यह कहां का न्याय हैं?

जिस्म की प्यास बुझाने में लोग जात पात नहीं देखते हैं, और बात शादी की हो तो कुंडली मिलाते हैं यह कहां का न्याय हैं? चंद लम्हों की भूख मिटाने के लिए वो कुछ खुदगर्ज़ लोग लड़कियों के जीवन से बिन सोचे-समझे खिलवाड़ कर देते हैं न जाने क्या मिलता है उन लोगों को।
इस संसार की हर एक बेटी प्‍यारी है चाहे वह हमारी हो या तुम्‍हारी हो, वहीं इज्‍जत लूटने वाले को मौत की
सजा देनी होगी चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम हो। बहरहाल लोग रेप करके रेप को छुपाने के लिए हर मुमकिन प्रयास करते हैं और अगर पीड़िता केस फाइल कर दे तो केस वापस लेने का दबाव बनाया जाता है जिस के डर से पीड़िता जहर खाने, खुदकुशी करने को मजबूर हो जाती है। कुछ मिंटो के मजे के लिए वह दुष्कर्मी तन ही नहीं रूह भी तार तार कर देते हैं।
गौरतलब है कि बेटियों के हाथो की सुंदरता बढाने के लिए चूड़ियाँ नहीं बल्कि कलम दनी चाहिए ताकि वो अपना हाथ नही बल्कि अपना भविष्य सवार सके, साथ में हथियार भी दें जिससे कि मौका आने पर राक्षसों को ठोक सकें। पीरियड्स में मंदिर जाने पर धर्म भ्रष्ट हो जाता है लेकिन उसी मंदिर में बलात्कार होने पर घटना को दबाया जाता है। उल्लेखनीय है कि अंत में यही कहा जाता है ग़लती उस महिला की थी, कि वह महिला थी? अगर नहीं होती, तो ऐसा नहीं होता।
आखिरकार यह कहा का न्याय है? 2017 एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार देश में हर 15 मिनट में एक बलात्कार होता है। इन आकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि न नम्बर कम हो रहे है, न ही भयावकता। यूपी के गोंडा में मिशन शक्ति की हवा निकाल रहे खुद खाकी वाले, पुलिसवाले ने ही किया महिला सिपाही से रेप। महिला सिपाही तक का रेप रोक नहीं पा रहे और चले है लव जिहाद पर कानून बनाने? अतः जब तक रेपिस्टों के मन में डर नही होगा तब तक रेप जैसी घटनाये होती रहेंगी।
-निधि जैन

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