कितना कुछ बदला
इसमें कोई दोहराया नहीं है कि कोरोना संकट का सबसे बुरा असर रोजगार पर पड़ा। उद्योग धंधे बंद हुए तो लाखों की संख्या में लोग बेरोजगार हो गए। हालांकि, अब धीरे-धीरे कुछ सुधार हुआ है। पिछले साल मार्च में बेरोजगारी दर 8.8 फीसद थी, जो अब 6.9 फीसद पर आ गई है। महामारी के चलते ट्रेनों का पहिया रुका तो रेलवे को यात्री किराये के रूप में करीब 38,017 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा, जो कुल राजस्व का 71 फीसद से अधिक है। इंडियन एयरलाइंस समेत सभी विमान कंपनियों को भी भारी नुकसान हुआ। बहरहाल, अब घरेलू विमान सेवा में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। बाजार बंद हुए, कोरोना की दहशत बढ़ी तो लोग ऑनलाइन मार्केटिंग पर निर्भर हो गए। ऑनलाइन खरीदारी करने वालों में 64 फीसद तक की वृद्धि दर्ज की गई। लॉकडाउन में स्कूल बंद हुए तो ऑनलाइन शिक्षा का चलन शुरू हो गया। स्कूली कक्षाएं हो या फिर डिग्री कालेजों और प्रतियोगी परीक्षाएं सभी ऑनलाइन ही आयोजित की गईं। जो अभी भी ऑनलाइन ही चल रही हैं। वहीं कोरोना महामारी से जंग में दुनिया में भारत की साख एक मददगार देश के रूप में और मजबूत हुई है। भारत पूरे विश्व को कोरोना रोधी टीका दे रहा है। भारत ने वैक्सीन मैत्री शुरू की। इसके तहत भारत पड़ोसी देशों के साथ ही गरीब देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध करा रहा है। जो हर देश के लिए मुमकिन नहीं है।