कई देश विस्तारवाद के खिलाफ भारत के साथ हैं

चीन की साज़िशों के चलते यह तो तय है कि आने वालो वर्षों में युद्ध तो आवश्यक होगा ही क्योकिं चीन अपनी नापाक हरकतों से कतई बाज नहीं आ रहा है चाहें वो एलऐसी पर हो या अन्य किसी बार्डर पर।
वैसे माना तो यह जाता है कि युद्ध के मैदान में ताकतवर तोप जीत की गारंटी होती है व 28 सितंबर का भारतीय सेना के आर्टिलेरी यानी तोपखाने से गहरा संबंध है और इसी दिन वर्ष 1827 में तत्कालीन भारतीय सेना की पहली आर्टिलेरी रेजिमेंट की स्थापना भी हुई थी।
वर्ष 1827 में इस रेजिमेंट का नाम फाइव माउंटेन बैटरी था लेकिन अब इसका नाम 57 फील्ड रेजीमेंट रखा गया है। जिसका मुख्य सिद्धांत है सर्वत्र इज्जत-ओ-इकबाल। एंव हर वर्ष इस रेजीमेंट के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए गनर्स डे मनाया जाता है वैसे जब भी तोपखाने की बात होती है, तो कारगिल युद्ध में बोफोर्स तोप की तस्वीरें जरूर याद आती है क्योकिं सैन्य विशेषज्ञ का मानना हैं कि कारगिल युद्ध में भारत की जीत की एक बड़ी वजह बोफोर्स तोप ही थी।
बहरहाल, करीब 60 दिनों से ज्यादा चले कारगिल युद्ध में बोफोर्स तोपों ने ढाई लाख राउंड फायर किए थे जो अपने आप में ही बड़ी बात है। वैसे इन तोपों की सहायता से लगभग तीस किलोमीटर दूर तक निशाना लगाया जा सकता है और सिर्फ टाइगर हिल के ऑपरेशन में ही बोफोर्स ने नों हजार गोले फायर किये थे। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी युद्ध में इतने अधिक राउंड फायर किए गए थे। कारगिल की लड़ाई में ही पहली बार बोफोर्स तोप का उपयोग हुआ था। इस युद्ध में भारत की जीत में आर्टिलेरी का महत्वपूर्ण योगदान था तथा पहले तोपखाने का मतलब सिर्फ लंबी दूरी तक हमला करनेवाली तोपें होती थीं लेकिन अब आर्टिलेरी रेजीमेंट में आधुनिक ब्रह्मोस मिसाइल, मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर्स, रडार और ड्रोन्स भी शामिल हुई हैं और यह सब मिलकर एक टीम की तरह दुश्मनों पर हमला करते हैं। जिससे दुश्मनों को नामों निशान भी बचना मुश्किल है। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से लद्दाख में भारतीय सेना लगातार चीन की सेना को कड़ी चुनौती दे रही है। भारतीय सेना दुनिया की सबसे ऊंची रणभूमि यानी सियाचिन से लेकर लद्दाख तक तैनात है।
पूर्वी लद्दाख में टी-90 भीष्म टैंक और टी-72 Tanks तैनात हैं। और यह टैंक माइनस 40 डिग्री के तापमान में भी ऑपरेट कर सकते हैं। जिसका इलाका 14 हजार फीट की ऊंचाई पर है और टैंकों के लिहाज से इसे दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र कहा जाता है। वैसे कुछ लोगों को लद्दाख में भारतीय सेना के पराक्रम की खबरें देख और सुनकर बहुत अच्छा लगता होगा पर लद्दाख में मौजूद हर एक सैनिक को जो कड़ी तपस्या करनी पड़ती है, वो किसी साधारण इंसान के बस की बात तो कतई नहीं है क्योकिं सीमाओं पर कई घटनाएं ऐसी होती हैं जिनका असर वर्षों बाद तक दिखाई देता है और ऐसी ही एक घटना है वर्ष 2016 की पहली सर्जिकल स्ट्राइक। जिसका असर कई जिंदगियों पर पढ़ा था। बहरहाल,
28 और 29 सितंबर की रात, भारतीय सुरक्षाबलों ने लाइन ऑफ कंट्रोल पार करके पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में हमला किया था, इस हमले में भारतीय सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के कई कैंपों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था लेकिन भारतीय सुरक्षाबलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था पर भारत के भी पोस्ट ​सर्जिकल स्ट्राइक के कई बड़े सिद्धांत हैं जिसके अनुसार अब चीन के मिलिट्री एक्सपर्ट चीन की सेना को ही भारतीय सेना के हमले की चेतावनी दे रहे हैं व उन्हें डर है कि भारतीय सेना में इतनी क्षमता है कि वो कुछ ही समय में एलऐसी पार कर सकती है यानी नए भारत के पराक्रम से अब चीन और पाकिस्तान दोनों डरते हैं। पिछले चार वर्षों में भारत ने पाकिस्तान पर दो बार सर्जिकल स्ट्राइक की है। भारत ने वर्ष 2019 में बालाकोट पर हवाई हमला किया था और जो नए भारत का न्यू नॉर्मल कहा जा सकता है।
पहले ये माना जाता था कि पाकिस्तान और चीन के खिलाफ भारत की जवाबी कार्रवाई अलग-अलग होती है लेकिन गलवान घाटी के संघर्ष से चीन को भी नए भारत का संदेश मिल चुका है। नया भारत, आर्थिक और डिजिटल स्ट्राइक भी करता है।
भारत ने 200 से ज्यादा चाइनीज मोबाइल एप्स को बैन करके चीन पर नए तरीके का प्रतिबंध लगाया। जिससे चीन को एक मुंह तोड़ जवाब मिला था। अब चीन के खिलाफ, भारत के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन तैयार हो गया है। अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के कई देश विस्तारवाद के खिलाफ भारत के साथ हैं। और यकीनन अगर अब युद्ध होगा तो चीन भारत से मुंह की खाएगा।
-निधि जैन

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वर्ष 2020 की यादें

अब कावासाकी से भी लड़ना है

चीन में कोरोना की वापसी