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सर्वोच्च अदालत के आदेश के बावजूद भी ऑपरेशन बुलडोज़र पर रोक नहीं लगीं, क्यों?

-By Nidhi Jain  हाल ही में हनुमान जयंती शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा से, दिल्ली का जहांगीरपुरी इलाका सुर्खियों में आ गया है। शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा पर तो सियासत आरम्भ हो ही गई थी लेकिन इसे तूल ओर जब मिला जब जहांगीरपुरी में बुधवार सुबह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। बुधवार सुबह से ही जहांगीरपुरी में माहौल पहले से कहीं ज़्यादा तनावपूर्ण दिख रहा था। पिछली शाम से ही खबर आ रही थी कि एमसीडी ने दिल्ली पुलिस से क़रीब 400 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की मांग की है। जिसका कारण, सरकारी ज़मीन से अतिक्रमण हटाने का बताया गया था। जिसमें ज़ाहिर से, बुलडोज़र का प्रयोग होना था। जो आजकल ख़ासा चर्चा में है। सुबह दस बजे के आसपास ही, पुलिस की निगरानी में बुलडोज़र ने आकर अवैध सम्पत्तियों को हटाने शुरू कर दिए थे। हालांकि गैरकानूनी एवं असंवैधानिक घरों, दुकानों पर काफी लंबे समय से योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बुलड़ोजर चल रहें थे लेकिन जहांगीरपुरी इलाका इसलिए सुर्खियों में आया क्योंकि यह वहीं इलाका था जहां शनिवार को एक धार्मिक जुलूस निकलते वक़्त हिंसा भड़की थी। पिछले दो दिनों से वहां कर्फ़्यू जैसा ...

राष्ट्रहित सर्वोपरि- राष्ट्रवाद सर्वोपरि

 पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में बुरी तरह कांग्रेस की पराजित होने के बाद भी गांधी परिवार विक्टिम कार्ड का सहारा लेकर कांग्रेस को अपने कब्जे में बनाए रखना चाहता है और इस नीजी मानसिकता का प्रमाण यह है कि चुनाव वाले राज्यों के कांग्रेस अध्यक्षों से तो इस्तीफा देने को कह दिया गया है लेकिन गांधी परिवार अपनी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है और वो भी तब, जब सारे फैसले उन्हीं की ओर से लिए जा रहें हैं। यह भी एक विडंबना है कि पांच राज्यों में शर्मनाक हार के कारणों की समीक्षा की मांग करने वाले कांग्रेस नेता यह कहने का साहस भी नहीं जुटा पा रहे है कि इस हार के लिए गांधी परिवार जिम्मेदार है और वह अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते। गौरतलब है कि गांधी परिवार द्वारा कांग्रेस पार्टी के संचालन के तौर-तरीकों से असहमत नेताओं द्वारा बनाए गए जी-23 समूह के नेताओं में से केवल कपिल सिब्बल को छोड़कर अन्य किसी नेता ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में आस्था जताना बेहतर नहीं समझा है। हालांकि इस समूह के नेताओं ने अभी तक आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई जवाब नहीं दिया है परन्तु अटकले ये ही कह रही है कि जी-23 के नेता व अन्य...

जनता पर महंगाई की मार!

 आम आदमी पर महंगाई की मार कम होने का नाम नहीं ले रही है। लोग अब धीरे-धीरे कोरोना महामारी से आई तंगी से उबर ही रहें थे कि अब पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी होने के बाद सीएनजी और पीएनजी गैस के दामों में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने दिल्ली व पड़ोसी शहरों नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और अन्य में संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) और पाइप्ड प्राकृतिक गैस (पीएनजी) की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है। जिसका असर लोगों के घर के बजट पर पड़ रहा है। कीमतों में वृद्धि के बाद, दिल्ली में सीएनजी की कीमत अब 59.01 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि पीएनजी को 36.61 रुपये प्रति मानक क्यूबिक मीटर (एससीएम) पर बेचा जाएगा। सरकार जब विपक्ष में होती है तो महंगाई पर बड़े सवाल उठाती है और जब सत्ता में आती है तो उसका जिम्मेदार विपक्ष को बताती है पर विडंबना यह है कि आखिर कब तक आम आदमी सहेंगा मंहगाई की मार। - निधि जैन 

लॉकअप और कंगना का है पुराना नाता

 क्वीन ऑफ टेलीविज़न कंटेंट एकता कपूर ने हाल ही में एक नया शो 'लॉकअप- बैडास जेल...अत्याचारी खेल' बनाया है जिसे होस्ट कर रही हैं बॉलीवुड की अभिनेत्री कंगना रनौत। ये कंगना रनौत का डिजिटल डेब्यू भी है। शो के कंटेस्टेंट का चुनाव खुद कंगना रनौत ने ही किया है। ओटीटी पर ये पहला ऐसा शो है जो रिलीज़ होने से पहले ही बहुत ज़्यादा विवादों और सुर्ख़ियों में बना हुआ था। रिलीज़ होने के बाद तो अब इसकी प्रमुखता रोजाना बढ़ती ही जा रही है, जिसकी मुख्य वजह है शो का फ़ॉर्मेट और उसके कंटेस्टेंट। शो में अधिकतर ऐसे प्रतियोगी हैं, जिनका विवादों के साथ बहुत गहरा रिश्ता रहा है। जिसके कारण इस शो का विवादों से ओर घहरा संबंध बनता जा रहा है। 'लॉकअप' नामक इस शो के सभी प्रतियोगियों को लॉकअप में 72 दिनों के लिए बंद कर दिया जाएगा व उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना होगा और तक़रीबन हर कदम पर टास्क दिए जाएंगे। वहीं कंगना रनौत, जेलर की भूमिका निभाएगी। ऑडियंस अपने पसंदीदा कंटेस्टेंट्स को वोट भी कर सकते है, लेकिन 50 फ़ीसदी वोटिंग पावर कंगना के पास ही होगी। शो में आगे बढ़ने के लिए कंटेस्टेंट्स को अप...

रूस युक्रेन युद्ध में भारत की भूमिका

जंग खत्म हो जाएगी, लीडर हाथ मिला लेंगे लेकिन बूढ़ी माँ बेटे का इंतज़ार करती रह जाएगी। पत्नी बच्चों को झूठा दिलासा देती रह जाएगी कि पापा जल्दी वापस आएँगे। बहन भाई की प्रतीक्षा करती रहेंगी। सोचिये, लड़ा कौन और क़ीमत किसने चुकाई ? एक तरफ़ रूस ने यूक्रेन पर भारतीयों को बंधक बनाने का आरोप लगाया तो दूसरी तरफ़ यूक्रेन ने आरोप ख़ारिज करते हुए रूस पर पलटवार किया। हालांकि इसके बीच ऑपरेशन गंगा के तहत सभी भारतवासी भारत सुरक्षित पहुंच चुके है। भारत, निष्पक्ष होकर रूस युक्रेन युद्ध में सामंजस्य बिठाने की कोशिश कर रहा है क्योंकि युद्ध किसी भी देश में हो, कहीं पर भी हो उसका असर कहीं न कहीं सभी देश पर होता ही है चाहे वह समान के आयात निर्यात को लेकर हो एवं आर्थिक नुकसान तो होता ही है। भारत, यूक्रेन के साथ भी हालात को लेकर चर्चा कर रहा है वहीं रूस के साथ भी तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहा है ताकि कच्चे तेल की कमी के संकट से भारत को न जूझना पड़े। युद्ध की शुरुआत से ही भारत दोनों देशों से संपर्क कर रहा है। यहां तक कि वह अपनी हर कोशिश कर रहा है युद्ध रोकने की। भले भारत का यह रुख पश्चिमी देशों को अखरा है ले...

एक और आपदा

 अगर कोरोना वायरस की तीसरी लहर आती है तो वह सबसे ज्यादा बच्चों को प्रभावित करेगी यह तो सभी जगह कहा जा रहा हैं लेकिन अभी से कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले बच्चों में दो से छह सप्ताह में मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेंटरी सिंड्रोम यानी एमआईएस के मामले देखे जा रहे हैं। इसमें बच्चों को बुखार आना, शरीर पर लाल चकते बनना, आंखें आना, सांस फूलना यानी जकड़न, उल्टी, डायरिया, थकान के लक्षण भी हो रहें हैं। हालांकि ये एक आपातकालीन स्थिति है और समय रहते उपचार शुरू हो जाए तो इससे ठीक हुआ जा सकता हैं। इसके लक्षण तो कोरोना से मिलते-जुलते हैं लेकिन कोरोना में जहां संक्रमण फेफड़ों में होता है एमआईएस में ऐसा लगता है कि बीमारी शरीर के एक सिस्टम में नहीं बल्कि सब जगह है, इसलिए इसे मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेंट्ररी सिंड्रोम कहा जाता है। गौरतलब है कि अब तक तो बच्चों में कोरोना संक्रमण कम हो रहा है और ज्यादातर मामलों में कोई लक्षण प्रकट भी नहीं हो रहें हैं पर वायरस के व्यवहार में कोई बदलाव हो गया व महामारी की प्रवृत्ति बदल जाए तो स्थिति बदल भी सकती है। ऐसे समय में हमें नए तरीके से इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार होना ...

राजस्थान कांग्रेस का यह कैसा विरोध?

 एक तरफ देश की राजधानी दिल्ली में जहां कांग्रेस पार्टी सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का विरोध बढ़-चढ़कर कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार विधायकों के लिए आलीशान फ्लैट्स बनवा रही है। आखिरकार यह कैसा विरोध है? जयपुर के ज्योतिनगर में विधानसभा के पास 160 फ्लैट्स का निर्माण किया जा रहा है व कंस्ट्रक्शन की शुरुआत वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी लहर के बीच 20 मई को हो गई है। 160 लग्जरी फ्लैट्स के निर्माण का जिम्मा राजस्थान हाउजिंग बोर्ड यानी आरएचबी को दिया गया है एंव 160 फ्लैट्स के निर्माण पर 266 करोड़ रुपए की लागत का अनुमान हैं। गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने इस प्रॉजेक्ट को ऐसे समय पर शुरू किया है, जब कांग्रेस पार्टी दिल्ली में सेट्रल विस्टा प्रॉजेक्ट का विरोध कर रही है, जिसमें नई संसद का निर्माण भी शामिल है। कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेताओं ने महामारी के बीच इस प्रॉजेक्ट का विरोध किया है तो राजस्थान में बनने जा रहे फ्लैट के खिलाफ मोर्चा क्यों नहीं निकाला। - निधि जैन

हाइपरसोनिक मिसाइलों के उपयोग से कितना है फायदा

 रूस और युक्रेन के बीच गहराता संकट कम होने के बजाय अब ओर बढ़ता जा रहा है, रोजाना ही ये युद्ध, विश्व युद्ध के करीब पहुंच रहा है। वहीं ऐसा ये पहली बार हो रहा है जब रूस किसी युद्ध में इन मिसाइलों का उपयोग करने की धमकी दे रहा है, जिसे किंज़ल बैलेस्टिक मिसाइल के नाम से जाना जाता है। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन बार-बार हाइपरसोनिक मिसाइलों पर रूस के दांव का ज़िक्र करते रहे हैं, जिनकी रफ़्तार ध्वनि की गति से भी पांच गुना तेज़ है। ये रॉकेट 8 मीटर लंबे हैं और उच्च गतिशीलता से लैस हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन हाइपरसोनिक मिसाइलों के इस्तेमाल से रूस को कितना फायदा होगा भी, जिसके दम पर वह बार-बार युद्ध की धमकी देता है। राष्ट्रपति पुतिन ने पिछले दिसंबर में दावा किया था कि रूस हाइपरसोनिक मिसाइलों में वर्ल्ड लीडर है, उसके पास ऐसे मिसाइल हैं जिन्हें ट्रैक करना मुश्किल है, क्योंकि वे उड़ान के बीच में दिशा बदल सकते हैं। सटीक निशाना लगाने और दुश्मन की नज़र से छिपने के लिए हवा में अपनी चाल नियंत्रित करना मिसाइल के लिए ज़रूरी होता है और ये सब आधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल करने में सक्षम हैं। इनका ...

सन्यासी बनेंगे एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री

 उत्तर प्रदेश की सत्ता पर एक बार फिर योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी काबिज होने जा रही है। 28 मार्च को योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले लेंगे, जिसकी तैयारी लखनऊ में जोर-शोर से चल रही हैं। योगी के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर ग्रह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व भीजेपी के तमाम दिग्गज नेता शामिल होंगे। इसी के साथ सभी विपक्षी दल के बड़े नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। माना जा रहा है आज से पहले इतने बड़े पैमाने पर अभी तक किसी भी नेता का शपथग्रहण समारोह नहीं हुआ है। गौरतलब है कि यूपी विधानसभा चुनाव के नतीजों ने साबित कर दिया है कि सन्यासी जीवन जीने वाले योगी आदित्यनाथ जनता की उम्मीदों पर खरे उतरे हैं, इसी वजह से प्रदेश की जनता ने उन्हें दोबारा सत्ता पर बैठाया है। उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बनने वाले योगी आदित्यनाथ सन्यासी हैं और बेहद ही सादगी भरा जीवन जीते हैं व उनके पास खुद के स्वामित्व वाला घर भी नहीं है। जो उनके व्यक्तित्व को स्पष्ट दर्शाता है। वैसे तो भाजपा के तमाम नेताओं की सोच परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देती है। जो राष्ट्...

तख्तापलट का काउंटडाउन शुरू हुआ

 देखते ही देखते सियासी पिच पर क्लीन बोल्ड होने जा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान। कयास यही लग रहें हैं कि अब उनकी पीएम की गद्दी से उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इमरान खान 179 सांसदों की बहुमत से सरकार चला रहे थे, लेकिन अब उनके ही लगभग 24 सांसद आसिफ अली ज़रदारी की पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के इशारे पर प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ़ वोट करने का एलान कर चुके हैं। इसी के साथ 5 अन्य सांसद ऐसे हैं जो मौलाना फज़ल-उर-रहमान के साथ हैं। अब धीरे-धीरे इमरान खान के खिलाफ विपक्षी मोर्चा एकजुट हो रहा है। अविश्वास प्रस्वास पर जल्द से जल्द वोटिंग की मांग की जा रही है। इस बात का पता तो अब 28 मार्च को ही लगेगा कि इमरान, अविश्वास प्रस्ताव का सामना करते हैं या फिर बीच का रास्ता अपनाते हुए इस्तीफा देकर किसी और को प्रधानमंत्री बनाते हैं। बहरहाल पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने ओ आई सी कॉन्फ्रेंस के बाद इमरान खान को पद से इस्तीफा देने के लिए कह दिया है। जिसके बाद इमरान के पास और कोई रास्ता नहीं बचा है। 24 सांसदों के बगावती तेवर के साथ इमरान नंबर गेम में पीछे छू...

सफेद वस्त और होली का क्या है संयोग

 होली के इस त्योहार पर हमने हवा में रंग उड़ाया है आज कोई गम ना करना खुशियों का मौसम आया है ईश्वर करे इस होली पर आपके रंग में सब रंग जाए। हम सभी को इस त्यौहार को प्रेम पूर्वक एवं नैतिकता के साथ मनाना चाहिए ताकि इस त्यौहार की गरिमा एवं रिश्तों की मिठास बनी रहे। होली का हर किसी को बेसब्री से इंतजार रहता है। ये ऐसा पर्व है जब दुश्मन भी गले मिलकर सारे गिले-शिकवे भूल जाते हैं। इस त्यौहार से जुड़ी वैसे तो कई मान्यताएं है लेकिन इस दिन ज्यादातर लोग सफेद कपड़े ही पहनने है। बहरहाल भारत में रंगों के त्यौहार का कितना महत्व है, यह समझाने की किसी को आवश्यकता नहीं है। पूरब से पश्चिम तक और उत्तर से दक्षिण तक रंगों का त्योहार होली आम लोगों के बीच काफी रंगारम रहता है, लेकिन रंगों के इस त्यौहार पर श्वेत वस्त्र का भी अपना महत्व है। होली पर्व पर श्वेत वस्त्र पहनने के कई ऐसे कारण हैं, जिनका ज्योतिष शास्त्र से सीधा संबंध है। गौरतलब है कि श्वेत वस्त्र शांति का प्रतीक है और सफेद रंग पर हर रंग चढ़ जाता है, इसलिए होली पर्व पर श्वेत वस्त्र विशेष रूप से पहने जाते हैं। मन में शांति और सुख समृद्धि के प्रतीक श्...

मकसद, सिर्फ जनता को सम्मोहित करना

 उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पंजाब, गोवा और मणिपुर प्रदेशों में चुनावी महासंग्राम शुरू हो चुका है। हर बार की भाँति इस वर्ष भी चुनावी लड़ाई में जनता को रिझाने और बेवकूफ बनाने के लिए तमाम तरह के लुभावने वायदे, झांसे और जाल फेंके जा रहें है। सभी पार्टियों का प्रयास है कि जनता को सम्मोहित कर प्रदेश की बागडोर हमें मिल जाए। हालांकि बात तो सिर्फ सेवा की ही की जाती है लेकिन इस सेवा को करने के लिए साम, दाम, दण्ड और भेद सभी हथकंडे अपनाये जाते हैं। वैसे भी जहाँ सेवा भावना होती है, वहां इतनी मारामारी नहीं होती अर्थात जब हम इस उद्देश्य के साथ जुड़े होते है कि हमें सिर्फ कुछ देना ही है तो फिर इतनी राजनैतिक पैंतरेबाजी की क्या जरूरत है? विश्व का इतिहास इस बात का साक्षी है कि नियति की व्यवस्था को छोड़कर सभी मानवीय समस्याओं का शत् प्रतिशत निदान संभव है और विश्व के अनेक देश इस दिशा में अपना बेहतर उदाहरण भी प्रस्तुत कर चुके है लेकिन हमारे देश में वही बुनियादी समस्याएं जैसे गरीबी, जनसंख्या और बेरोजगारी दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है जिसके निदान का रस्ता अभी तक अंधकार में है। इन अनेक मुद्दों के नाम पर ...

वैक्सीन की बर्बादी

 कोरोना काल में जहां लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं कई राज्यों की भी शिकायत है कि टीकाकरण अभियान में उन्हें लोगों को लगाने के लिए वैक्सीन नहीं मिल पा रही है। हालांकि अब यह भी खबर आ रही हैं कि कुछ राज्यों में वैक्सीन की बर्बादी बदस्तूर जारी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वैक्सीन की बर्बादी में झारखंड सबसे ऊपर है, जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय का स्पष्ट निर्देश है कि वैक्सीन की बर्बादी को एक प्रतिशत से कम रखना है। कई राज्यों में जहां वैक्सीन अभी तक समूचे लोगों को लगी ही नहीं है ऐसे समय में वैक्सीन की इतने बड़े पैमाने पर बर्बादी बड़ी चिंता का कारण है। जिन राज्यों में टीके की बड़े पैमाने पर बर्बादी हो रही है, जाहिर है वहां टीकाकरण कार्यक्रम को ठीक से नहीं चला पा रहे है। दस लोगों का डोज है और केवल छह पहुंचते हैं तो बाकी चार डोज बर्बाद हो जाते हैं। दूसरा प्रमुख कारण टीका लगाने वालों का पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित न हो पाना भी है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी ओर से विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। बहरहाल किसी भी बड़े टीकाकरण अभियान में वैक्...

कोरोना के बाद ब्रेन फाग बन रहा मुसीबत

 कोरोना को हराने के बाद भी परेशानियां कम नहीं हो रहीं है बल्कि कोविड़-19 संक्रमण से ठीक हुए मरीज में कुछ ओर बीमारियां उभर रहीं हैं। मरीजों का कहना है कि वह अचानक चीजें भूलने लगें है व स्वजन पर चि़ड़चिड़ करने लगे एंव नींद नहीं आ रही, भूख नहीं लग रही जिसके कारण उनके स्वजन भी परेशान हो गए है। वहीं इस पर डॉक्टरों का कहना है कि यह ब्रेन फाग से मिले जुले लक्षण है। कोरोना को हराने वाले 50 प्रतिशत तक मरीजों में इस बात की संभावना होती ही है। कोरोना को हरा चुके मरीजों का कहना है कि उन्हें थकान हो रही है, किसी काम में मन नहीं लग रहा हैं। उनका आत्मवश्विास अचानक से कम हो रहा है। ड़ाक्टरो का मानना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान मरीजों में ब्लड क्लॉट यानी नसों में खून के थक्के जमना इसका कारण हो सकता है। संक्रमण के बाद व्यक्ति के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। इसमें बीमारी से जुड़ी कई नकारात्मक बातें होती हैं जो दिमाग पर असर करती हैं और इसी स्थिति को ब्रेन फॉग कहते हैं। कोविड इलाज के दौरान मरीजों के दिमाग तक ठीक से ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाना भी इस बीमारी की वजह हो सकती है। कोरोना वायरस का नया रूप श...

बच्चों को 1-2 नहीं बल्कि 4 टीके लगेगे

 कोरोना महामारी का प्रकोप अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है लेकिन तीसरी लहर की पूर्णआशंका है पर उससे पहले जुलाई में बच्चों पर कोवावैक्स का परीक्षण शुरू करने की योजना बनाई जा रही है क्योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी लहर बच्चों के लिए ज्यादा घातक होने वाली है। बहरहाल सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्रारा बच्चों के लिए चार टीके तैयार होने की संभावना माता-पिता के लिए खुशई खबर है। भारत बायोटेक के पास जो दो टीके हैं वह बच्चों पर आजमाए जा रहे हैं जबकि जाइडस कैडिला के टीके के लिए परीक्षण में शुरू से ही बच्चे शामिल थे। इसलिए अगर सब कुछ वैक्सीन निर्माताओं की योजना के अनुसार होता है, तो भारत में बच्चों के लिए चार टीके होंगे। वैसे भारत में कोवैक्सीन का टीका वयस्कों को लगाया जा रहा है। जो लगभग 78 प्रतिशत प्रभावकारी है और ये वैक्सीन 2 से 18 साल के बच्चों पर ट्रायल फेज में है। गौरतलब है कि आने वाली तीसरी लहर से भारत के आम नागरिकों पर एक बार फिर जोर पड़ेगा जिससे लोगों के घर का खर्च फिर ड़गमगाएगा परन्तु हमें एहतियातन कदम अपने जीवन का हिस्सा बनाके रखनें होगे अगर हमें इस लहर को भी हराना हैं तो। - निधि जैन...

मत करों इतनी जल्दबाजी, जिंदगी नहीं है इतनी सस्ती

 शाम होने को आई, साथ में मस्ती का माहौल है छाया। सारी चिंता भूलकर, उसने गाड़ी का स्टेयरिंग फराटे से घुमाया और दोस्तों से शर्त लगाकर फुल-स्पीड में गाड़ी दौड़ाई। तेज-तेज़ गाने, शराब का सेवन कर उसने फिरसे अपना वाहन चलाया। सड़क सुरक्षा सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए सुरक्षित और सुरक्षित होने के साथ-साथ सड़क दुर्घटनाओं और चोट के मामलों की संख्या को कम करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए, सभी को सड़क यातायात के सभी नियमों, विनियमों और संकेतों का सख्ती से पालन करना चाहिए। बच्चों को अपने माता-पिता, स्कूल में शिक्षकों और अपने से बड़ों लोगों से सुरक्षा नियमों के बारे में अवगत होना चाहिए क्योंकि सुरक्षा मानव मात्र के लिए ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण परिवार के लिए उपयोगी है। नशे में धुत होकर झूमता हुआ, वह एक गाड़ी से टकराया। अपनी जान के साथ ही साथ उसने औरों की जान को भी खतरे में डलवाया। रेस में उसने सबको हराया। सुरक्षा जागरूकता जीवन बचाती है। सड़क सुरक्षा का ध्यान धरती पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति को रखना चाहिए, चाहे वह वाहनों का उपयोग कर रहा हो या नहीं। आंकड़ों के अनुसार, यह पाया गया है कि अधिकां...

रूसी राष्ट्रपति के सिक्युरिटी घेरे को भेदना क्यों है मुश्किल?

 रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ज़िंदगी में कुछ भी तत्काल नहीं होता है। रूसी राष्ट्रपति के हर कदम पर सैकड़ों बॉडीगार्ड बारीकी से नजर रखते हैं, जो 24 घंटे उनके साथ रहते हैं। यहां तक की उनके खाने की भी कई बार जांच की जाती है, उनके पास तक पहुंचने से पहलें। और तो अब ऐसे संकट की घड़ी में जहां पुतिन, रूस द्वारा किये जा रहें यूक्रेन पर आक्रमण का नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसे में तो व्लादिमीर पुतिन पर 24 घंटे संकट का खतरा बना हुआ है जिसे देखते हुए राष्ट्रपति की सुरक्षा को ओर कड़ा कर दिया गया है। रूस में वर्तमान में, संचालित कई सुरक्षा सेवाओं में से एक विशेष रूप से राष्ट्रपति और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए समर्पित है। जिसे 'रूसी राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा' के नाम से जाना जाता है। यह रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (एफएसओ) को रिपोर्ट करती है। काले सूट, कानों में इयरफ़ोन लगाए ये गार्ड परछाईं की तरह दिन-रात पुतिन के साथ रहते हैं और जब ये एजेंट विदेश में गतिविधियों के दौरान पुतिन के साथ जाते हैं, तो वे खुद को चार मंडलियों में बांट लेते हैं। उनका सबसे करीबी घेरा उनके अपने निजी गार्ड्स का होता है। ...

बोर्ड परीक्षा, नया पैटर्न और टेंशन- कैसे मिलेगा छात्रों को ग्रेजुएशन में दाखिला?

 बारहवीं के इम्तिहान में 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने पर भी दिल्ली यूनिवर्सिटी के नामी कॉलेजों में पढ़ने का अवसर नहीं मिल पाता है। लगभग हर विषय में अधिकतम कटऑफ 99 प्रतिशत जाती है या उससे भी अधिक, जिस कारण दिल्ली यूनिवर्सिटी के तमाम कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को दाखिले नहीं मिलता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिले की उम्मीद में ऐसे ही हजारों छात्र कटऑफ के बाद हताश हो जाते हैं जबकि उनमें प्रतिभा की कमी नहीं होती। मजबूरन तब उन्हें अपना विषय बदलना पड़ता है। हजारों छात्र देशभर में हर साल दाखिले के लिए इस तरह की कटऑफ का सामना करते हैं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।2022-23 शैक्षणिक सत्र से यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने अंडर ग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने की पुरानी व्यवस्था को बदल दिया है। अब देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ग्रेजुएशन में दाखिला लेने के लिए बारहवीं बोर्ड में प्राप्त अंकों को वरीयता नहीं दी जाएगी बल्कि न्यूनतम अंकों की जरूरत जरूर पड़ेगी। यूजीसी ने विश्वविद्यालय संयुक्त प्रवेश परीक्षा की व्यवस्था की है। ये एक कॉमन टेस्ट होगा। जिसमें प्राप्त अंकों के आधार पर छात्र, देश...