कभी नहीं जाएगा वायरस का प्रकोप?
दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण के एक बार फिर बढ़ते मामलें सामने आ रहें है। वायरस के नए प्रकारों ने सबकी चिंता बढ़ा दी है। हालांकि स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए कई देशों ने एक बार फिर लॉकडाउन का रास्ता अख्तियार किया है लेकिन जब तक लोग स्वयं सावधानी नहीं बरतेगे तब तक सरकार के तमाम कदम विफल ही रहेगें। वहीं वैज्ञानिकों का मानना है कि, वायरस का जीवित प्राणियों के संपर्क में आने से वह हमारे अस्तित्व में हमेशा रहेगा और इस वायरस से बचने का भस एक ही रास्ता है कि जितना हमारा शरीर इस वायरस के खिलाफ मजबूत होगा, उतना ही कमजोर होगा ये वायरस। बहरहाल पूरी दुनिया में तबाही मचाने वाले कोरोना वायरस को लेकर एक के बाद एक बड़ी खबर सामने आ रही है। इस वायरस पर बारीकी से काम करने वाले वैज्ञानिकों ने पाया है कि, कोरोना वायरस अब इस दुनिया से कभी नहीं जाने वाला है व यह वायरस जीवित प्राणियों के संपर्क में आने से हमेशा अपनी मौजूदगी दर्ज कराता रहेगा एंव वायरस की कमजोरी उसके अस्तित्व को खत्म नहीं करने वाली हैं बल्कि दुनिया के अन्य वायरसों की तरह अब इसका अस्तित्व भी हमेशा बना रहने वाला है। वैज्ञानिकों का मानना है कि वायरस जब तक जीवित प्राणियों के संपर्क में रहेगा, वह अपना अस्तित्व नहीं छोड़ेगा क्योंकि वायरस को बढ़ाने में जीवित प्राणियों की कोशिकाएं महत्वपूर्ण भूमिकाएं अदा करती हैं और इन्हीं तत्वों के आधार पर कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस के अब समाप्त होने की संभावनाएं ही नहीं हैं। आलम तो ये है कि ड़ाक्टरो का मानना है कि तकरीबन 90 साल पहले का इंफ्यूएंजा आज भी है। लगभग 90 साल पहले इन्फ्लूएंजा वायरस की पहचान हुई थी और तब से लेकर आज तक यह वायरस बार-बार अपने स्वरूप को बदलता रहा और इंसानों से लेकर जानवरों की कोशिकाओं के माध्यम से अपने अस्तित्त्व को बचा कर इंसानी जिंदगियों को क्षति पहुंचाता रहा। हैं लेकिन जब इस बीमारी से बचाव की खोज हुई तो इसका असर कम हुआ, परन्तु चिंता की बात तच यह है कि वायरस का अस्तित्व आज तक कायम है। ठीक इसी तरीके से एक दशक पहले स्वाइन फ्लू ने लोगों की जिंदगियों की रफ्तार रोकनी शुरू कर दी थी। स्वाइन फ्लू के इलाज पर जैसे-जैसे काम होता गया उसी तरीके से वायरस का म्यूटेशन भी होता गया लेकिन जितनी दहशत स्वाइन फ्लू को लेकर 2008-09 में थी, उतनी दहशत अब नहीं है परन्तु ऐसा भी नहीं है कि स्वाइन फ्लू लोगों को नहीं हो रहा है और यह बात अलग है कि स्वाइन फ्लू का वायरस अपना स्वरूप लगातार बदलता जा रहा है और अब इसी तरीके से आने वाले वक्त में कोविड-19 का भी कुछ ऐसा ही हश्र होने वाला है। जो अपना स्वरूप बदलता रहेगा लेकिन इसका प्रकोप कभी खत्म नहीं होगा लेकिन जानलेवा वायरस की मौजूदगी के बाद भी इससे डरने की जरूरत नहीं होगी क्योंकि, जितना ज्यादा हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम इस वायरस के खिलाफ मजबूत होता जाएगा, उतना ही यह वायरस कमजोर पड़ता जाएगा। वहीं जिन लोगों के शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत नहीं होगा, उन पर वायरस का हमला जानलेवा ही होगा। इसलिए डरने से बेहतर है कि हमें अपने शरीर में इस वायरस के खिलाफ मजबूती लानी होगी। हालांकि
कोरोना वायरस अगले कई वर्षों तक वैज्ञानिकों के लिए बहुत बड़ी चुनौती बना रहेगा क्योंकि जिस तरीके से कोरोना वायरस का म्यूटेशन हो रहा है, वह वैज्ञानिकों के लिए बार-बार बड़ी चुनौती बनता रहेगा। कोरोना वायरस के म्यूट होने से वैज्ञानिकों को ज्यादा शोध करने के साथ-साथ ज्यादा अलर्ट रहने की भी जरूरत पड़ेगी। वहीं वायरस के म्यूटेशन से वैक्सीन की प्रभावकारिता भी कम हो सकती है। इसलिए वैज्ञानिकों को न सिर्फ वायरस के म्यूटेशन पर पूरी नजर रखनी होगी, बल्कि बदले हुए वायरस के मुताबिक वैक्सीन को भी देखना होगा ताकि वायरस के बदले स्वरूप और उसके असर को वैक्सीन से रोका जा सके। हमें अब अपनी जिंदगी में मास्क और सामाजिक दूरी को हिस्सा बनाना ही पड़ेगा क्योंकि वायरस की मौजूदगी हमारे आसपास हर वक्त बनी रहेगी। इसलिए हम जितना ज्यादा कोरोना वायरस के लिए बनाई गई गाइडलाइंस का पालन करते रहेंगे, उतना ही हम इससे बचे रहेंगे। इसके साथ-साथ हमें टीका भी लगवाना होगा।