अब बैक्टीरियल इन्फेक्शन का भी खतरा
विश्व में असंभव कुछ भी नहीं है। किसी ने सोचा भी नहीं होगा, कि ऐसे भी दिन देखने को मिलेंगे, जब लोग घरों में रहने के लिए मजबूर हो जाएंगे। आसमान की ऊंचाइयों को नापने का सपना ऐसा टूटेगा कि लोग अपनों से भी नहीं मिल पाएंगे। घर लौटने की राह देखते-देखते घरों में ही बंद हो जाएंगे। घर से बाहर निकलना यानी मौत को आमंत्रण देना हो जाएगा।
वातावरण शुद्ध हो जाएगा, लेकिन चैन की सांस नहीं ले पाएंगे। इस वक्त जब विश्व अपनी पूरी ताकत झोंक कर कोरोना महामारी को हराने में लगा है। तभी कोविड-19 के कारण अर्थव्यवस्था को भारी चोट पहुंच रही है। लोगों के कारोबार चौपट हो गए हैं। लोगों की नौकरी भी उनसे छिन रही है। बेरोजगारी का आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। यह वायरस ना सिर्फ भारत में बल्कि पूरे विश्व में तांडव मचा रहा है और तो और कोरोना संकट ने मानवता के समक्ष रोजी-रोटी की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। उल्लेखनीय है कि, कोरोना वायरस का हमला सबसे पहले झेलने के बाद अब उत्तरपूर्व चीन में हजारों लोग एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन के लिए पॉजिटिव पाए गए हैं। जो बैक्टीरिया वैक्सीन बनाने वाले सरकारी बायोफार्मासूटिकल प्लांट में लीक होने के बाद फैला है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि, करीब तीस लाख लोगों की आबादी वाले लांझू में 3,245 लोगों को ब्रूसेलोसिस हो गया है।वैसे माल्टा और मेडिटरेनियन फीवर कही जाने वाली यह बीमारी इन्फेक्शन का शिकार हुए जानवरों या जानवरों के उत्पाद के उपयोग से हो सकती है। इसमें बुखार, जोड़ों में और सिर में दर्द होता है। तथा अभी तक इस इन्फेक्शन से किसी की मौत तो नहीं हुई है पर 22,000 लोगों की स्क्रीनिंग के बाद 1,401 लोगों के टेस्ट किए गए हैं। चीनी अधिकारियों का कहना है कि यह इन्फेक्शन इंसानों से इंसानों में नहीं फैल रहा है परन्तु फिर भी यह चिंता पूर्ण विषय है क्योकिं अगर इस बीमारी ने भी अपना विकराल रूप धारण कर लिया तो संसार में हाहाकार मच जाएगा। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेन्शन के मुताबिक इन्फेक्शन होने पर कुछ लक्षण लंबे वक्त के लिए रह सकते हैं जबकि कुछ ऐसे भी हो सकते हैं कि कभी पूरी तरह से जाएं ही ना, जैसे अर्थराइटिस या किसी अंग में सूजन।
चीनी प्रशासन ने पाया है कि, बायोफार्मासूटिकल प्लांट ने एक्सपायर हो चुके डिसइन्फेक्टेंट का प्रयोग किया था। जहां बूय्रसेल वैक्सीन बनाई जा रही थीं। जिसकी वजह से फैक्ट्री के एग्जॉस्ट से बैक्टीरिया कभी पूरी तरह से साफ ही नहीं हुआ। व यहां से निकलने वाली गैस ऐरोसॉल बनकर हवा के साथ लांझू वेटरिनरी रिसर्च इंस्टिट्यूट पहुंच गई। जहां पिछले साल दिसंबर में 200 लोग इससे इन्फेक्ट हो गए। बैक्टीरिया के फैलने में भेड़, मवेशी और सुअर मदद करते हैं। फैक्ट्री ने घटना के लिए माफी मांगी थी लेकिन उसका लाइसेंस वापस ले लिया गया और अक्टूबर से पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, 11 पब्लिक अस्पतालों को मरीजों का फ्री में चेकअप करने को कहा है।
गौरतलब है कि, अगर इस बीमारी ने भारत में भी प्रवेश कर लिया तो यकीनन लोगों की परेशानियों बढ़ जाएगी कयोंकि विश्व जब एक बीमारी से ही नहीं उभरा है तो एक और महामारी का सामना कैसे करेगा।
-निधि जैन