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जून, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अंग्रेजी नाम इंडिया से भारत की मांग

इंडिया अनेकता में एकता का देश माना जाता है। जो अपनी अलग संस्कृति और परंपरा के लिए भी जाना जाता है। यहां की मातृभाषा भले ही हिंदी है परंतु बिना किसी बंधन के अलग-अलग धर्मों के लोगों के द्वारा यहाँ कई भाषाएँ बोली जाती हैं। जिनका यहां पूरा सम्मान किया जाता है। ऐसे ही भारत को भी अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है- भारत, इंडिया, हिंदुस्तान, आर्यवर्त व जंबूद्वीप। जिसमें से सबसे पुराना नाम आर्यवर्त है। परंतु दिल्ली के एक निवासी नमह नामक याचिकाकर्ता ने देश का अंग्रेजी नाम इंडिया को बदलकर भारत करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है। जिसको सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध भी कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दो जून को सुनवाई करेगा। याचिका में दावा किया गया है कि 'भारत' या 'हिंदुस्तान' शब्द हमारी राष्ट्रीयता के प्रति गौरव का भाव पैदा करते हैं। याचिका में सरकार को संविधान के अनुच्छेद 1 में संशोधन के लिए उचित कदम उठाते हुए 'इंडिया' शब्द को हटाकर, देश को 'भारत' या 'हिंदुस्तान' कहने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। यह अनुच्छेद इस गणराज्य के...

चीन का दावा साल के अंत तक कोरोना की वैक्सीन

संपूर्ण विश्व कोविड़-19 के प्रकोप को झेल रहा है। व अपने अपने तरीके से कोरोना संकट से उभरने के प्रयास भी कर रहे है। दुनियाभर के कई देश कोरोना की वैक्सीन भी तैयार कर रहे है। इसी बीच चीन की राज्य परिषद ने घोषणा की है, कि इस साल के अंत तक कोविड-19 की वैक्सीन बाजारों में आ सकती है। इस वैक्सीन को वुहान जैविक उत्पाद अनुसंधान संस्थान और बीजिंग जैविक उत्पाद अनुसंधान संस्थान साथ मिल कर बना रहे हैं। और दोनों ही संस्थाएं सरकार के स्वामित्व वाले फार्मास्युटिकल ग्रुप साइनोफार्मा से जुड़ी वी हैं। क्लीनिकल परीक्षण को तीन चरणों में बांटा गया है। तीन चरण के पूरा होने के बाद यह वैक्सीन बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध हो जाएगी। चीन ने परीक्षण के पहले दो चरणों में 2000 से अधिक लोगों पर इस वैक्सीन को टेस्ट भी कर लिया है। क्लीनिकल और मानव परीक्षण के दो चरण पूरा होने के बाद अब चीन तीसरे चरण की तैयारी में जुट गया है। चीन का दावा है, इस साल के अंत या फिर अगले साल की शुरुआत तक इस वैक्सीन की बिक्री शुरू हो जाएगी। गौरतलब यह है, अब तक दुनियाभर के 100 से ज्यादा देश कोरोना की वैक्सीन बनाने के प्...

खुलेआम दुकानों पर परोसा कोरोना

कहते हैं ना कि अगर जिंदगी में बुलंद हो हौसले तो इंसान हर मुकाम हासिल कर सकता है। मुश्किलें व मुसीबतें कितनी भी हो अगर हौसला मजबूत है तो उसके सामने सब फीका है। इसी काव्या को सच करते हैं। मेक्सिको के रहने वाले एक रेस्टोरेंट के मालिक रेने साउसेडो। जिन्होंने 3 साल पहले अपना एक रेस्टोरेंट खोला था। जो कि काफी अच्छा चल रहा था। परंतु कोरोना महामारी के बाद से उनका व्यापार ठप पड़ गया था। उन्हें बिजनेस में काफी नुकसान हो रहा था व उन्हें अपने स्टाफ को भी निकालना पड़ा था। लंबे समय से हो रहे बिजनेस में नुकसान के कारण रेने काफी परेशान रहते थे। जिसके बाद उन्होंने इंटरनेट पर बिजनेस बढ़ाने के तरीके खोजने शुरू कर दिए। इसी बीच उन्हें कोरोना वायरस की तरह दिखने वाला बर्गर बनाने का आईडिया आया। उन्होंने इस पर काम शुरू कर दिया और बीफ, बेकन, मोजेरेला, चीज़, रेड ओनियन, पालक, टमाटर और कई तरह के सॉस से इसे तैयार किया। व इस बर्गर की कीमत 4 डॉलर (करीब 302 रुपए) रखी है। यह बर्गर जब रेस्तरां में बिक्री के लिए रखा गया तो ग्राहकों ने इसे काफी पसंद किया। जिससे रेस्टोरेंट की कमाई अच्छी-खासी होने लगी। उसके बाद से रेने ने ...

90 वर्षीय गेमिंग यूट्यूबर ग्रैंडमा

कहां जाता है कि कुछ सीखने की कोई उम्र नहीं होती, अगर आप दिल से कुछ हासिल करना चाहते हैं तो, आप किसी भी उम्र में क्यों ना हो उसे हासिल कर सकते हैं। उम्र का कोई भी मोड़ क्यों ना हो। बस धड़कनों में नशा जिंदगी का होना चाहिए कुछ हासिल करने के लिए। उम्र का तो हर एक दौर मजेदार होता है, बस उम्र का मजा लेना आना चाहिए। शायद इसीलिए अंग्रेजी में एक कहावत भी है, कि एज इस जस्ट अ नंबर। कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। इसी बात को साबित करती हैं 90 वर्षीय जापान की गेमिंग ग्रैंडमा। जिन्होंने सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर रखा है। ग्रैंडमां का असली नाम हमोका मोरी हैं। परंतु लोग प्यार से इन्हें गेमिंग ग्रैंडमा के नाम से बुलाते हैं। जो कि सोशल मीडिया पर काफी प्रसिद्ध है। हाल ही में इन्हें गिनीज वर्ल्ड ऑफ रिकॉर्ड्स ने दुनिया की सबसे बुजुर्ग गेमिंग यूट्यूबर के खिताब से भी नवाजा है। दादी ने बताया कि उन्हें गेम खेलना बहुत पसंद है। व उन्होंने 39 साल की उम्र से ही गेम खेलना शुरू कर दिया था। और साल 2015 में उन्होंने अपना एक यूट्यूब चैनल भी बनाया। जिसमें वह हर महीने चार से पांच वीडियो अपलोड करती है। वीडियो में वह कॉल ऑ...

किसी भी देश पर निर्भर नहीं रहेगा डब्ल्यूएचओ

इस वक्त पूरा विश्व कोरोना महामारी के प्रकोप को झेल रहा है। कोविड़-19 को लेकर कई तरह के आरोपों का सामना कर रहा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हालही में एक नए फाउंडेशन की घोषणा की है। मौजूदा वक्त में विश्व स्वास्थ्य संगठन को हर सदस्य देश की ओर से सहायता राशि दी जा रही है। उसी के आधार पर डब्ल्यूएचओ दुनियाभर में आने वाले मुश्किलों को लेकर मदद करता है। परन्तु बीते दिनों अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ पर चीन के हाथों की कठपुतली होने का आरोप लगाते हुए उसकी ओर से संगठन को दी जाने वाली सहायता राशि पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद आशंका थी कि डब्ल्यूएचओ अपने खर्चो और परियोजनाओं के लिए सदस्य देशों की मदद पर निर्भर रहेगा। क्योंकि एक अमेरिका ही डब्ल्यूएचओ को उसके कुल बजट का 15 फ़ीसदी फंड देता था। यानी 400 मिलियन डॉलर। लेकिन डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. तेद्रोस गेब्रियेसस  ने इस पक्ष में उत्तर देते हुए कहा कि अमेरिका मदद रोकने जाने की घटना और फाउंडेशन की स्थापना के बीच में कोई भी संबंध नहीं है। व इस फाउंडेशन को शुरू करने का काम पिछले साल मार्च में ही शुरू हो गया था। डब्ल्यूएचओ ने बुधवार को डब्ल्यूएचओ फाउंडेशन के ना...

अब सैनिटाइजर से भी खतरा

देश और विश्व में कोविड-19 के विस्तार संक्रमित मामलों के मद्दे-नज़र डॉक्टर और विशेषज्ञ शुरुआत से ही साफ-सफाई और हाइजीन मेंटेन करने की सलाह दे रहे हैं। खासकर हाथों को साफ रखना जरूरी बताया जा रहा है, क्योंकि सबसे ज्यादा संक्रमण फैलने का खतरा हाथों के जरिए ही होता है। साबुन या हैंडवॉश से हाथ धोने के लिए पानी जरूरी है परंतु कार्यस्थल में या सफर में बार-बार वॉशरूम जाना असंभव है। ऐसे में लोग हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग अत्यधिक कर रहे हैं। जिससे सैनेटाइजर की खपत बढ़ गई है। अस्पताल, कार्यस्थल इत्यादि से लेकर हर जगह हैंड सैनिटाइजर का उपयोग हो रहा है। हैंड सैनिटाइजर ने धीरे-धीरे हर घर में अपनी जगह बना ली है। लेकिन हद से ज्यादा इसका प्रयोग भी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मेल्बर्न की रिसर्च ने खुलासा किया है, कि हैंड सैनेटाइजर जहां कोरोना महामारी को रोकने के लिए कारगर साबित हो रहा है वही साथ ही अन्य कई बीमारियों को सौगात भी दे रहा है। हैंड सैनिटाइजर्स का लंबे समय तक प्रयोग करने से ये स्किन को ड्राई और रफ बना सकता है। इतना ही नहीं इसके चलते त्वचा संबन्धी कई बीमारियां भी हो सकती है...

जासूस पाकिस्तानी कबूतर

 कोरोना महामारी के बीच भी पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। जम्मू कश्मीर के कठुआ इलाके में इंडियन पाकिस्तान बॉडर के पास पाकिस्तानी प्रशिक्षित कबूतर पाया गया है। दरअसल इस कबूतर के पैर में कोडिंग वाली रिंग मिली है व रिंग में कुछ संदिग्ध नंबर लिखे पाए गए है। और कबूतर के पंखों पर लाल रंग के निशान हैं। जिससे इस कबूतर को जासूसी कबूतर माना जा रहा है। हालांकि यह पहली बार नहीं है कि जब पाकिस्तान ने गैर कानूनी तरीके से किसी चीज के जरिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारत की जासूसी करने की कोशिश की है। इससे पहले भी पाकिस्तान गुब्बारे, ड्रोन इत्यादि का इस्तेमाल जासूसी के लिए कर चुका हैं। परंतु उसकी सारी कोशिशें अब तक बेकार रही है। विश्व के बहुत सारे देश जासूसी के लिए कबूतरों का इस्तमाल करते है। क्योंकि कबूतर ही एक मात्र ऐसा पक्षी होता है जो हर हाल में अपने मालिक के पास लौट कर आता है। कबूतर बाकी पक्षियों की तुलना में काफी समझदार और घरेलू होता है। व उसे प्रशिक्षण देना भी आसान होता है। इसलिए समाचार व पत्र के आदान -प्रदान के लिए कबूतर का प्रयोग खूब होता है। अर्थात पुलिस ने फिलहाल कबूतर को...

नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा चीन

 कोरोना महामारी को लेकर पूरे विश्व के निशाने पर आया चीन अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। चीन ने लद्दाख में अपनी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है। भारत ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पैंगोंग लेक और गालवान घाटी में भारतीय सैनिकों की संख्या में बढ़ोतरी की है। इन दोनों इलाकों में चीन ने भी दो हजार से ढाई हजार सैनिक तैनात किए हैं, साथ ही अस्थाई सुविधाएं भी बढ़ा रहा है। जिससे दोनों देशों के इलाकों में तनातनी का माहौल उत्पन्न हो रहा है। हालात को देखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को हाईलेवल मीटिंग की। जिसमें सीडीएस जनरल रावत के साथ तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल हुए। अगर इस बार दोनों सेनाएं आमने-सामने हुईं तो 2017 के डोकलाम विवाद के बाद ये सबसे बड़ी जंग होगी। गौरतलब यह है कि, चीनी वायरस के कहर का एक ऐसा मंजर विश्व को देखने को मिला है कि पूरे संसार को लॉकडाउन की स्थिति में आना पड़ा। अब अगर लद्दाख में सैनिकों के बीच जंग हो गई तो भारत की स्थिति ओर खराब हो सकती है। -निधि जैन

संसार में असंभव कुछ भी नहीं है

 विश्व में असंभव कुछ भी नहीं है। किसी ने सोचा भी नहीं होगा, कि ऐसे भी दिन देखने को मिलेंगे, जब लोग घरों में रहने के लिए मजबूर हो जाएंगे। आसमान की ऊंचाइयों को नापने का सपना ऐसा टूटेगा कि लोग अपनों से भी नहीं मिल पाएंगे। घर लौटने की राह देखते-देखते घरों में ही बंद हो जाएंगे। घर से बाहर निकलना यानी मौत को आमंत्रण देना हो जाएगा। वातावरण शुद्ध हो जाएगा, लेकिन चैन की सांस नहीं ले पाएंगे। इस वक्त जब विश्व अपनी पूरी ताकत झोंक कर कोरोना महामारी को हराने में लगा है। तभी कोविड-19 के कारण अर्थव्यवस्था को भारी चोट पहुंच रही है। लोगों के कारोबार चौपट हो गए हैं। लोगों की नौकरी भी उनसे छिन रही है। बेरोजगारी का आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। यह वायरस ना सिर्फ भारत में बल्कि पूरे विश्व में तांडव मचा रहा है। कोरोना संकट ने मानवता के समक्ष रोजी-रोटी की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जिससे हर कोई निपटने में लड़खड़ाता दिख रहा है। लॉकडाउन के बीच जिसे सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है वो है, प्रवासी मजदूर, किसान व गरीब लोग। वह पैदल ही घर जाने को मजबूर है। अर्थात सरकार अपनी तरफ से पूरे प्रयास कर ही रही ...

त्यौहार पर विरान हुई सड़के

संसार में किसी ने सोचा भी नहीं होगा, कि ऐसे भी दिन देखने को मिलेंगे, जब लोग घरों में रहने के लिए मजबूर हो जाएंगे। आसमान की ऊंचाइयों को नापने का सपना ऐसा टूटेगा कि लोग अपनों से भी नहीं मिल पाएंगे। घर लौटने की राह देखते-देखते घर में ही बंद हो जाएंगे। घर से बाहर निकलना यानी मौत को आमंत्रण देना हो जाएगा। पर्यावरण शुद्ध हो जाएगा, लेकिन चैन की सांस नहीं ले पाएंगे। ईद जैसा त्योहार, जिसकी रौनक हर देश के बाजारों, गली-मोहल्ले में देखने को मिलती है, वहां सन्नाटा छाया रहेगा। इस साल रमजान के महीने में कई देशों की मस्जिद बंद रही और जिन्होंने ऐसा नहीं किया, वहां कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े। ईद उल फितर के नमाज को पढ़ने के लिए जहां मस्जिदों में हर साल अल्लाह के दर पर नमाजियों की भीड़ लगी रहती थी, इस साल वहां सन्नाटा छाया रहा। वायरस के कहर का एक ऐसा मंजर देखने को मिला है, कि पूरे रमजान के पाक महीने में लोगों को मस्जिद ना आने देने के लिए मजबूर कर दिया। चीन के एक वायरस ने विश्व में पहली बार रमजान के पाक महीने में अल्लाह का दर खाली करवा दिया। कोरोना वायरस रेस्ट्रिक्शन के कारण सऊदी अरब के मक्का में ...

ना कोई भूकंप, ना कोई मिसाइल अटैक फिर क्यों फटी धरती

 विश्व कोरोना से जंग लड़ रहा है। हर तरफ हाहाकार मचा है। लोग एक के बाद एक मौत के मुंह में समा रहे हैं। इस बीच कई घटनाएं सामने आई, जिनके आधार पर कई लोगों ने साल 2020 को दुनिया खत्म होने वाला साल करार दिया। अभी रोम कोरोना वायरस से लड़ ही रहा है, कि यहां अचानक तेज आवाज के साथ 10 फीट लंबा और 8 फीट गहरा गड्ढा हो गया। ना तो यहां कोई भूकंप आया ना ही कोई मिसाइल अटैक। अचानक बीच सड़क में यह गड्ढा बन गया। जब कुछ लोग इस गड्ढे के अंदर गए, तो हैरान रह गए। अंदर दो हजार साल पुराना इतिहास वैसे ही सुरक्षित रखा मिला। इस 8 फीट गहरे सिंकहोल में 27 बीसी के कई स्टोन मिले हैं। लॉकडाउन के कारण कोई बड़ा हादसा तो नहीं हुआ। पर अचानक ही धरती फट गई और वहां पार्क हुई गाड़ियां नीचे गिर गई। जिससे वहां हड़कंप मच गया। कई विशेषज्ञों ने गड्ढे के अंदर जाकर वहां का जायजा लिया। जिसमें 2,000 साल पुरानी चीजें मिलने से सनसनी मच गई। अंदर पत्थरों के 7 स्लैब्स मिले हैं। यह सभी 2,000 साल पुराने हैं। इस एरिया को रोम का सबसे सेंसेटिव एरिया माना जाता है। साथ ही यहा कई हिस्टोरिकल साइट्स भी है। सोशल मीडिया पर इस खबर के बाद सनसनी फैल ग...

भाग्यनगर की कहानी

ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम यानी जीएचएमसी के चुनावी नतीजों  के बाद इन चुनावों की चर्चा पूरे देश में हो रही है। यह देश के एक आम से शहर में हुआ, आम सा नगर निगम चुनाव है जिसमें आम तौर पर नगर निगम चुनाव सड़क, सीवर, नाली और पानी जैसे मुद्दों तक सीमित रहते हैं लेकिन इसके दूरगामी प्रभाव भारत की राजनीति पर पड़ सकते हैं इसलिए ही नगर निगम चुनाव के प्रचार में निज़ाम कल्चर, राष्ट्रवाद, रोहिंग्या मुसलमान, जिन्ना, सर्जिकल स्ट्राइक, परिवारवाद और हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर किए जाने की बातें हुईं। चुनाव प्रचार के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर किए जाने की बात कही थी। प्रचार के दौरान बीजेपी ने निज़ाम संस्कृति ख़त्म कर हैदराबाद को मिनी इंडिया बनाने की भी बात कही थी। चुनाव के प्रचार के दौरान जो मुद्दे और शब्द सामने आए थे उनमें सबसे ज्यादा चारमीनार और भाग्य लक्ष्मी मंदिर की बात कही गई थी। जो मंदिर कि हैदराबाद की मशहूर चारमीनार के पास है। गृह मंत्री अमित शाह जब चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे तो, तब सबसे पहले वो भाग्य लक्ष्मी मंदिर गए थे एंव ऐसी मान...

पारंपरिक दवाओं के शोध का वैश्विक केंद्र

प्रतिदिन चीन अपनी नामाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वह कुछ ना कुछ ऐसा जरूर कर देता है कि फिर उसे भारत से मुंह की खानी ही पढ़ती हैं और अब हालही में भारत ने पारंपरिक दवाओं के शोध के वैश्विक केंद्र खोलने की विश्व स्वास्थ्य संगठन की घोषणा की है, जो कि चीन पर भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा सकता है। पारंपरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में भारत का निर्यात चीन के निर्यात का लगभग पांच फीसद है जो अवश्य ही जाहिर करता है कि वैश्विक शोध केंद्र खुलने के बाद आयुर्वेदिक दवाओं को आधुनिक चिकित्सा पद्धति रूप में न सिर्फ वैश्विक मान्यता मिलेगी, बल्कि दुनिया के वैश्विक बाजार में धाक भी जमेगी। जिससे चीन भयावह हो चुका हैं। पारंपरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में चीन की पकड़ को देखते हुए डब्ल्यूएचओ का भारत में शोध केंद्र खोलने का ऐलान सामान्य घटना तो बिल्कुल भी नहीं है जिसकि दूरगामी असर होगा। पारंपरिक दवाओं के वैश्विक बाजार में चीन के दबदबे को इस बात से समझा जा सकता है, कि उसकी तुलना में भारतीय पारंपरिक दवाओं का निर्यात महज पांच फीसद के आसपास है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से वैश्विक शोध केंद्र के लिए चीन...

पालघर के साधुओं को इंसाफ कब?

 आज 200 दिन से भी अधिक हो चुके है लेकिन अभी तक महाराष्ट्र के पालघर में 16 अप्रैल को हुई दो साधुओं और एक ड्राइवर की हत्या के गुनहगारों को सजा नहीं मिली है. पालघर जिले के कासा इलाके में उस रात चोरी के शक में 70 साल के कल्पवृक्ष गिरी, 35 वर्ष के सुशील गिरी व 30 साल के उनके ड्राइवर नीलेश तेलगाडे, जो कि ओमानी वैन से सूरत जा रहे थे, तो तब उन्हें पालघर से 100 किलोमीटर दूर स्थित गढ़चिंचले गांव में भीड़ ने उनकी गाड़ी से बाहर खींच लिया और इसके बाद, उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। गौरतलब है कि पालघर जैसी घटना महाराष्ट्र के औरंगाबाद में भी हुई है। जहां प्रियशरण महाराज के आश्रम में घुसकर 7 से 8 अज्ञात लोगों ने उन पर हमला किया था। जिसका अभी तक इंसाफ नहीं हुआ है. रोजाना ऐसे कई अपराध होते हैं जिनमें मासूम लोगों की हत्या हो जाती है। वो लोग इन्साफ के लिए हर संभव प्रयास करते है, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद भी उन्हें न्याय नहीं मिलता हैं। हालांकि वारदात के कुछ दिन बाद ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के कार्यालय की ओर से जारी बयान में यह बताया गया था कि पुलिस ने साधुओं की हत्या के सभी आरोपियों को गिरफ्तार...

जंग जारी कोरोना से

 कोविड-19 ने दुनिया की तस्वीर बदल के रख दी है। मौत का आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा हैं। दुनिया भर के लोग इस महामारी से त्रस्त हो रहे हैं। वायरस के चलते देशभर में कई बार लॉकड़ाउन को बढ़ाया जा चुका है। हालांकि अभी भी कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या मे लगातार इजाफा हो रहा हैं। ऐसे में इस संक्रमण को रोकने के लिए सरकार तमाम एहतियातन कदम उठा रही है, लेकिन बढ़ती जनसंख्या से काफी दिक्कतें सामने आ रही है, क्योंकि देश में संसाधन सीमित है और आबादी बेहद तेजी से बढ़ रही हैं व हमारा देश विकसित देशो की तुलना में ओर पिछड़ता जा रहा हैं। लॉकडाउन में ठप्प पड़ी अर्थव्यवस्था की वजह से करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए है एंव रोजगार उनसे छिन गया हैं। बहरहाल इन सब पर रोक तभी लगेगी जब लोग सावधानी बरतेगें और सख़्त नियमों का पालन करेंगे तथा जब कोरोना की काट मिल जाएगी यानी कोविड़-19 की वैक्सीन उत्पन्न हो जाएगी। देश के वैज्ञानिक और डॉक्टर लगातार तपस्या कर रहे हैं कि कोरोना की वैक्सीन बन जाए, व कोरोना की तीन वैक्सीन्स का ट्रायल देश में चल भी रहा है। खुशखबरी तो यह है कि कोरोना वायरस के खिलाफ मेड इन इंडिया वैक...

सब कर रहें अनदेखी

 देश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लोग इस महामारी से त्रस्त हो चुके है और हालात गंभीर होती नजर आ रही हैं लेकिन इस बीच भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की स्थायी संसदीय समिति ने कोरोना महामारी के प्रकोप और इसके प्रबंधन पर राज्य सभा को एक रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें प्राइवेट अस्पतालों के रवैये पर कई सवाल उठाए गए हैं कि जिस समय देश में कोरोना के मामले तेज़ी से बढ़ रहे थे, तो तब प्राइवेट अस्पतालों में मरीज़ों से इलाज के नाम पर बढ़ा चढ़ा कर पैसे लिए जा रहे थे व इस बात पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि सरकारी अस्पतालों में बेड की कमी का फ़ायदा प्राइवेट अस्पतालों को मिला और इससे लोगों पर इलाज का आर्थिक बोझ काफ़ी बढ़ गया हैं एंव समिति ने अपने आकलन में इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सरकार ने इलाज के रेट को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश जारी नहीं किए, जिससे प्राइवेट अस्पतालों को खुली छूट मिल गई हैं और अगर सरकार ने इलाज के रेट तय किए होते तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी लेकिन समिति ने आबादी के लिहाज से देश के स्वास्थ्य बजट को भी काफ़ी कम बताया है तथा स्वास्थ्य मंत्रालय की स्थायी संसदीय ...

रौशनी फैलाने के नाम पर भ्रष्टाचार का जाल!

 देश में घोटाले होने कोई नई बात नहीं है लेकिन कई ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दा होते है जिन्हें उतना नहीं उठाया जाता जितना की उसके गुनहगारों को दंड़ मिलना चाहिए।बहरहाल जम्मू-कश्मीर के इतिहास में भी सबसे बड़ा ऐसा ही घोटाला है, जो है रोशनी ज़मीन घोटाला। इस समय हर कोई जम्मू-कश्मीर में रोशनी जमीन घोटाले में शामिल हुए लोगों की लिस्ट की ही चर्चा कर रहा हैं। क्योंकि जैसे जैसे कार्रवाई आगे बढ़ रही है वैसे ही कई नेताओं, उनके रिश्तेदारों, अधिकारियों और बड़े व्यापारियों के नाम इस घोटाले में शामिल होने के सबूत मिल रहे है। गौरतलब है कि इस सोचे समक्षे घोटाले से सरकार को कई करोड़ो का नुक्सान हुआ है, जिन पैसों से हर घर में बिजली पहुंचने वाली थी, हर घर में उजाला होने वाला था आज उन्ही पैसों का कई लोग गलत उपयोग कर रहे हैं। वर्ष 2001 में फारूक अब्दुल्ला जब जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने विधानसभा में रोशनी एक्ट पास किया गया था जिसका मकसद यह था कि जिनके पास निश्चित समय के लिए सरकारी जमीन लीज पर है या कोई चालीस वर्ष से सरकारी जमीन पर रह रहा है तो यह जमीन हमेशा के लिए उन्हें दे दी जाए, मतलब उन्हें ज...

वैक्सीन के बाद क्या मिलेगी राहत?

 कहने को तो देश में अनगिनत बीमारियां हैं, जिन से रोजाना हजारों लोग प्रभावित होते हैं परंतु किसी का समाधान निकलता है तो किसी का नहीं, किसी बीमारी का प्रकोप पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लेता है तो वहीं कई बीमारियां ऐसी भी हैं जिनके बारे में कोई जानता ही नहीं है। बहरहाल दुनिया में इस समय 112 से ज्यादा ऐसी संक्रामक बीमारियां मौजूद हैं जो वायरस, बैक्टीरिया या पैरासाइट के कारण फैलती है जिनसे हर साल करीब 1 करोड़ 70 लाख लोगों की मौत होती है लेकिन पिछले 200 वर्षों में इनमें से सिर्फ एक ही बीमारी है जिसको जड़ से मिटाया जा सका है और वो है स्मॉल पॉक्स। यह सफलता वर्ष 1980 में मिली थी परन्तु इसके अलावा इंसानों को होने वाली ऐसी कोई संक्रामक बीमारी नहीं है जिसे जड़ से खत्म किया गया हो। हालांकि दुनिया भर के वैज्ञानिक तमाम कोशिशे कर रहे हैं कि कोरोना वायरस को भी जड़ से समाप्त कर दिया जाए लेकिन यह कैसे और कब होगा इस बारे में अब भी पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है क्योंकि, आम तौर पर एक वैक्सीन को तैयार करने में 5 से 10 वर्ष लग जाते हैं और अगर वैश्विक महामारी कोरोना की वैक्सीन बन जाती है तो वह...

बॉर्डर पर अब भी क्यों बैठे हैं?

 कहते हो हमें देश से प्यार है लेकिन वो देखो खेतो में गेहूं, चावल उगाने वाले, सबके अन्नदाता कहलवाने वाले, उमसती घूप में काम करने वाले आज सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, पिछले छह-सात दिनों से, शीतकालीन में खुले आसमान के नीचे हजारों सख़्या में किसान अपनी मांगों को पूरा करने के लिए यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं जिससे आम लोगों को काफी परेशानी हो रही हैं। सरकार की ओर से लाए गए किसानों के लिए तीनों कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा हैं, कृषक कानून के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, सरकार के असहयोगी विरोध कर रहे है लेकिन मोदी सरकार अपने फैसले पर अटल हैं। सरकार के बनाए गए कानून एक देश एक बाजार से किसान खुश नहीं है। सरकार का कहना है कि अब किसान अपनी उगाइ हुई फसल को कई भी किसी भी राज्य में अपने तय मानक के हिसाब से बेच सकते है, जिसके बाद यह जरूरी नहीं है कि सरकार द्वारा बनाईं गई एपीएमसी में ही किसान अपनी फसल बेचेगा व उपज होने से पहले ही कृषक अपनी फसल का सौदा कर सकते हैं, जिनसे उन्हें ड़र नहीं होगा, चिंता नहीं होगी कि उनकी पैदावार कौन खरीदेगा। तीसरे कानून में यह सशोधन किया गया है कि अब जो जरू...

पत्रकारिता के नाम पर टीआरपी की दुकान

हकीकत में क्या भारत के लोग भी फरमाइशी खबरों का ही चित्रहार टीवी पर देखना चाहते हैं ? क्या भारत के लोग अब न्यूज़ चैनलों पर न्यूज़ की बजाय नौटंकी देखकर अपना मनोरंजन करना चाहते हैं ? क्योंकि कुछ न्यूज़ चैनलों पर इस समय तो यहीं ही दिखाया जा रहा है। जिस पर पूरे देश में बहस हो रही है। अब सुशांत सिंह राजपूत केस और हाथरस हत्याकांड दो ऐसी बड़ी खबरें हैं जिनमें टीआरपी के नाम पर सत्य में फेक न्यूज की मिलावट होने लगी है, पत्रकारिता के नाम पर आम लोगों का मनोरंजन करने की होड़ मच गई व न्याय और सत्य इस फरमाइशी रंगमंच के पर्दे के पीछे चले गए एवं देश के लोग चुपचाप यह होते हुए देखते रहे हैं। बहरहाल कहते हैं ना कलम यानी पत्रकारिता की ताकत, तलवार की ताकत से भी कई गुना ज्यादा होती है लेकिन आज के दौर की समस्या तो यही है कि कलम से सत्य लिखने वालों की संख्या बहुत ही कम हो चुकी है, जबकि हाथ में माइक और कैमरा लेकर न्यूज़ की नाट्यशाला में करतब दिखाने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है तो ऐसे में जब खबरों का अस्तित्व सिर्फ टीआरपी और फेक न्यूज के इर्द गिर्द ही सिमटकर रह जाता है तो अवश्य ही लोकतंत्र की नींव कम...

कोविड-19 के सीरो सर्वे का जल्द ही खत्म होगा विश्लेषण

 इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आइसीएमआर ने देश में कोरोनोवायरस बीमारी की व्यापकता का निर्धारण करने के लिए सीरो सर्वेक्षण शुरू किया था। जिसके दूसरे दौर को पूरा कर लिया गया है, और अब परिणामों के अंतिम चरण का विश्लेषण किया जा रहा है। बहरहाल, परिषद के एक बयान में कहा गया है कि आइसीएमआर के नेतृत्व में देशव्यापी सीरो सर्वेक्षण का दूसरा दौर सफलतापूर्वक पूरा हो गया है।सर्वेक्षण का अंतिम चरण विश्लेषण अब चल रहा है और पहले सर्वेक्षण के परिणामों की तुलना इससे की जाएगी।गौरतलब है कि, सीरो सर्वेक्षण उन लोगों के नमूने लेकर किया जाता है जिन्होंने कोरोना के वायरस यानी Sars-Cov-2 के खिलाफ एंटी-बॉडी पैदा कर ली हैं। आईसीएमआर के सूत्रों के अनुसार, सीरो सर्वेक्षण के अंतिम परिणाम महीने के आखिर तक सार्वजनिक कर दिए जाएंगे। सीरो सर्वेक्षण का उद्देश्य यह निर्धारित करना भी है कि, मई में जब देशभर में लॉकडाउन था तो पहले सीरो सर्वेक्षण के बाद रोग की व्यापकता कैसे बदल गई है। 21 राज्यों में समान 69 जिलों में 24,000 के करीब नमूनों का परीक्षण किया गया है, जो राष्ट्रीय सीरो सर्वेक्षण के पहले दौर में...

चीन और अमेरिका ही माने क्यों नहीं

 वैश्विक महामारी कोरोना ने बेशक ही सब को परेशान कर के रखा है लेकिन अच्छी बात यह है कि इस वायरस में हमें एकजुटता का महत्व याद दिलाया है क्योकिं इस समय कोरोना महामारी के खिलाफ पूरी दुनिया एकजुट हो गई है। बहरहाल, अब विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डबल्यू़एचओ की पहल पर दुनिया के 156 देशों ने वैक्सीन बनाने के लिए हाथ मिला लिया है लेकिन आश्चर्य की बात है कि अमेरिका और चीन, दोनों ने डब्ल्यूएचओ की इस मुहिम का साथ देने से इनकार कर दिया और इस समझौते पर दस्तखत भी नहीं किए। गौरतलब है कि, डब्ल्यूएचओ की इस मुहिम में 156 देशों की लिस्ट में 64 अमीर देश शामिल हुए हैं व इसे कोवैक्स प्लान नाम दिया गया है, जिसके तहत अगले साल के आखिर तक कोरोना वैक्सीन की दो अरब डोज बननी है एंव इतनी वैक्सीन से दुनिया की दो तिहाई हिस्सों की जरूरतें पूरी हो जाएंगी। तथा डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस अदनोम गेब्रयेसस का कहना है कि, कोवैक्स प्लान के तहत पूरी दुनिया की जरूरतों के हिसाब से वैक्सीन पहुंचाई जाएगी जो कि सभी देशों के लिए बेहद अहम है। वैसे कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचाई हुई है। ताजे आंकडों के मुताबिक...

ओर भी तकलीफें हैं

 बात होनी चाहिए किसानों की, बेरोजगारी की, बॉड़र सिक्योरिटी की, जीड़ीपी की अन्य कई ऐसे मुद्दों की जिनसे इस वक्त हमारे देशवासियों को जूझ ना पढ़ रहा है। लोगों के घर में खाने को अनाज नहीं है, साफ़-सफाई की कोई सुविधा नहीं है। एक तरफ कोरोना का खोफ है लोगों के मन में, वायरस संक्रमितों के आकड़े प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं पर फिर भी बात हो रहीं है दीपिका की, कंगना की, रिया की। माना बेशक़ यह अहम मुद्दा है सुंशात की मौत का उससे जुड़े ड्रगस कनेक्शन का जिसमें बढ़ें-बढ़ें सिलेब्रिटीज़ के तार जुड़े हुए हैं पर हम यह कैसे भूल सकते हैं यह पहली बार हुआ है जब संसद में कोई बिल पास हुआ और उसके अगले दिन सरकार को उस बिल के लिए सफाई देनी पड़ी। सरकार द्वारा अखबारों में इश्तिहार छपे अपनी बात को सही साबित करने के लिए कि यह बिल अमीरों के लिए नहीं गरीबों, किसान के हक में है। बहरहाल, हाल ही में लोकसभा में पास हुए तीन किसान बिल में से दो बिल को तो राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई है। जो राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून का रूप ले लेगा। राज्यसभा ने दो किसान बिल यानी फॉर्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड ऐंड कमर्श बिल 2020 और फॉर्मर...

अब बैक्टीरियल इन्फेक्शन का भी खतरा

 विश्व में असंभव कुछ भी नहीं है। किसी ने सोचा भी नहीं होगा, कि ऐसे भी दिन देखने को मिलेंगे, जब लोग घरों में रहने के लिए मजबूर हो जाएंगे। आसमान की ऊंचाइयों को नापने का सपना ऐसा टूटेगा कि लोग अपनों से भी नहीं मिल पाएंगे। घर लौटने की राह देखते-देखते घरों में ही बंद हो जाएंगे। घर से बाहर निकलना यानी मौत को आमंत्रण देना हो जाएगा। वातावरण शुद्ध हो जाएगा, लेकिन चैन की सांस नहीं ले पाएंगे। इस वक्त जब विश्व अपनी पूरी ताकत झोंक कर कोरोना महामारी को हराने में लगा है। तभी कोविड-19 के कारण अर्थव्यवस्था को भारी चोट पहुंच रही है। लोगों के कारोबार चौपट हो गए हैं। लोगों की नौकरी भी उनसे छिन रही है। बेरोजगारी का आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। यह वायरस ना सिर्फ भारत में बल्कि पूरे विश्व में तांडव मचा रहा है और तो और कोरोना संकट ने मानवता के समक्ष रोजी-रोटी की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। उल्लेखनीय है कि, कोरोना वायरस का हमला सबसे पहले झेलने के बाद अब उत्तरपूर्व चीन में हजारों लोग एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन के लिए पॉजिटिव पाए गए हैं। जो बैक्टीरिया वैक्सीन बनाने वाले सरकारी बायोफार्मासूटिकल प्लांट...

ड्रैगन की हिमाकत

ड्रैगन अपनी नापाक हरकतों से अभी भी बाज नहीं आ रहा है। विश्व को कोरोना जैसी भयंकर महामारी से जूंजने के लिए परेशान करने के बाद भी शायद अभी भी चीन को चैन नहीं मिला है। बहरहाल, ताइवान ने हालही में अमेरिकी दूत के इस स्व-शासित द्वीप के नेताओं से मुलाकात की और इस दौरान चीनी सेना ने अप्रत्याशित तौर पर शक्ति प्रदर्शन करते हुए ताइवानी क्षेत्र में लड़ाकू जेट समेत 18 विमान उड़ाए। जो बेशक़ ही आपत्तिजनक हैं। तथा अमेरिकी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी कीथ क्रैच ने ताइवान के आर्थिक मामलों के मंत्री और उप प्रमुख के साथ चर्चा की और उन्होंने उद्योग जगत के नेताओं से भी मुलाकात की व ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि, चीन के 18 लड़ाकू विमानों ने ताइवान के वायु रक्षा क्षेत्र में प्रवेश किया है एंव उन्होंने कहा कि ताइवान ने चीनी विमानों की आवाजाही पर निगरानी रखी हुई है। वहीं, चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेन ग्योकियांग ने इसे राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए ताइवान स्ट्रेट की वर्तमान स्थिति के मद्देनजर की गई एक वैध और आवश्यक कार्रवाई करार दिया। गौरतलब है कि, चीन ताइवान को अप...

अब वैक्सीन पर हैकर्स की नजर

 कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। दुनियाभर में अब तक कोरोना के 2.5 करोड़ से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं, और इस महामारी से पूरी दुनिया में आठ लाख से ज्यादा लोगों की मौत भी हो चुकी है और सिर्फ अकेले भारत में कोरोना से 70 हजार से ज्यादा लोगों अपनी जान गंवा चुके हैं। तथा इस माहामारी से बचने के लिए भारत समेत दुनिया के कई देशों में कोरोना वैक्सीन बनाने का काम तेजी से चल रहा है व कई देशों में वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल जल्द पूरा होने की भी उम्मीद है लेकिन इस बीच अमेरिका ने दावा किया है कि, चीनी हैकर्स कोरोना वैक्सीन से जुड़े रिसर्च डेटा चुराने की कोशिश कर रहे हैं। जो बेहद ही शर्मनाक हरक़त है। बहरहाल, अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल और न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक भी अमेरिका की जांच एजेंसी फेडरल ब्‍यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन यानी एफबीआई और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने चीन पर आरोप लगाया है कि, चीनी हैकर्स और जासूस कोरोना वायरस के लिए वैक्‍सीन से जुड़ी रिसर्च डेटा चुराने की कोशिश में लगे हुए हैं एंव साथ ही उन्होंने कहा कि अब वह चीनी हैकिंग को लेकर एक ...

ड़ब्लूएचओ की चेतावनी

 समूचे विश्व कोरोना वायरस महामारी से त्रस्त है।दुनियाभर के देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है। इस संकट की घड़ी में काफी लोगों के कारोबार में, आमदनी में बेशक कमी आई है। जिससे उभरने के लिए लोग काफी प्रयास कर रहे हैं लेकिन उल्लेखनीय है कि, ऐसे समय में विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने एक चेतावनी दी है जिसके अनुसार दुनिया को अगली महामारी के लिए भी तैयार रहना चाहिए क्योंकि विश्व में अब अगली महामारी कब आ जाए यह तो किसी को नहीं पता परन्तु उसके लिए अगर हम तैयार रहेंगे तो यह हमारे लिए ही अच्छा होगा। दरअसल, डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस अधनोम ग्रेबेसियस ने हालही में कहा है कि दुनिया को अगली महामारी के लिए बेहतर तरीके से तैयार होना चाहिए। साथ ही उन्होंने देशों से सार्वजनिक स्वास्थ्य में निवेश करने के लिए भी आह्वान किया। बहरहाल, चीन के वुहान शहर में दिसंबर 2019 में सामने आए पहले कोरोना वायरस मामले के बाद अब तक दुनिया में 2.7 करोड़ लोग से भी अधिक लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। वहीं, दुनियाभर में 8,88,326 से ज्यादा लोगों की इस वायरस से मौत भी हो चुकी है। तथा डब्ल्...

हिंसा हिंसा हिंसा

 नफरत के खिलाफ रिपोर्ट करना यकीनन ही नफरत फैलाना नहीं होता परन्तु शायद हमारे देश में बहुत सारे लोगों को इस सच से परेशानी होती है और यह लोग चाहते हैं कि इन्हें खबर का वह संस्करण दिखाया जाए जो उन लोगों को सूट करता है लेकिन इन कुछ मुट्ठी भर लोगों के अनुसार, जेहाद पर बात करना तो नफरत फैलाना ही हैं क्योंकि इनके मुताबिक कट्टर इस्लाम का विरोध करना सभी मुसलमानों का विरोध करने जैसा है व किसी धर्म में सुधार की बात करना असहनशीलता है। गौरतलब है कि हाल ही में बांग्लादेश से आई कुछ तस्वीरें उन मुट्ठी भर लोगों को देखनी चाहिए, ताकि वह उन तस्वीरों को देखकर समझ जाए कि असली असहनशीलता और असली कट्टरपंथ हकीकत में किसे कहते हैं। बहरहाल सभी मुस्लिम देशों की तरह इन दिनों बांग्लादेश में भी फ्रांस के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं परन्तु विरोध करने के लिए बांग्लादेश में प्रदर्शनकारी सिर्फ फ्रांस के झंडे ही नहीं जला रहे, बल्कि वहां रहने वाले हिंदुओं के घरों को भी जलाया जा रहा है। जो अवश्य ही निंदनीय हैं। बांग्लादेश के कोमिला जिले में कट्टरपंथी भीड़ ने हिंदुओं के दस घरों में तोड़ फोड़ की और इन घरों को पूरी तरह...

अब की बार कौन?

 अमेरिका, दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है, आज से लगभग 231 वर्ष पहले साल यानी 1789 में अमेरिका में पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुए थे लेकिन इन दो सौ वर्षों में अमेरिका के प्रेसिडेंटल इंलैक्शन में बड़े बदलाव हुए हैं। अमेरिका समूचे विश्व के लोकतंत्र की परंपराओं पर ज्ञान देता है व इस समय भी जब बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जा रहे हैं तो वहां पर भी चुनावी भाषणों में जंगलराज की बहुत चर्चा हो रही है। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क से हालही में कुछ तस्वीरें सामने आई हैं। वह तस्वीरें अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास यानी व्हाइट हाउस की हैं। व्हाइट हाउस के चारों तरफ स्टील के नए बैरियर लगाए गए हैं, एक सुरक्षित घेरा बनाया गया है क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों के बाद हिंसा हो सकती है तो इसलिए व्हाइट हाउस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। आठ हजार फीट से अधिक लंबे बैरियर बहुत मजबूती से लगाए गए हैं। जिन्हें नुकसान पहुंचाना असंभव ही है। हालांकि सुरक्षा के इन इंतजामों की एक और वजह भी सामने आ रही है कि व्हाइट हाउस में डोनाल्ड...

पत्रकार खुद खबर बन गया

 मुंबई में क्या पूर्ण रूप से जंगलराज चल रहा है, नंगे पैर, एक थाने से दूसरे थाने, एक हॉस्पिटल से दूसरे हॉस्पिटल दौड़ा रहे हैं, सत्ता के नशे ने क़ानून को फ़ुटबॉल बना दिया है, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ताक पर रख दिया गया है, अत्याचार और जुर्म तो रावण का भी ज़्यादा दिन नहीं चल पाया था तो यह तो कलयुग हैं। बहरहाल अर्नब गोस्वामी की पत्रकारिता के कई पहलू ऐसे बेशक़ हैं जिनसे जरूरी नहीं कि हर कोई सहमत हों लेकिन बीते दिन जो मुंबई पुलिस की कार्रवाई बदले की भावना में बदल गई थी। वह अवश्य ही गलत हैं। पुलिस को यह ध्यान रखना ही होगा कि वह किसी राजनीतिक दल या नेता की निजी सेना की तरह काम नहीं कर सकती। इस वक्त पुलिस कार्रवाई बेशक़ ही निंदनीय और भर्त्सनीय है। बीते दिन रिपब्लिक के एडिटर अर्नब गोस्वामी को खुदकुशी के लिए उकसाने के केस में गिरफ्तार किया गया। जो मामला दो साल पुराना है। अर्नब के घर में अचानक घुसकर रायगढ़ पुलिस ने जो कार्रवाई की वह अवश्य ही सवाल खडे करती है। माना पत्रकार कानून से ऊपर नहीं होता लेकिन मीडिया प्रोफेशनल के साथ ऐसा व्यवहार भी उचित भी नहीं हैं। सच में हद है। जिस तरह से गोस्वामि...

जम घोटू में सांस लेने के लिए मजबूर

 हर तरफ धुँआ ही धुँआ हैं, राख है, कालिख है। ना जाने यह दुनिया को क्या हो रहा हैं। जहर उगलती चिमनिया, भांप उगलता इंजन प्रतिदिन दिल जहरीली हवा लेने को धड़का रहा हैं, हर जीव बिन पानी तड़प रहा हैं, नया युग आधुनिकता के नाम पर अपने कर्मों से प्रदूषण फैला रहा हैं। हजारों में ही कोई होगा जो इसका निवारण कर रहा होगा। भारत सरकार ने जनवरी 2019 में नैशनल क्लीन ऐयर प्रोग्राम की शुरुआत की थी जिसके तहत वर्ष 2024 तक प्रदूषण के स्तर में तीस से चालीस प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन दो साल पूरे होने वाले हैं और भारत इस लक्ष्य के आस-पास भी नहीं पहुंच पाया हैं। बीते दिनों से ही दिल्ली और आस पास के शहरों में प्रदूषण ने इस मौसम का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पिछले 48 घंटों से इन शहरों की हवा का हाल इतना बुरा है कि लोग ठीक से सांस भी नहीं ले सकते हैं। इस प्रदूषण की वजह से दिल्ली में धूप तक नहीं निकल रही हैं। अधिकतम दिल्ली निवासी दम घुटने, आंखों में जलन और सिरदर्द की शिकायतें कर रहे हैं और यह सभी बीमारियां प्रदूषण की ही देन हैं। पूरे देश में अब सबसे खराब हवा दिल्ली और आस पास के इलाकों की ही है। सर...

जमीनी हकीकत कुछ ओर ही

 हर तरफ धुँआ ही धुँआ हैं, राख है, कालिख है। ना जाने यह दुनिया को क्या हो रहा हैं। जहर उगलती चिमनिया, भांप उगलता इंजन, प्रतिदिन दिल जहरीली हवा लेने को धड़क रहा हैं, हर जीव बिन पानी तड़प रहा हैं, नया युग आधुनिकता के नाम पर अपने कर्मों से प्रदूषण फैला रहा हैं। हजारों में ही कोई होगा जो इसका निवारण कर रहा होगा। आलम यह है कि भारत सरकार ने जनवरी 2019 में नैशनल क्लीन ऐयर प्रोग्राम की शुरुआत की थी जिसके तहत वर्ष 2024 तक प्रदूषण के स्तर में तीस से चालीस प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन दो साल पूरे होने वाले हैं परन्तु अभी तक भारत इस लक्ष्य के आस-पास भी नहीं पहुंच पाया हैं। बीते कई दिनों से ही दिल्ली और आस पास के शहरों में प्रदूषण ने इस मौसम का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। रोजगार ऐक्यूआई बढ़ता जा रहा हैं। कोरोना के साथ-साथ लोगों को अब इस ओर भयंकर आपदा से जूझना पड़ रहा हैं और आगे भी अभी निपटना पड़ेगा। लगातार दिल्ली में कोरोना के केस बढ़ रहे है, ऐसे में इस दौरान लोगों को कई चीजों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कोरोना के साथ अब जहरीली गैसे भी लोगों के शरीर में प्रवेश करके उन्हें बीमार बन...