्वीर बदल के रख दी है। मौत का आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। दुनिया भर के लोग इस महामारी से त्रस्त हो रहे हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले जापान के वैज्ञानिक प्रोफेसर तासुकु होंजों ने दावा किया है, कि कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर यह वायरस प्राकृतिक होता तो इस तरह पूरी दुनिया में यूं तबाही नहीं मचाता। उन्होंने यह भी कहा कि मैंने चीन की लैबोरेटरी में 4 साल काम किया है। और मैं वहां के स्टाफ से पूरी तरह से परिचित हूं। कोरोना हादसे के बाद से मैं सब को फोन लगा रहा हूं पर किसी का भी फोन 3 महीने से नहीं लग रहा है। मेरी सारी बातें सच है अगर गलत हो तो सरकार मेरा नोबेल पुरस्कार वापस ले सकती है। यकीनन मैं सच बोल रहा हूं। यह कोरोनावायरस आर्टिफिशियल है। जो चाइना द्वारा बनाया गया है। -निधि जैन

क्या चीन ने जीती रेस?

चीन से जन्मा कोरोना वायरस समूचे विश्व में अभी तक हाहाकार मचा रहा है बेशक़ कई देश इस वायरस पर अपनी पकड़ मजबूत कर पाएं है लेकिन भारत में तो इसका प्रकोप बिल्कुल भी खत्म नहीं हुआ है। भारत में तो कोविड़-19 संक्रमितों के आकड़े प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं और शायद इस पर तो जब ही रोक लगेगी जब वैक्सीन या वायरस की काट मिल जाएंगी। बहरहाल चीन का कहना है कि ट्रायल से बाहर चुनिंदा लोगों को कोरोना वैक्सीन देने के उसके फैसले का विश्व स्वास्थ्य संगठन ने समर्थन किया है और रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भी चीन के स्वास्थ्य अधिकारी ने यह जानकारी दी है कि जुलाई से ही चीन ट्रायल से इतर विभिन्न समूहों को वैक्सीन की खुराक दे रहा है। हालांकि, कई एक्सपर्ट्स ने इसकी आलोचना भी की थी परन्तु चीन ने जुलाई में ही कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी उपयोग की इजाजत दे दी थी व चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन के अधिकारी झेंग झोंगवेई के अनुसार भी जून में ही चीन ने ड़ब्लूएचओ को अपनी वैक्सीन की जानकारी भेज दी थी एंव चीन ने इमरजेंसी एप्रूवल के तहत आवश्यक सेवाओं से जुड़े लाखों कर्मचारी और हाई रिस्क ग्रुप के काफी लोगों को कोरोना वैक्सीन देना शु...

कोरोना में शादी की पहल

कोरोना से निपटने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान सबसे बड़ी परेशानी उन परिवारों को है। जिनके घर में शादी जैसे मांगलिक कार्यक्रम होने थे। सरकार ने लॉकडाउन के दौरान शादी करने की इजाजत तो दी है, पर कुछ शर्तों के साथ। जिसमें ज्यादा लोगों को एकत्रित होने की इजाजत नहीं है। इसकी वजह से आज 5-10 बाराती लेकर शादी हो रही है। गौरतलब यह है, कि अगर ये रिवाज कोरोना के बाद भी रह जाए तो कई बेटियों के पिता कर्जदार होने से बच जाएंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन  (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में हर साला लाखों बाप अपनी जान गवा देते हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं होते की अपनी बेटी की शादी भी करा सके। बावजूद इसके कई लोग शादी समारोह में करोड़ो रूपए ऐसे ही उड़ा देते हैं। और अंन का दुरुपयोग करते हैं कोरोना महामारी ने लोगों को अंन की कीमत का एहसास करा दिया हैं। -निधि जैन

सैलरी 15 करोड़

कोविड-19 महामारी के असर से देश के सबसे अमीर व्यक्ति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी भी अस्पर्शनीय नहीं है। अंबानी ने अपने पूरे साल का वेतन छोड़ने का निर्णय लिया है। 11 साल से अंबानी की सैलरी 15 करोड़ रुपये बनी हुई है। अंबानी के अलावा कंपनी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, कार्यकारी निर्देशक सहित निदेशक मंडल ने भी अपनी सैलरी में 30 से 50 फीसदी तक की कटौती के लिए रजामंदी दे दी है। यही नहीं कर्मचारियों को मिलने वाले सालाना कैश बोनस और अन्य परफॉर्मेंस आधारित इंसेंटिव भी रोक दिए गए हैं। कंपनी की ओर से कहा गया है, कि रिफाइंड प्रोडक्टों और पेट्रोकेमिकल्स की मांग में गिरावट आई है। इसके चलते हाइड्रोकार्बन बिजनेस पर काफी बुरा असर हुआ है। इसने लागत में कटौती करने को लेकर दबाव बनाया है। इसे देखते हुए सभी मोर्चों पर लागत में कटौती का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही जिन कर्मचारियों का पैकेज 15 लाख रुपये से कम है। उनके वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी लेकिन इसके ऊपर की आय वालों के वेतन में 10 फ़ीसदी की कटौती होगी। अंबानी ने कहा कि यह मौका कारोबार को एक बार फिर से पुनर्गठित करने का हैं। -निधि...

कौन कहता है, बेटे विदा नहीं होते...?

कोरोना महामारी के बीच देश एक ओर संकट से जूंज रहा हैं। जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों ने सीआरपीएफ के जवानों को निशाना बनाते हुए हमले को अंजाम दिया है। जिसमें हमारे देश के कई जवान शहीद हो गए। इससे पहले 2 मई को हदंवाडा में हुए एक आतंकी हमले में भी सेना के कई जवान शहीद हो गए थे। लेकिन देश बेगुनाहों को बचाने के लिए दिया गया यह बलिदान कभी नहीं भूलेंगा। इस मुश्किल वक्त में पूरा देश अपने वीर जवानों व उनके परिवारों के साथ खड़ा है। और कौन कहता है, बेटे विदा नहीं होते...? जब बेटे विदा होते है तो भारत माँ का आँचल लाल कर जाते हैं। शहीदों को नमन -निधि जैन

कोरोना राक्षस को दावत

लॉकडाउन के दौरान 40 दिन तक बंद रहने के बाद जब शराब की दुकानें खुली, तो लोगों ने लॉकडाउन की धज्जियां उड़ा दी। शराबियों को जो नजारा सड़कों पर दिखाई पड़ रहा है। वैसा भारत में पहले कभी दिखाई नहीं पड़ा। लोगों ने शराब की दुकानों पर डेढ़ से 3 किमी लंबी लाइनें लगा रखी है, और इतनी बोतले लादे हुए घर लौट रहे हैं कि आम जनता देखकर चकित हैं। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा कि भारत में इतने शराबी हैं। इतनी लंबी कतारें तो हमने कभी यूरोप, अमेरिका और अन्य किसी देश में भी नहीं देखी। हमारे यहां तो शारीरिक दूरी के नियम की धज्जियां उड़ा दी है। कर्नाटक में तो दुकानें खुलने से पहले लोग नारियल- अगरबत्ती चढ़ाकर पूजा करते नजर आए। राजधानी दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने 70% अतिरिक्त टैक्स वसूलना शुरू कर दिया है बावजूद इसके लोग दुकानों पर लंबी कतारों में खड़े नजर आए। गौरतलब यह है कि सरकार ने सिर्फ 1 दिन में 1000 करोड़ रुपए की शराब बिकवाकर कोरोना राक्षस को दावत नहीं दी है शराब से मनुष्य जीवन को जो क्षति होगी क्या उसे सरकार पूरा कर देगी। -निधि जैन

बेटियों की बलि कब तक ली जाती रहेगी ?

देवी की पूजा का ढोंग छोड़ देना चाहिए यकीनन इस देश के लोगों को क्योकि देवी के रूप में जन्मी अपनी बेटी ही सुरक्षित नहीं है इस दुनिया में तो देवी माँ की पूजा करके क्या हासिल होगा। गौरतलब है कि 16 दिसंबर 2012 की उस रात को यूपी के हाथरस में फिर से दोहराया गया है, 2012 में भी निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए पूरा देश सड़क पर आ गया था और अब भी अपने घर की महिलाओं की रक्षा के लिए लोग सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो गए हैं। रेप किया, रीढ़ की हड्डी तोड़ दी, जीभ काट दी, दुपट्टे से गला घोट दिया इसको पढ़ने में ही डर लग रहा हैं तो ऐसे में उस गुड़िया पर क्या बीती होगी उसे तो हम और आप सोच भी नहीं सकते। जब जानवार उसके साथ हैवानियत को अनजाम दे रहें होगे उस दृश्य को तो सोचकर भी रोमटे खड़े हो जाते हैं। वैसे अब हमें यह मान लेना चाहिए कि हमसे अच्छे तो हिजड़े हैं जो किसी लड़की के साथ रेप, बलात्कार जैसी दर्दनाक, शर्मनामक, कायराना हरकत तो नहीं कर सकते। हालांकि यूपी के हाथरस में दलित युवती के साथ हुई गैंगरेप की घटना में चारों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं। कई दिनों से पीड़िता वेंटिलेटर पर जिंदगी और...

बलत्कार को राजनीति से ना जोड़े

हाथरस की घटना इस समय मीडिया की हेडलाइंस बनी हुई है लेकिन महिलाओं पर अत्याचार की ऐसी ढेरों घटनाएं हैं जिन्हें कभी मीडिया में स्थान ही नहीं मिल पाता वह खबरें बन्द कमरे में ही सिमट के रह जाती हैं। यूपी की हाथरस की घटना को लेकर कई न्यूज चैनल लगातार खबरें दिखा रहे हैं, परन्तु बलरामपुर और राजस्थान के अलग-अलग शहरों में रेप की कई घटनाओं पर उतनी बात नहीं हो रही और अगर हाथरस व बाकी घटनाओं के मीडिया कवरेज की तुलना करें तो यह अनुपात 99 और 1 का होगा। ऐसे में यह ही सवाल उठता है कि हाथरस की घटना में ऐसा क्या था जिस पर मीडिया का इतना ध्यान चला गया। जो नेता और मीडिया दिल्ली से 200 किलोमीटर दूर हाथरस तक गए पर हाथरस से 500 किलोमीटर दूर बलरामपुर क्यों नहीं जा पाए? आखिर मीडिया ने बलरामपुर की घटना को क्यों भुलाया? गौरतलब है कि जब हम इस सवाल का जवाब भी ढूंढेंगे तो अंत में सोशल मीडिया का नाम ही सामने आएगा क्योंकि हाथरस के मामले में भी बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया की ताकत का दुरुपयोग किया गया हैं। सोशल मीडिया के जरिए ही हाथरस की घटना के बारे में कई गलत जानकारियां फैलाई गईं। इसे सोश...

महाराष्ट्र ने उठाया सराहनीय कदम

क्या मिलता है लोगों को धुँआ उड़ाने से, बेवजह खुद को मिटाने से। लोगों को पता है कि यह चीजें उनको अन्दर से खोखला कर देती है पर फिर भी पता नहीं क्यों सेवन करते है इन चीजों का, जो हानिकारक होती है स्वास्थ के लिए। बहरहाल, महाराष्ट्र खुली सिगरेट बीड़ी की बिक्री पर बैन लगाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। हालही में महाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से यह सर्कुलर जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि कानून के मुताबिक सिगरेट-बीड़ी समेत सभी तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर स्वास्थ्य चेतावनी लिखना अनिवार्य है। सिगरेट और दूसरे तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन और खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई है। वैसे 2003 के एक्ट के अनुसार राज्य में खुली सिगरेट और बीड़ी की बिक्री पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। यह सर्कुलर स्वास्थ्य विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी प्रदीप व्यास की तरफ से जारी किया गया है। तथा स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जब लोग खुली सिगरेट और बीड़ी खरीदते हैं, तो वह पैकेट पर लिखी चेतावनी नहीं देख पाते, और स्मोकिंग से कैंसर और दूसरी स्वास्थ्य संबंधित बीमारियां होती हैं, इसलिए सरकार ने खुली सिगरेट, बीड़ी की ...

इतिहास दोहराया

36 साल पहले यानी 2 दिसंबर, 1984 की उस रात मौत ने हजारों लोगों को दबे पांव अपने आगोश में ले लिया था। भोपाल का वो इतिहास भयंकर तबाही जिसने शहर में मौत का तांडव मचा दिया था। ऐसा ही मंजर फिर एक बार विशाखापट्टनम में देखने को मिला। जहां गैस लीक होने से हजारों लोगों की हालत गंभीर बनी हुई हैं। जहां तहां लोग बेहोश पड़े हैं। कई लोगों की मौत भी हो चुकी हैं। कई जानवर भी जहरीली गैस के संपर्क में आकर मारे गए हैं। गैस लीक के चलते हवा जहरीली हो गई है, और अगर गैस का रिसाव हवा में घुल गया तो दूसरे राज्य भी इससे प्रभावित हो जाएगें। लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और भयंकर रुप से खुजली हो रही है। लगभग 8000 लोगों को केमिकल यूनिट के 3 किलोमीटर के दायरे में अपने घर को खाली करना पड़ा। उनके लिए भोजन सहित अन्य व्यवस्था सरकार द्वारा की जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने खुद अस्पताल जाकर इस घटना के पीडितों का हाल जाना तथा मारे गए लोगों के परिजनों को व वेंटीलेटर पर इलाज करवा रहे तथा अस्पताल में भर्ती मरीजों को सहायता राशि देने का ऐलान किया हैं। -निधि जैन

वीडियो गेम का हुनर भी कारगर

थोड़ी अजीब लेकिन खौफनाक यह बीमारी हैं जो बेशक़ इंसानियत पर, दुनिया पर भारी पड़ रही हैं। भारत में कोविड-19 के नए मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि जारी है। बीते दिन स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोना से संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 69,79,424 पहुंच गई है और कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या के हिसाब से अमेरिका के बाद भारत दुनिया में सबसे प्रभावित देश बन चुका है। कोविड़-19 का बढ़ता संक्रमण दुनियाभर के लिए मौजूदा वक्त में चिंता का सबब बना हुआ है। 210 से भी अधिक देश इस महामारी से प्रभावित है। वास्तविक में, इस महामारी पर नियंत्रण के लिए जिस एक चीज का विश्व भर के लोगों को इंतजार है, वह है कोरोना की काट यानी कोरोना वैक्सीन लेकिन अभी तक किसी भी देश ने कोरोना वैक्सीन पर मुहर नहीं लगाई है। बहरहाल अब वीडियो गेम खेलने के शौकीन वालों का यह हुनर कोरोना मरीजों की जान बचाने में मददगार साबित हो सकता है क्योकिं हावर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक खास तरीके का वीडियो गेम विकसित किया है। जिसमें खिलाड़ियों को कोरोना की कुछ वैक्सीन दी जाएगी, जिसका उपयोग करके उन्हें 99 से ज्याद...

मजदूरों पर ही आफत

कोरोना के कारण अपने-अपने घर जा रहे मजदूरों पर हर समस्या आफत बनकर टूट रही हैं। कभी पुलिस की लाठी, तो कहीं पेट की भूख, कहीं सड़कों पर हो रहे हादसे और कहीं गरीबी की मार झेल रहे मजदूर। हर तरफ से गरीब ही परेशान है। हालही में दिल्ली से कानपुर जा रहे मजदूरों के साथ उत्तर प्रदेश के औरैया में हुआ दर्दनाक ट्रक हादसा। जिसमें 23 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई व 35 से ज्यादा लोगों की हालत गंभीर हैं। और किसे पता था कि, घर जाने की आशा लेकर दिल्ली से चले मजदूरों के साथ इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। घर जाने के मोह में वह लोग दुनिया को ही अलविदा कह देंगे। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें। एवं उनके परिवार को इस दुख की घड़ी से उभरने की ताकत दें। -निधि जैन

जल्द से जल्द रोक लगें

देश की उन्नति में जिन्होंने अपना योग दान दिया, देश को जो एक नई ऊंचाइयों पर ले कर गए। उन्हें तो फंसाने की कोशिश की जा रही है पर जो सड़कों पर, गलियों में दिल्ली के चांदनी चौक में, कनॉट प्लेस, पहाड़गंज में हजारों हजारों आदमी ड्रग्स ले रहे हैं ड्रग्स के काले धंधे कर रहे हैं उनकी तरफ तो प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। जो देश पर बोझ हैं, जो देश का नाम बदनाम कर रहे हैं, उनके खिलाफ तो कोई कार्रवाही नहीं होती। बहरहाल, दुनियाभर में युवाओं को अपनी गिरफ्त में लेने के बाद ड्रग्स ने धीरे धीरे भारत में अपने पैर पसारने पूर्ण रूप से शुरू कर दिए है। बदलती लाइफस्टाइल में युवाओं को इसकी ओर आकर्षित किया है। दिल्ली, बैंगलोर जैसे बडे़-बडे़ शहरों में पार्टीयों में ड्रग्‍स बड़ी बेखौफी के साथ सप्‍लाई होने लगे है। जो अवश्य ही भयावह है। गांजा, हेरोइन, क्रिस्टल, मेथ, एलएसडी और कोकीन कुछ इस तरह के ड्रग्स है जिनकी लत अगर आपको या आपके अपनों को लग जाए तो यह जिंदगी बर्बाद कर देते है। वैसे तो दैनिक या हर दूसरे दिन हम ड्रग दुरुपयोग और ड्रग व्यसन शब्दों के बारे में पढ़ते या सुनते रहते हैं और कई बार...

मजबूर मजबूर

भारत में कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार ने लॉकडाउन का तीसरा चरण भी शुरू कर दिया हैं, हालांकि इस दौरान सरकार ने कई बातों पर ध्यान दिया हैं। जिसमें गरीब से लेकर उद्योगों पर ध्यान दिया गया हैं। और सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश की है, कि कोई भी इस संकट में भूखा ना सोए और अर्थव्यवस्था भी न लड़खड़ाए। परंतु इस लॉकडाउन की स्थिति में जो सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। वह है गरीब, किसान व दिहाड़ी मजदूर। लॉकडाउन के कारण कोई यातायात सुविधा न होने की वजह से मजदूर साइकिल व पैदल ही अपने घर के लिए निकल रहे हैं। जिसमें से कुछ की रास्ते में ही तबीयत बिगड़ने से मौत हो रही हैं। कई प्रवासी मजदूर दूसरी जगह ही फंसे रह गए हैं। गौरतलब यह है कि मजदूर मजबूर हो गए है, रोजगार उन से दूर हो गया है बीमारी तो लाया था अमीर, इसमें गरीब का क्या कसूर हो गया हैं। मजदूर तो हमारे समाज का वह तबका होता है, जिस पर समस्त आर्थिक उन्नति टिकी होती है, अगर वह ही मजबूर हो जाएगा तो राष्ट की प्रगति कैसे होगी। -निधि जैन

पाकिस्तान में रचा इतिहास

वर्ष 1947, से भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद शुरू हो गया था। जिसमें कश्मीर समस्या, नदी जल बंटवारे व कारगिल जैसे युद्ध हुए तथा जम्मू कश्मीर में भी आतंकियों से मुठभेंड के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे में पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार एक हिंदू युवा को एयरफोर्स में पायलट के रूप में चयनित किया गया हैं। जो कि भारत के लिए गर्व की बात हैं। राहुल देव नाम के युवा पाकिस्तानी वायुसेना में जीडी (जनरल ड्यूटी) पायलट अफसर के रूप में भर्ती हुए हैं। राहुल पाकिस्तान वायुसेना में पहुंचने वाले थारपरकर जिले के पहले व्यक्ति हैं। पाकिस्तान में जहां पर आए दिन अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे में राहुल देव का पाकिस्तान एयरफोर्स में शामिल होना दर्शाता है कि वो कोई साधारण शख्स नहीं हैं। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए राहुल देव ने काफी संघर्ष किया है। पड़ोसी मुल्क के अल्पसंख्यक लोगों को राहुल देव से प्रेरणा लेनी चाहिए ताकि वह भी अपना उज्जवल भविष्य बना सके। -निधि जैन

तथ्य को बचाने के लिए अनिवार्य है टाइम कैप्सूल

राम इस धरती पर सबसे ज्यादा पूजे जानें वाले भगवानों में से एक हैं। वो एक ऐसे भगवान है जो राजा, संत व संतो के भी राजा है, राजाओं के भी संत है। वो ऐसे भगवान है, जिन्होने अपनी मां को दिया पिता का वचन निभाने के लिए 14 साल के लिए वन भी चले गए थे। उन्होंने अपना राज ऐसे छोड़ा जैसे कि उन्होंने कुछ छोड़ा ही ना हो। वो इकलौते ऐसे राजा थे, जिन्हे राज पाने का कोई भी अभिमान नहीं था। गौरतलब है कि, रामजन्मभूमि के इतिहास को सिद्ध करने के लिए जितनी लंबी लड़ाई कोर्ट में राम मंदिर को लेकर लड़ी गई है, शायद ही ऐसी कोई ओर लंबी लड़ाई कोर्ट में लड़ी गई होगी। जिसमें इतने वर्ष लगें हो। अयोध्या में राम मंदिर को लेकर सालों से काफी विवाद चल रहा था, लेकिन अब इस वर्ष इस बात पर मुहर लग चुकी है कि, अयोध्या में अब राम मंदिर ही बनेगा। जिसका नया स्वरूप भी आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले पांच अगस्त को राम मंदिर की अयोध्या में आधारशिला रखेंगे, जिसके बाद से ही मंदिर का निर्माण कार्य आरंभ हो जाएगा। बहरहाल, भविष्य में अगर कोई भी रामजन्मभूमी के संघर्ष के इतिहास पर सवाल उत्पन्न करता है या कोई भी विवाद शुरू हो जाता...

जांबाज महिला कांस्टेबल

तुम्हारे बाप की गुलामी के लिए नहीं पहनी है, यह पुलिस की वर्दी। सबके लिए मिशाल बनी सूरत पुलिस की जांबाज कांस्टेबल सुनीता यादव। सुनीता शुक्रवार रात वराछा क्षेत्र में ड्यूटी कर रही थीं। इसी दौरान उन्होंने एक कार को रुकवाया। जिसमें 5 युवक सवार थे। कॉन्स्टेबल के मुताबिक, यह लोग कर्फ्यू में घूम रहे थे और मास्क भी नहीं लगा रखा था। मौके पर ड्यूटी कर रही महिला कांस्टेबल ने उन पांच लोगों को जमकर फटकार लगाई। जिसके बाद उन युवकों ने स्वास्थ्य मंत्री के बेटे प्रकाश कानाणी को फोन करके बुलाया। जिसके बाद प्रकाश और सुनीता के बीच बड़ी बहस शुरू हो गई। फिर सुनीता ने कार पर एमएलए लिखी प्लेट भी उतरवाली और वहीं से मंत्री को भी फोन लगवाया। पहले तो मंत्री के बेटे प्रकाश ने सुनीता को 365 दिन सड़क पर खड़े रहने की ड्यूटी लगवा देने की धमकी भी दी। जिस पर सुनीता ओर भड़क गईं और बोलीं पुलिस की यह वर्दी तुम्हारे बाप की गुलामी करने के लिए नहीं पहनी है, औकात हो तो करवा देना मेरा ट्रांसफर। महिला कांस्टेबल इतने पर भी नहीं रुकी और आगे कहा तुम्हारे जैसे कितने नेता रोज आते हैं व रोज चले जाते हैं एंव सत्ता की ताकत मुझे मत बताओ। ...

ईश्वर की बनाई हुई एक शख्सियत है चाहे सबसे जुदा है, लेकिन अपनी ही एक अहमियत रखते है इस जहान में। भले ही लोग जन्म से पहले ही इन्हें मारने की साजिश करते हैं, और अगर जन्म हो भी गया तो घर में मातम मनाते हैं। अपने अस्तित्व की पहचान के लिए यह सबसे जुदा हो जाते हैं, लेकिन दुआ देने के लिए यह खुशी के मौके पर जरूर आते हैं। चाहे तालियों के सहारे दूसरों को दुआ ही देते हैं पर खुद नफरत बटोरतें हैं। परंतु है तो यह भी इंसान जिन्हे भी खुदा ने ही बनाया है पर पता नहीं क्यों इनको समाज से दूर रखा जाता है। हक तो इनका भी है समाज पर लेकिन फिर भी वह दर्जा नहीं दिया जाता इनको जो वास्तविकता में है इनका। परंतु अब धीरे-धीरे समाज की सोच बदल रही है, इन्हें भी अपना हक मिल रहा है तथा सरकार भी अपनी तरफ से पूरे प्रयास कर रही है कि इनको भी अपने हक का सम्मान मिले। जिसके यह असल में हकदार है। जिसके अनुसार सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज में इज्जत, आदर और हक प्रदान करने के लिए पिछले साल ट्रांसजेडर प्रोटेक्शन एक्ट कानून को भी पारित किया गया था। व इस साल भी सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ और सशस्त्र सीमा बल में भी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को केडर असिस्टेंट कमांडर पोस्ट में भर्ती होगी। जो कि एक उत्साहवर्धक कदम है। और अब जल्द ही इस कानून पर अधिक जानकारी के लिए अधिकारिक बैठक भी होगी। ताकि पूरे दस्तावेज के साथ ट्रांसजेंडर के हक के लिए कानून पारित हो सके। एंव गृह मंत्रालय ने सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्स यानी सीऐपीएफ को भी आदेश दिया है, कि वह दिसंबर में होने वाली भर्ती के आवेदन में थर्ड जेंडर कैटिगरी भी रखेगे। जिसके अुनसार एग्जाम भी कंडक्ट किया जाएगा। तथा डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग ने तो पहले ही अप्रैल में सभी केंद्रीय सरकारी विभागों को नोटिस जारी कर कहा था, कि सभी सरकारी नौकरियों की वेकेंसी के लिए ट्रांसजेंडर की एक कैटिगरी होनी अनिवार्य है। जिसमें सिविल सर्विस भी शामिल होगी। वैसे तो अभी तक सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्स में ट्रांसजेंडर की भर्ती नहीं की जाती है। लेकिन अब से सभी फोसेर्से में ट्रांसजेंड़रों की एंट्री होगी। व ट्रांस पर्सन्स के लिए सभी सरकारी नौकरियों में अलग से सीटें भी होगी। जो ट्रांसजेंडर के लिए बहुत ही अहम कदम है। और वैसे भी हकीकत में यह लोग समाज से कुछ उम्मीद थोड़ी ना करते हैं कि सिवाय थोड़े से सम्मान के लिए व उम्मीद के लिए कि इन्हें देख कर कोई मुँह ना फेरे, कोई हँसे नहीं एंव डरे नहीं। क्या इनका इतना सा भी हक नहीं है यह ख्वाब देखने का कि यह गर्व से अपना नाम ले सकें। -निधि जैन

ईश्वर की बनाई हुई एक शख्सियत है चाहे सबसे जुदा है, लेकिन अपनी ही एक अहमियत रखते है इस जहान में। भले ही लोग जन्म से पहले ही इन्हें मारने की साजिश करते हैं, और अगर जन्म हो भी गया तो घर में मातम मनाते हैं। अपने अस्तित्व की पहचान के लिए यह सबसे जुदा हो जाते हैं, लेकिन दुआ देने के लिए यह खुशी के मौके पर जरूर आते हैं। चाहे तालियों के सहारे दूसरों को दुआ ही देते हैं पर खुद नफरत बटोरतें हैं। परंतु है तो यह भी इंसान जिन्हे भी खुदा ने ही बनाया है पर पता नहीं क्यों इनको समाज से दूर रखा जाता है। हक तो इनका भी है समाज पर लेकिन फिर भी वह दर्जा नहीं दिया जाता इनको जो वास्तविकता में है इनका। परंतु अब धीरे-धीरे समाज की सोच बदल रही है, इन्हें भी अपना हक मिल रहा है तथा सरकार भी अपनी तरफ से पूरे प्रयास कर रही है कि इनको भी अपने हक का सम्मान मिले। जिसके यह असल में हकदार है। जिसके अनुसार सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज में इज्जत, आदर और हक प्रदान करने के लिए पिछले साल ट्रांसजेडर प्रोटेक्शन एक्ट कानून को भी पारित किया गया था। व इस साल भी सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सी...

मजदूरों को उनके कौशल के हिसाब से मिले काम

महामारी और लॉकडाउन के कारण आम लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूरों को अपने घर के लिए पलायन करना पड़ा था जिसकी वजह से उनसे उनकी कमाई का साधन भी छिन गया है। लेकिन केंद्र सरकारों ने प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार का इंतजाम करा है परंतु चिंतापुर्ण विषय यह है, कि यह काम सिर्फ प्रवासी मजदूरों को तत्कालित एक राहत दे सकता है उनके कौशल के साथ न्याय नहीं कर सकता। बेशक अब बेरोजगारी के आंकड़ों में गिरावट आ रही है लेकिन मजदूरों को उनके कौशल के हिसाब से काम मिलना अनिवार्य है व इन कुशल कामगारों से जो इनका काम छूटा है उससे इस काम की तुलना नहीं की जा सकती जो उन्हें अभी उपलब्ध कराया जा रहा है। मौजूदा वक्त में प्रवासी मजदूरों को रोजगार देकर हम तत्कालीन तौर पर तो बेरोजगारी के आंकड़े को दुरुस्त कर सकते हैं परंतु वास्तविक में यह भविष्य में कई कठिनाइयों को न्योता दे सकता है। बहरहाल, अभी बेरोजगारी का आंकड़ा 17.5 फीसदी से 8.5 फीसदी तक पहुंच गया है जो लॉकडाउन से पहले 8.7 फीसदी तक था जिसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। और अगर जल्द ही सरकार द्वार...

कोरोना को पत्नी का दर्जा

जहां विश्व कोविड-19 महामारी के प्रकोप से जूझ रहा है। व लोग इस जानलेवा वायरस से बचाव के तरीके अपना रहे हैं। वहीं कई लोग इस वायरस को लेकर ऐसे लापरवाह है, कि यह जानलेवा वायरस नहीं कोई मजाक हो। यह वायरस दुनियाभर में तांडव मचा रहा है व लाशों की कतारें बिछा रहा है। संक्रमितों का आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। परंतु कई लोग इसे सीरियसली नहीं ले रहे है। इंडोनेशिया के सीनियर नेता, कोऑर्डिनेटिंग लीगल, पॉलिटिकल एंड  सिक्युरिटी अफेयर्स मिनिस्टर महफूद ने यूट्यूब पर ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्रोग्राम के दौरान कोरोना पर विवादित बयान देकर हड़कंप मचा दिया है। नेताजी ने सबके सामने कोरोना को पत्नी का दर्जा दे दिया और कहा कि यह शख्स की जिंदगी में पत्नी की तरह जगह बना चुका है। व कहा कि आप चाहें या ना चाहें, आपको इसके साथ जीना पड़ेगा। मंत्रीजी ने आगे कहा कि अब हमें कोरोना को अपनी पत्नी समझ उसके साथ जीना सीखना होगा। क्यूंकि यह वायरस हमें छोड़कर कहीं जाने वाला नहीं है। जाहिर सी बात है 63 साल के ये नेताजी युवाओं के बीच कूल बनने की कोशिश कर रहे थे। परन्तु मामला इन पर ही पूरा उल्टा पड़ गया। जैसे ही ये बयान...

चीन में कोरोना की वापसी

चीन के वुहान शहर से जन्मा कोरोना वायरस दुनिया भर में हाहाकार मचा रहा है। लेकिन चीन का दावा था कि उन्होंने वायरस पर पकड़ बना ली है। परंतु अब फिर से कोविड-19 की दूसरी लहर का खतरा चीन में मंडरा रहा है। बीते दिनों चीन में कोविड-19 संक्रमित मरीजों के आंकड़े में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। जिसके बाद चीन की प्रमुख सीफूड, फल और सब्जी बाजार शिनफादी मार्केट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। क्योंकि सबसे ज्यादा संक्रमित लोग इसी बाजार में से पाए गए हैं। इसके अलावा राजधानी के पांच अन्य बाजारो को भी पूरी तरह से बंद कर दिया है। आसपास के 11 रिहायशी इलाकों और नौ स्कूलों में सख़्ती से लॉकडाउन लगा दिया गया है। लोगों का मानना है कि सैल्मन मछली से फिर से कोरोना वायरस संक्रमण फैला है। इसीलिए नए मामलों के मिलने की खबर फैलते ही शहर भर के मुख्य सुपरमार्केट चेन ने मछली बेंचना बंद कर दिया। व बाजार से संबंध रखने वाले लोगों की जांच शुरू कर दी गई है। यह बेशक संकट की घड़ी है, परंतु महामारी की रोकथाम के लिए हमे अपने सुरक्षा उपायों को एक सेकेंड के लिए भी नहीं भूलना है। हमें वायरस से लंबे समय तक लड़ने के लिए तैय...

लॉकडाउन 4.0

लॉकडाउन 4.0 का आह्वान हो गया है। कोविड-19 संक्रमित मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। लॉकडाउन के कारण पहले से ही मजदूरों को काफी परेशानी हो रही है। ऐसे में एक बार फिर से लॉकडाउन का बढ़ना मजदूर, किसान व गरीबों के लिए काफी परेशानी ला सकता है। लॉकडाउन के चलते अलग-अलग राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूर व किसान अपने-अपने घर के लिए पैदल ही रवाना हो गये है। परंतु इसी बीच सड़क पर हादसे हो रहे हैं। भूख से तड़पते हुए, पुलिस की लाठी खाते हुए एवं गरीबी की मार झेल रहे मजदूर बौखला गए हैं। हर समस्या आफत बनकर मजदूरों पर टूट रही है। ऐसे में घर जाने की चाह लेकर भड़के प्रवासी मजदूरों ने गुजरात, मध्य प्रदेश - महाराष्ट्र के बॉर्डर व दिल्ली में पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। जिसकी वजह से कई पुलिसकर्मी घायल भी हो गए। घर जाने की चाह में मजदूरों का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। -निधि जैन

खिल उठी प्रकृति हवा-पानी हुआ शुद्ध

पर्यावरण ऐसे खिल उठा है, मानो लॉकडाउन उसके लिए वरदान बनकर आया है। कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए 24 मार्च से लागू लॉकडाउन गरीब, प्रवासी मजदूरों के लिए आफत बना हुआ है, लेकिन हर तरफ स्वच्छता का आलम दिखने लगा है। नीला आसमान नजर आ रहा है। बाग बगीचे सुंदर हो गए हैं। पक्षियों का जीवन खिलखिला उठा है। शोरगुल वाली दुनिया से आराम करने का अवसर मिला है। यह यकीनन संकट की घड़ी है, लेकिन हमें इससे सबक भी लेना चाहिए ताकि पर्यावरण भी स्वच्छ रहे और हमारा जीवन भी सुरक्षित रहे। -निधि जैन

2021 में भी लड़ना हैं कोरोना से!

साल 2020 शुरुआत से ही वैश्विक स्वास्थ्य के लिए त्रासदीपूर्ण रहा है। यह पूरा साल लोगों ने कोरोना वायरस से जंग लड़ते हुए गुजारा है। भले ही कुछ दिनों में नए साल का आगमन होने वाला है लेकिन कोरोना का खतरा अगले साल भी बरकरार रहने के आसार हैं। जिसके मद्देनजर, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2021 में वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों की एक सूची जारी की है, जिनसे दुनिया को 2021 में निपटना पड़ेगा। ड़ब्लूएचओ के अनुसार, वैश्विक महामारी कोरोना ने पिछले 20 सालों में हासिल की गई वैश्विक हेल्थ प्रणाली की रफ्तार कम करते हुए उसे पीछे की ओर खींच लिया है और इसीलिए 2021 में दुनिया को अपनी स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। अगले वर्ष, कोविड़-19 के खिलाफ लड़ने के साथ-साथ, दुनिया भर के देशों को विभिन्न बीमारियों से लड़ने के लिए भी अपनी स्वास्थ्य प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता होगी। 2021 में आम जनता तक कोरोना वैक्सीन और इलाज की पहुंच को सुगम बनाना सबसे जरूरी हैं वरना कोरोना से पीड़ित लोगों के आकड़े रोजाना बढ़ते जाएगे। दुनिया भर को अपनी स्वास्थ्य प्रणाली को आधुनिक रूप स...

2020 ने बहुत कुछ सिखाया

बेशक कई लोगों के लिए साल 2020 बेकार रहा हैं, लोग बीते वर्ष को भूल जाना चाहते होंगे, कुछ लोगों का तो मानना हैं कि अगर उनका बस चले तो वह इस साल को अपने जीवन से डिलीट ही कर दें लेकिन वर्ष 2020 भूलने का नहीं, बल्कि याद रखने का साल है क्योंकि यह साल एक सख्त टीचर की तरह समूचे विश्व के लोगों के लिए रहा। 2020 से अवश्य ही लोग त्रस्त रहें परन्तु अगर गौर किया जाए तो हमें यह समक्ष आएगा कि इस वर्ष ने हमें ज्यादा बेहतर तरीके से 2021 में जाने लिए तैयार किया है, 2020 ने हमें सबसे बड़ी सीख यह दी है कि बदलाव के लिए हमेशा हमें तैयार रहना चाहिए। भविष्य और अतीत की ज़रूरत से ज़्यादा अंदाज़ा लगाने की बजाय वर्तमान के पहलुओं को जीना चाहिए। हमेशा जिंदगी में ज़्यादा और बेहतर का प्रयास करना चाहिए यानी अपने स्वास्थ्य से लेकर अपने रिश्तों, रोज़गार और अपनी लाइफस्टाइल को पहले से ज़्यादा बेहतर और पहले से ज़्यादा मज़बूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए। 2020 ने लोगों के जीवन की गति पर ब्रेक लगाया इसलिए आने वाले वर्ष में दोगुनी ताकत लगानी होगी और अपनी क्षमताओं को ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ाना होगा और अपने व्यक्तित्व को ...

कई देश विस्तारवाद के खिलाफ भारत के साथ हैं

चीन की साज़िशों के चलते यह तो तय है कि आने वालो वर्षों में युद्ध तो आवश्यक होगा ही क्योकिं चीन अपनी नापाक हरकतों से कतई बाज नहीं आ रहा है चाहें वो एलऐसी पर हो या अन्य किसी बार्डर पर। वैसे माना तो यह जाता है कि युद्ध के मैदान में ताकतवर तोप जीत की गारंटी होती है व 28 सितंबर का भारतीय सेना के आर्टिलेरी यानी तोपखाने से गहरा संबंध है और इसी दिन वर्ष 1827 में तत्कालीन भारतीय सेना की पहली आर्टिलेरी रेजिमेंट की स्थापना भी हुई थी। वर्ष 1827 में इस रेजिमेंट का नाम फाइव माउंटेन बैटरी था लेकिन अब इसका नाम 57 फील्ड रेजीमेंट रखा गया है। जिसका मुख्य सिद्धांत है सर्वत्र इज्जत-ओ-इकबाल। एंव हर वर्ष इस रेजीमेंट के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए गनर्स डे मनाया जाता है वैसे जब भी तोपखाने की बात होती है, तो कारगिल युद्ध में बोफोर्स तोप की तस्वीरें जरूर याद आती है क्योकिं सैन्य विशेषज्ञ का मानना हैं कि कारगिल युद्ध में भारत की जीत की एक बड़ी वजह बोफोर्स तोप ही थी। बहरहाल, करीब 60 दिनों से ज्यादा चले कारगिल युद्ध में बोफोर्स तोपों ने ढाई लाख राउंड फायर किए थे जो अपने आप में ही बड़ी बात है। वैसे इन तोपो...

यह कहां का न्याय हैं?

जिस्म की प्यास बुझाने में लोग जात पात नहीं देखते हैं, और बात शादी की हो तो कुंडली मिलाते हैं यह कहां का न्याय हैं? चंद लम्हों की भूख मिटाने के लिए वो कुछ खुदगर्ज़ लोग लड़कियों के जीवन से बिन सोचे-समझे खिलवाड़ कर देते हैं न जाने क्या मिलता है उन लोगों को। इस संसार की हर एक बेटी प्‍यारी है चाहे वह हमारी हो या तुम्‍हारी हो, वहीं इज्‍जत लूटने वाले को मौत की सजा देनी होगी चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम हो। बहरहाल लोग रेप करके रेप को छुपाने के लिए हर मुमकिन प्रयास करते हैं और अगर पीड़िता केस फाइल कर दे तो केस वापस लेने का दबाव बनाया जाता है जिस के डर से पीड़िता जहर खाने, खुदकुशी करने को मजबूर हो जाती है। कुछ मिंटो के मजे के लिए वह दुष्कर्मी तन ही नहीं रूह भी तार तार कर देते हैं। गौरतलब है कि बेटियों के हाथो की सुंदरता बढाने के लिए चूड़ियाँ नहीं बल्कि कलम दनी चाहिए ताकि वो अपना हाथ नही बल्कि अपना भविष्य सवार सके, साथ में हथियार भी दें जिससे कि मौका आने पर राक्षसों को ठोक सकें। पीरियड्स में मंदिर जाने पर धर्म भ्रष्ट हो जाता है लेकिन उसी मंदिर में बलात्कार होने पर घटना को दबाया जाता है। उल्लेखनी...

एक दिन नहीं, समूचे वर्ष

प्रतेक वर्ष 8 मार्च को विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्रेम प्रकट करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में, यह दिवस अपना राजनीतिक मूलस्वरूप पूर्ण रूप से खो चूका है, और अब यह मात्र महिलाओं के प्रति अपने प्यार को अभिव्यक्त करने हेतु एक तरह से मातृ दिवस और वेलेंटाइन डे की ही तरह बस एक अवसर बन कर रह गया हैं। वहीं कई जगहों पर यह दिन केवल कुछ राजनीतिक पार्टियों के लिए अवसर लेके आता है। बहरहाल हम हमेशा से इस बारे में बात करते है और आए है कि महिलाओं को उनके हक का मान-सम्मान मिले व वो भी अपनी जिंदगी खुलकर जीए एंव पुरुषों के बराबर ही उन्हें भी अधिकार मिले आदि कई बातों के लिए महिलाएं हमेशा से ही एक लंबी लड़ाई लड़ती आ रही है लेकिन अभी तक उनको वो सम्मान हमारे समाज में नहीं मिला है। गौरतलब है कि उस समाज में जहां प्रतिदिन रेप के केस बढ़ते जा रहे है वही लोग हर साल महिलाओं के प्रति आदर दिखाने का ढ़ोंग करते है, बल्कि महिलाओं के ...

कोरोना काल का एक वर्ष

  ठीक एक साल पहले देश ठहर गया था, सड़कें विरान हो गई थी, अर्थव्यवस्था नीचे गिर गई थी, लोग पलायन करने को मजबूर हो गए थे आदि भी कई परेशानियों का सामना देश को करना पढ़ा था। हालांकि कोरोना महामारी से मिली आर्थिक चुनौतियों से निपटने में भारत सरकार द्वारा दिखाई गई तत्परता के नतीजतन देश की अर्थव्यवस्था जल्द ही पटरी पर लौट रहीं हैं लेकिन, कोराना काल में संघर्ष कर रहे अनेक उद्योगों की हालत में अब तक कोई खास सुधार नहीं आया है। पहले सीएए-एनआरसी, कोविड़-19 महामारी और किसान आंदोलन के चलते खासतौर से प्रिंटिंग प्रेस, विज्ञापन और लग्जरी आइटम से जुड़े छोटे-छाटे उद्योग आज भी बेहाल हैं। कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के प्रभाव उपाय के तौर पर पिछले साल 24-25 मार्च की आधी रात को देशभर में पूर्णबंदी यानी पूरा लॉकडाउन लागू किया गया था, जिसे बीते दिनों एक साल पूरा हो गया है। हालांकि, बाद में लॉकडाउन में चरणबद्ध तरीके से जरूरत के मुताबिक, ढील दी गई और उद्योग व व्यापार पटरी पर लौटने लगा, परन्तु आज भी खाद्य-वस्तुओं से जुड़े कारोबार के अलावा अन्य सेक्टरों को संघर्ष करना पड़ रहा है। उनके काम-ध...

क्यां होली के दिन भी शोक मनाया जाता हैं?

  देशभर में होली का पर्व हर्षोलास के साथ मनाया जाता है। होली पर लोग एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर आपसी मतभेद को भूलकर एक दूसरे को गले लगाकर बधाइयां देते हुए दिखाई देते है लेकिन शायद ही किसी को पता होगा कि कांठल में होली के दिन शोक मनाते हैं और गम में डूबे रहते हैं। यहां पर कोई एक दूसरे को रंग और गुलाल नहीं लगाता। रंगों के त्यौहार होली पर यहां सन्नाटा पसरा रहता है। प्रतापगढ़ में होली जलाने के बाद दूसरे दिन धुलण्डी पर लोग न तो एक दूसरे को रंग लगाते हैं और न ही फाग के गीतों की मस्ती यहां नजर आती है। नजर आता है तो केवल सन्नाटा। यहां के बाजारों में सामान्य चहल पहल रहती है। प्रतापगढ़ और आस पास के ग्रामीण इलाकों में लोग होलिका दहन तो करते हैं, लेकिन दूसरे दिन धुलंडी का पर्व नहीं मनाते हैं। कभी यहां पर भी रंगों का यह त्यौहार बड़े उमंग और उत्साह के साथ मनाया जाता था। लोग एक दूसरे पर रंग और गुलाल लगाते थे। स्थानीय लोगों का मानना है कि करीब दो सौ साल पहले रियासत कालीन दौर में जब प्रतापगढ़ भी एक रिसासत थी, यहां राजपरिवार में होली पर किसी की मौत हो गई थी तो तभी से यहां पर होली नहीं खेली जाती...

कितना कुछ बदला

  इसमें कोई दोहराया नहीं है कि कोरोना संकट का सबसे बुरा असर रोजगार पर पड़ा। उद्योग धंधे बंद हुए तो लाखों की संख्या में लोग बेरोजगार हो गए। हालांकि, अब धीरे-धीरे कुछ सुधार हुआ है। पिछले साल मार्च में बेरोजगारी दर 8.8 फीसद थी, जो अब 6.9 फीसद पर आ गई है। महामारी के चलते ट्रेनों का पहिया रुका तो रेलवे को यात्री किराये के रूप में करीब 38,017 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा, जो कुल राजस्व का 71 फीसद से अधिक है। इंडियन एयरलाइंस समेत सभी विमान कंपनियों को भी भारी नुकसान हुआ। बहरहाल, अब घरेलू विमान सेवा में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। बाजार बंद हुए, कोरोना की दहशत बढ़ी तो लोग ऑनलाइन मार्केटिंग पर निर्भर हो गए। ऑनलाइन खरीदारी करने वालों में 64 फीसद तक की वृद्धि दर्ज की गई। लॉकडाउन में स्कूल बंद हुए तो ऑनलाइन शिक्षा का चलन शुरू हो गया। स्कूली कक्षाएं हो या फिर डिग्री कालेजों और प्रतियोगी परीक्षाएं सभी ऑनलाइन ही आयोजित की गईं। जो अभी भी ऑनलाइन ही चल रही हैं। वहीं कोरोना महामारी से जंग में दुनिया में भारत की साख एक मददगार देश के रूप में और मजबूत हुई है। भारत पूरे विश्व को कोरोना रोधी टीका दे ...

अदृश्य दुश्मन ने बहुत कुछ सिखाया

  जनता कर्फ्यू के साथ शुरू हुई कोरोना महामारी से जंग ताली व थाली बजाने से होते हुए आज टीकाकरण पर आ टिकी है। हालांकि इस दौरान एक दौर ऐसा भी आया जब अदृश्य दुश्मन के डर से लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए थे, परन्तु इसी दौर ने खाकी के पीछे छिपी इंसानियत को भी दुनिया के सामने ला दिया। इस मुश्किल घड़ी में चिकित्सक भगवान बनकर सामने आए तो वैक्सीन की खोज में विज्ञानियों ने भी जान लगा दी। वहीं समाज को कई नायक मिले और दुश्वारियां सहते हुए लोगों की जिजीविषा भी देखने को मिली। इस दौरान कई राज्यों में सफलतापूर्वक चुनाव भी हुए। रोजगार के अवसर खत्म हुए, उद्योग धंधे ठप हुए, पढ़ाई-लिखाई भी रुकी लेकिन जिंदगी का कारवां चलता रहा। वहीं एक समय ऐसा भी आया कि लोगों को लगने लगा कि हमने कोरोना से जंग जीत ली है, पर कुछ लोगों की लापरवाही व नासमझी ने हमें फिर पाबंदियों, सख्ती, कर्फ्यू व लॉकडाउन के अंधेरे कुएं की तरफ धकेल दिया है। यूं तो देश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला सुदूर दक्षिण के राज्य केरल में पिछले साल 30 जनवरी को सामने आया था, जब चीन के वुहान शहर से लौटी मेडिकल की एक छात्रा को संक्रमित प...

अब सैनीटाइजर से भी खतरा

  चीन से निकल कर पूरी दुनिया में तबाही मचाने वाली वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते हमारी जीवनशैली और आदतों में बढ़ा बदलाव आया है। हम सभी ने कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मास्क पहनने, हैंड सैनिटाइज करने और उचित दूरी बनाकर रखने की आदत बना ली है लेकिन इस बीच एक चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। वैज्ञानिकों की माने तो हम जिन सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते हैं, उनमें से 44 सैनिटाइजर में कैंसर का खतरा बढ़ाने वाले खतरनाक रासायनिक तत्वों का उपयोग किया जा रहा है। हाल ही में एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। उल्लेखनीय है कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की दस्तक देने के बाद से ही दुनिया भर में सैनिटाइजर की खपत बढ़ गई हैं। वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अस्पताल से लेकर हर घर में, बड़ों से लेकर बच्चें तक सैनिटाइजर का जमकर प्रयोग कर रहे हैं, एक अध्ययन में 260 से अधिक हैंड सैनिटाइजर पर एक विस्तृत अध्यन किया गया है। जिससे यह पता चला है कि 44 से अधिक सैनिटाइजर में बेंजीन समेत कैंसर का खतरा पैदा करने वाले कई खतरनाक कैमिकल मिले हैं। बेंजीन एक तरल रसायन है, जो आमतौर पर रंगहीन होता है, लेकिन...

2015 से ही हो गई थी महामारी की तैयारी?

 एक वर्ष से अधिक हो चुका है कोरोना महामारी के प्रकोप को। हालांकि आरम्भ से ही इसके पीछे चीनी साजिश को लेकर कई बातें कही जा रही हैं परन्तु इसका पुख्ता परिणाम नहीं मिला था। बहरहाल हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्रालय को चीन के सैन्य विज्ञानियों और वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों को खुफिया दस्तावेज मिला है। जिसके अनुसार, चीन के विज्ञानी 2015 से ही कोरोना वायरस को प्रयोगशाला में कृत्रिम तरीके से एक घातक जैविक हथियार में बदलने की संभावना पर काम कर रहे थे क्योंकि उनका मानना है कि तीसरा विश्व युद्ध जैविक हथियारों से ही लड़ा जाएगा। गौरतलब है कि चीन भले ही वैश्विक महामारी कोविड़-19 के फैलने में अपना हाथ होने से इन्कार करता रहे, लेकिन समय के साथ कई ऐसे तथ्य मिल रहें है जो चीन की इस साजिश की कलई खोलते दिख रहे हैं। चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में कोरोना वायरस को लेकर लंबे वक्त से शोध चल रहा था व ये प्रयोगशाला वुहान के उस बाजार से मात्र 16 किलोमीटर दूर है, जहां से मौजूदा महामारी की शुरुआत बताई जाती है। वहीं यह बात भले न मानी जाए कि मौजूदा वायरस को चीन ने जान बूझकर फैलाया, लेकिन बहुत से विज्ञान...

कौन भरेगा 814 करोड़ का नुकसान?

 किसान आंदोलन की आड़ में जहां कई लोगों ने अपना उल्लू सीधा किया तो वहीं 16 मार्च तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआइ को 814 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा। 4 महीने से भी अधिक समय से दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर तीनों कृषि कानूनों के विरोध में धरना प्रदर्शन जारी है। इस बीच सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली की सीमा में अब कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनकारियों की संख्या में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है। सिंघु बॉर्डर-नरेला रोड पर ट्रैक्टरों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। यहां पर प्रदर्शनकारियों की संख्या में इजाफा होने के पीछे नया एंगल है। दरअसल, कुछ लोग यहां पर होला मोहल्ला मनाने आएं हैं तो कुछ कथित तौर पर ड्यूटी करने। वहीं, पंजाब के कुछ किसान जुर्माने के डर से भी आ रहे हैं। इसके चलते यहां पर प्रदर्शनकारियों की संख्या में इज़ाफा हुआ है। पंजाब के गांवों के प्रधानों ने एक फरमान जारी कर रखा है कि, हर परिवार का एक सदस्य महीने में कम से कम एक बार सिंघु बॉर्डर पर जरूर आएगा और दस दिन यहीं पर रहेगा। ऐसा न करने पर परिवार पर जुर्माना लगाया जाएगा। ऐसे में जो लोग यहां नहीं आना चाहते...

नेता रैली में और जनता तालाबंदी में

 दिल्ली में लगातार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व अन्य अधिकारी कोविड-19 के गंभीर हालात को लेकर बैठक कर रहे हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर चिन्तित हैं परन्तु असम, बंगाल एंव अन्य कई राज्यों में क्यां उन्हीं प्रधानमंत्री की रैलियों में आए लोगों ने कोविड के नियमों का पालन किया है? किसी ने मास्क पहना है? दो गज़ की दूरी का पालन किया हैं? प्रधानमंत्री चिन्तित हैं कि इन्हें कोरोना हो गया तो? बहरहाल चुनाव शुरू होते ही हर दल के नेता भीड़ की तस्वीरों को ट्वीट करने लगे और अपनी लोकप्रियता की ताकत दिखाने लगे परन्तु उन तस्वीरों में मास्क नदारद था। अब तो लोग हकीकत में मानने लगे हैं कि कोरोना का प्रकोप खत्म हो गया हैं, जो केवल मज़ाक हैं। जहां चुनाव होता है वहां कोरोना का कोई डर नहीं होता है, कोई नाइट कर्फ्यू नहीं होता है, कोई लॉकडाउन नहीं होता है। मंच से प्रधानमंत्री को दिखता ही होगा कि कोई मास्क पहन कर नहीं आया है। क्या प्रधानमंत्री ने अपनी चुनावी सभाओं में लगातार दो गज की दूरी और मास्क पहनने की अपील की? उनके भाषणों में इसका ज़िक्र होता है कि कोरोना के समय गरीबों को क्या क्या दिया लेकि...

करोड़ों लोगों की जाती है जान

 सन् 1720, फिर 1820, इसके बाद 1920 और अब 2020। अब ये इत्तेफाक है या कुछ और पता नहीं, पर पिछले चार सौ सालों में हर सौ साल बाद एक ऐसी महामारी जरूर आई है जिसने पूरी दुनिया में तबाही मचाई हैं। हर सौवें साल आने वाली इस महगामारी ने दुनिया के किसी कोने को नहीं छोड़ा। करोड़ों इंसानों की जान लेने के साथ-साथ इसने कई इंसानी बस्तियों के तो नामो-निशान तक मिटा दिए। दुनिया में हर 100 साल पर महामारी का हमला हुआ है। सन् 1720 में दुनिया में द ग्रेट प्लेग आफ मार्सेल फैला था। जिसमें 1 लाख लोगों की मौत हो गई थी व 100 साल बाद सन् 1820 में एशियाई देशों में हैजा फैला था। जिससे भी एक लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई थी एंव इसी तरह वर्ष 1918 से 1920 में दुनिया ने झेला स्पेनिश फ्लू का क़हर देखा था। इस बीमारी ने उस वक्त करीब 5 करोड़ लोगों को मौत की नींद सुला दिया था और अब फिर 100 साल बाद दुनिया पर आई कोरोना की तबाही। जिसके कारण समूचे विश्व में लोग घरों में रहने के लिए मजबूर हैं।बहरहाल, सवाल उठता है कि क्यों हर 100 साल में होता है इंसानी सभ्यता पर हमला? क्यों सब कुछ होते हुए भी इन महामारियों के सामने बेबस हो जात...

कभी नहीं जाएगा वायरस का प्रकोप?

 दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण के एक बार फिर बढ़ते मामलें सामने आ रहें है। वायरस के नए प्रकारों ने सबकी चिंता बढ़ा दी है। हालांकि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए कई देशों ने एक बार फिर लॉकडाउन का रास्ता अख्तियार किया है लेकिन जब तक लोग स्वयं सावधानी नहीं बरतेगे तब तक सरकार के तमाम कदम विफल ही रहेगें। वहीं वैज्ञानिकों का मानना है कि, वायरस का जीवित प्राणियों के संपर्क में आने से वह हमारे अस्तित्व में हमेशा रहेगा और इस वायरस से बचने का भस एक ही रास्ता है कि जितना हमारा शरीर इस वायरस के खिलाफ मजबूत होगा, उतना ही कमजोर होगा ये वायरस। बहरहाल पूरी दुनिया में तबाही मचाने वाले कोरोना वायरस को लेकर एक के बाद एक बड़ी खबर सामने आ रही है। इस वायरस पर बारीकी से काम करने वाले वैज्ञानिकों ने पाया है कि, कोरोना वायरस अब इस दुनिया से कभी नहीं जाने वाला है व यह वायरस जीवित प्राणियों के संपर्क में आने से हमेशा अपनी मौजूदगी दर्ज कराता रहेगा एंव वायरस की कमजोरी उसके अस्तित्व को खत्म नहीं करने वाली हैं बल्कि दुनिया के अन्य वायरसों की तरह अब इसका अस्तित्व भी हमेशा बना रहने वाला है। वैज्ञानिकों का ...