अंग्रेजी नाम इंडिया से भारत की मांग

इंडिया अनेकता में एकता का देश माना जाता है। जो अपनी अलग संस्कृति और परंपरा के लिए भी जाना जाता है। यहां की मातृभाषा भले ही हिंदी है परंतु बिना किसी बंधन के अलग-अलग धर्मों के लोगों के द्वारा यहाँ कई भाषाएँ बोली जाती हैं। जिनका यहां पूरा सम्मान किया जाता है।
ऐसे ही भारत को भी अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है- भारत, इंडिया, हिंदुस्तान, आर्यवर्त व जंबूद्वीप। जिसमें से सबसे पुराना नाम आर्यवर्त है। परंतु दिल्ली के एक निवासी नमह नामक याचिकाकर्ता ने देश का अंग्रेजी नाम इंडिया को बदलकर भारत करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है। जिसको सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध भी कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दो जून को सुनवाई करेगा। याचिका में दावा किया गया है कि 'भारत' या 'हिंदुस्तान' शब्द हमारी राष्ट्रीयता के प्रति गौरव का भाव पैदा करते हैं। याचिका में सरकार को संविधान के अनुच्छेद 1 में संशोधन के लिए उचित कदम उठाते हुए 'इंडिया' शब्द को हटाकर, देश को 'भारत' या 'हिंदुस्तान' कहने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। यह अनुच्छेद इस गणराज्य के नाम से संबंधित है। याचिका में 1948 में संविधान सभा में संविधान के तत्कालीन मसौदे के अनुच्छेद 1 पर हुई चर्चा का हवाला भी दिया गया है और कहा गया है कि, उस समय देश का नाम 'भारत' या 'हिंदुस्तान' रखने की पुरजोर हिमायत की गई थी।
याचिका के अनुसार, यद्यपि यह अंग्रेजी नाम बदलना सांकेतिक लगता हो लेकिन इसे भारत शब्द से बदलना हमारे पूर्वजों के स्वतंत्रता संग्राम को न्यायोचित ठहराएगा। व यह उचित समय है, जब देश को उसके मूल और प्रमाणिक नाम 'भारत' से जाना जाए। इस याचिका पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू और न्यायाधीश अरुण मिश्रा की पीठ ने सभी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों को नोटिस भी जारी किया। याचिका में मांग की गई थी कि केंद्र सरकार को किसी सरकारी कार्य के लिए आधिकारिक पत्रों में इंडिया नाम का इस्तेमाल करने से रोका जाए। अब इस याचिका पर जल्द ही मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी।
-निधि जैन

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