ईश्वर की बनाई हुई एक शख्सियत है चाहे सबसे जुदा है, लेकिन अपनी ही एक अहमियत रखते है इस जहान में। भले ही लोग जन्म से पहले ही इन्हें मारने की साजिश करते हैं, और अगर जन्म हो भी गया तो घर में मातम मनाते हैं। अपने अस्तित्व की पहचान के लिए यह सबसे जुदा हो जाते हैं, लेकिन दुआ देने के लिए यह खुशी के मौके पर जरूर आते हैं। चाहे तालियों के सहारे दूसरों को दुआ ही देते हैं पर खुद नफरत बटोरतें हैं। परंतु है तो यह भी इंसान जिन्हे भी खुदा ने ही बनाया है पर पता नहीं क्यों इनको समाज से दूर रखा जाता है। हक तो इनका भी है समाज पर लेकिन फिर भी वह दर्जा नहीं दिया जाता इनको जो वास्तविकता में है इनका। परंतु अब धीरे-धीरे समाज की सोच बदल रही है, इन्हें भी अपना हक मिल रहा है तथा सरकार भी अपनी तरफ से पूरे प्रयास कर रही है कि इनको भी अपने हक का सम्मान मिले। जिसके यह असल में हकदार है। जिसके अनुसार सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज में इज्जत, आदर और हक प्रदान करने के लिए पिछले साल ट्रांसजेडर प्रोटेक्शन एक्ट कानून को भी पारित किया गया था। व इस साल भी सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ और सशस्त्र सीमा बल में भी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को केडर असिस्टेंट कमांडर पोस्ट में भर्ती होगी। जो कि एक उत्साहवर्धक कदम है। और अब जल्द ही इस कानून पर अधिक जानकारी के लिए अधिकारिक बैठक भी होगी। ताकि पूरे दस्तावेज के साथ ट्रांसजेंडर के हक के लिए कानून पारित हो सके। एंव गृह मंत्रालय ने सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्स यानी सीऐपीएफ को भी आदेश दिया है, कि वह दिसंबर में होने वाली भर्ती के आवेदन में थर्ड जेंडर कैटिगरी भी रखेगे। जिसके अुनसार एग्जाम भी कंडक्ट किया जाएगा। तथा डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग ने तो पहले ही अप्रैल में सभी केंद्रीय सरकारी विभागों को नोटिस जारी कर कहा था, कि सभी सरकारी नौकरियों की वेकेंसी के लिए ट्रांसजेंडर की एक कैटिगरी होनी अनिवार्य है। जिसमें सिविल सर्विस भी शामिल होगी। वैसे तो अभी तक सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्स में ट्रांसजेंडर की भर्ती नहीं की जाती है। लेकिन अब से सभी फोसेर्से में ट्रांसजेंड़रों की एंट्री होगी। व ट्रांस पर्सन्स के लिए सभी सरकारी नौकरियों में अलग से सीटें भी होगी। जो ट्रांसजेंडर के लिए बहुत ही अहम कदम है। और वैसे भी हकीकत में यह लोग समाज से कुछ उम्मीद थोड़ी ना करते हैं कि सिवाय थोड़े से सम्मान के लिए व उम्मीद के लिए कि इन्हें देख कर कोई मुँह ना फेरे, कोई हँसे नहीं एंव डरे नहीं। क्या इनका इतना सा भी हक नहीं है यह ख्वाब देखने का कि यह गर्व से अपना नाम ले सकें। -निधि जैन

ईश्वर की बनाई हुई एक शख्सियत है चाहे सबसे जुदा है, लेकिन अपनी ही एक अहमियत रखते है इस जहान में। भले ही लोग जन्म से पहले ही इन्हें मारने की साजिश करते हैं, और अगर जन्म हो भी गया तो घर में मातम मनाते हैं।
अपने अस्तित्व की पहचान के लिए यह सबसे जुदा हो जाते हैं, लेकिन दुआ देने के लिए यह खुशी के मौके पर जरूर आते हैं। चाहे तालियों के सहारे दूसरों को दुआ ही देते हैं पर खुद नफरत बटोरतें हैं। परंतु है तो यह भी इंसान जिन्हे भी खुदा ने ही बनाया है पर पता नहीं क्यों इनको समाज से दूर रखा जाता है। हक तो इनका भी है समाज पर लेकिन फिर भी वह दर्जा नहीं दिया जाता इनको जो वास्तविकता में है इनका।
परंतु अब धीरे-धीरे समाज की सोच बदल रही है, इन्हें भी अपना हक मिल रहा है तथा सरकार भी अपनी तरफ से पूरे प्रयास कर रही है कि इनको भी अपने हक का सम्मान मिले। जिसके यह असल में हकदार है। जिसके अनुसार सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज में इज्जत, आदर और हक प्रदान करने के लिए पिछले साल ट्रांसजेडर प्रोटेक्शन एक्ट कानून को भी पारित किया गया था। व इस साल भी सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ और सशस्त्र सीमा बल में भी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को केडर असिस्टेंट कमांडर पोस्ट में भर्ती होगी। जो कि एक उत्साहवर्धक कदम है।
और अब जल्द ही इस कानून पर अधिक जानकारी के लिए अधिकारिक बैठक भी होगी। ताकि पूरे दस्तावेज के साथ ट्रांसजेंडर के हक के लिए कानून पारित हो सके। एंव गृह मंत्रालय ने सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्स यानी सीऐपीएफ को भी आदेश दिया है, कि वह दिसंबर में होने वाली भर्ती के आवेदन में थर्ड जेंडर कैटिगरी भी रखेगे। जिसके अुनसार एग्जाम भी कंडक्ट किया जाएगा। तथा डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग ने तो पहले ही अप्रैल में सभी केंद्रीय सरकारी विभागों को नोटिस जारी कर कहा था, कि सभी सरकारी नौकरियों की वेकेंसी के लिए ट्रांसजेंडर की एक कैटिगरी होनी अनिवार्य है। जिसमें सिविल सर्विस भी शामिल होगी।
वैसे तो अभी तक सेंट्रल पैरामिलिट्री फोर्स में ट्रांसजेंडर की भर्ती नहीं की जाती है। लेकिन अब से सभी फोसेर्से में ट्रांसजेंड़रों की एंट्री होगी। व ट्रांस पर्सन्स के लिए सभी सरकारी नौकरियों में अलग से सीटें भी होगी। जो ट्रांसजेंडर के लिए बहुत ही अहम कदम है। और वैसे भी हकीकत में यह लोग समाज से कुछ उम्मीद थोड़ी ना करते हैं कि सिवाय थोड़े से सम्मान के लिए व उम्मीद के लिए कि इन्हें देख कर कोई मुँह ना फेरे, कोई हँसे नहीं एंव डरे नहीं। क्या इनका इतना सा भी हक नहीं है यह ख्वाब देखने का कि यह गर्व से अपना नाम ले सकें।
-निधि जैन

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