मास्क! अनिवार्य या वैकल्पिक

कोविड़-19 के संक्रमण के आकड़े बेशक़ अब धीरे-धीरे कम हो रहे हैं लेकिन इस महामारी का प्रकोप अभी कई वर्षों तक रहने का अनूमान जताया जा रहा है। इस संकट की घड़ी में जो सबसे ज्यादा उपयोग रहा वो है मास्क। जिसका साथ हमारे साथ कब तक रहेगा हमें नहीं पता। हालांकि कई देशों में तो टीकाकरण होने के बाद मास्क से छुट मिल गई है लेकिन भारत में स्थिति बहुत अलग है। दूसरी लहर अभी भी उग्र है। आबादी के केवल एक छोटे से हिस्से को टीका लगाया गया है। लोगों की संवेदनशीलता पर टीकों के प्रभाव पर कम अध्ययन हुए हैं व भारत में इस्तेमाल होने वाले टीके भी अलग हैं।

इसके अलावा, वायरस के कई प्रकार आबादी में घूम रहे हैं। इन म्यूटेंट के खिलाफ मौजूदा टीकों की प्रभावशीलता पर डेटा अभी भी एकत्र किया जा रहा है। साथ ही, नए वेरिएंट भी सामने आ रहे हैं। हालांकि मास्क छोड़ने को लोगों के लिए टीकाकरण के लिए एक प्रोत्साहन के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसका उल्टा प्रभाव भी हो सकता है। यह संदेश दे सकता है कि सब ठीक है। यह वैक्सीन के लिए हिचकिचाहट पैदा कर सकता है एंव भारत के मामले में, मास्क छोड़ने के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। गौरतलब है कि बड़ा सवाल यह है कि क्या हम भविष्यवाणी कर सकते हैं कि भविष्य के म्यूटेंट के खिलाफ टीके कितने प्रभावी होंगे? इसलिए, भारत में मास्क न पहनना उचित नहीं है।
निधि जैन, लोनी (गाजियाबाद)

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