चीन और अमेरिका ही माने क्यों नहीं

 वैश्विक महामारी कोरोना ने बेशक ही सब को परेशान कर के रखा है लेकिन अच्छी बात यह है कि इस वायरस में हमें एकजुटता का महत्व याद दिलाया है क्योकिं इस समय कोरोना महामारी के खिलाफ पूरी दुनिया एकजुट हो गई है।

बहरहाल, अब विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डबल्यू़एचओ की पहल पर दुनिया के 156 देशों ने वैक्सीन बनाने के लिए हाथ मिला लिया है लेकिन आश्चर्य की बात है कि अमेरिका और चीन, दोनों ने डब्ल्यूएचओ की इस मुहिम का साथ देने से इनकार कर दिया और इस समझौते पर दस्तखत भी नहीं किए।
गौरतलब है कि, डब्ल्यूएचओ की इस मुहिम में 156 देशों की लिस्ट में 64 अमीर देश शामिल हुए हैं व इसे कोवैक्स प्लान नाम दिया गया है, जिसके तहत अगले साल के आखिर तक कोरोना वैक्सीन की दो अरब डोज बननी है एंव इतनी वैक्सीन से दुनिया की दो तिहाई हिस्सों की जरूरतें पूरी हो जाएंगी। तथा डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस अदनोम गेब्रयेसस का कहना है कि, कोवैक्स प्लान के तहत पूरी दुनिया की जरूरतों के हिसाब से वैक्सीन पहुंचाई जाएगी जो कि सभी देशों के लिए बेहद अहम है। वैसे कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचाई हुई है। ताजे आंकडों के मुताबिक अबतक 31 मिलियन यानि तीन करोड़, दस लाख लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, जबकि दस लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गवां चुके हैं और सिर्फ यहीं नहीं अमेरिका में ही दो लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है व दुनिया में 150 से अधिक वैक्सीन का विकास हो रहा है, जिसमें से 38 का मानव परीक्षण भी चल रहा है एवं ऐसे में उम्मीद है कि जल्द ही कोरोना के खिलाफ प्रभावी हथियार यानि वैक्सीन दुनिया को मिल जाएगी ताकि अन्य लोगों की जान बच सकें।
उल्लेखनीय है कि,
चीन में कोरोना वायरस की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैल गया। वहीं, अमेरिका में पूरी दुनिया के संक्रमितों का बड़ा हिस्सा रहता है और वो कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित देश है लेकिन उसका कहना है कि उसने अपने नागरिकों को कोरोना से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया है। ऐसे में अलग से निवेश करने की कोई जरूरत नहीं है। अमेरिका से इस कदम के बाद उसकी दुनिया की अगुवाई करने वाले दावे की भी पोल खुल गई है और उसका स्वार्थी चेहरा बेनकाब हो गया है।
-निधि जैन

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वर्ष 2020 की यादें

अब कावासाकी से भी लड़ना है

चीन में कोरोना की वापसी