हाइपरसोनिक मिसाइलों के उपयोग से कितना है फायदा
रूस और युक्रेन के बीच गहराता संकट कम होने के बजाय अब ओर बढ़ता जा रहा है, रोजाना ही ये युद्ध, विश्व युद्ध के करीब पहुंच रहा है। वहीं ऐसा ये पहली बार हो रहा है जब रूस किसी युद्ध में इन मिसाइलों का उपयोग करने की धमकी दे रहा है, जिसे किंज़ल बैलेस्टिक मिसाइल के नाम से जाना जाता है। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन बार-बार हाइपरसोनिक मिसाइलों पर रूस के दांव का ज़िक्र करते रहे हैं, जिनकी रफ़्तार ध्वनि की गति से भी पांच गुना तेज़ है। ये रॉकेट 8 मीटर लंबे हैं और उच्च गतिशीलता से लैस हैं।
लेकिन सवाल यह है कि क्या इन हाइपरसोनिक मिसाइलों के इस्तेमाल से रूस को कितना फायदा होगा भी, जिसके दम पर वह बार-बार युद्ध की धमकी देता है।राष्ट्रपति पुतिन ने पिछले दिसंबर में दावा किया था कि रूस हाइपरसोनिक मिसाइलों में वर्ल्ड लीडर है, उसके पास ऐसे मिसाइल हैं जिन्हें ट्रैक करना मुश्किल है, क्योंकि वे उड़ान के बीच में दिशा बदल सकते हैं। सटीक निशाना लगाने और दुश्मन की नज़र से छिपने के लिए हवा में अपनी चाल नियंत्रित करना मिसाइल के लिए ज़रूरी होता है और ये सब आधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल करने में सक्षम हैं। इनका आकार ख़ास तरीक़े से डिज़ाइन किया जाता है ताकि ये वायुमंडल में बेहद तेज़ गति से जाते हुए भी नीचे-ऊपर या फिर दाएं-बाएं मुड़ सकें।
युद्ध के समय अपने देश की रक्षा के लिए रूस के राष्ट्रपति का यह एक बहुत बड़ा, सरहाना और सोचा समझा क़दम है क्योंकि अगर हाइपरसोनिक मिसाइलों का प्रयोग किया जाता है, तो हमें उन्हें एक अलग संसाधन के रूप में देखना चाहिए।
चार साल पहले पुतिन ने किंज़ल को "अजेय" हथियारों की एक शृंखला के रूप में पेश किया था, जो दुश्मनों को रक्षा कवच से भेदने में सक्षम है। अन्य हाइपरसोनिक मिसाइलें ज़िरकोन और अवांगार्ड, जो रूस के पास हैं, वह भी तेज़ और बहुत अधिक रेंज के साथ आती हैं औल किंज़ल या तो एक पारंपरिक या परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। हालही में, मिग-31 लड़ाकू विमानों को कैलिनिनग्राद भी भेजा गया था।
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने भी माना है कि रूस ने युद्ध के पहले 20 दिनों के दौरान अपनी लगभग सभी इस्कंदर-एम मिसाइलों का इस्तेमाल कर लिया है एवं 24 फरवरी से अब तक 1,080 से अधिक मिसाइलें दागी गई हैं।
हालांकि बीते तीन सप्ताह से यूक्रेन की सेना ने रूसी बलों को मारियुपोल शहर पर पूरी तरह क़ब्ज़ा करने से रोका हुआ है।
रूस ने मारियुपोल को तोपखानों, रॉकेट और मिसाइलों से भर दिया है। 90 फ़ीसदी शहर बर्बाद हो चुका है। इतना ही नहीं यहां बिजली, ताज़ा पानी, खाना और स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतों की आपूर्ति भी ठप कर दी गई है, जिसे मानवीय आपदा माना जा रहा है। रूस ने अब इसके लिए यूक्रेन पर आरोप लगाया है।
रूस का कहना है कि यूक्रेन समर्पण कर दे, लेकिन यूक्रेन ने ऐसा करने से इनकार कर दिया है लेकिन रूस मारियुपोल पर क़ब्ज़ा कर लेता है तो इसका युद्ध में शामिल दोनों देशों के मनोबल पर बड़ा असर पड़ेगा। यूक्रेनियों के लिए, मारियुपोल का उनके हाथ से जाना बहुत बड़ा झटका होगा। इसका सैन्य और अर्थव्यवस्था से जुड़ा असर तो होगा ही, बल्कि उन पुरुषों और महिलाओं का भी हौसला टूटेगा, जो लंबे समय से इसकी रक्षा के लिए ज़मीन पर संघर्षरत हैं।
खेरसोन के बाद मारियुपोल पहला बड़ा यूक्रेनी शहर होगा, जिस पर रूस का क़ब्ज़ा होगा। मनोबल का यहां एक और पहलू है और वो ये कि यूक्रेन यहां किस हद तक रूस का सामना कर सकेगा।
मारियुपोल में रूस की जीत के बाद अवश्य ही रूस अपने लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ जाएगा है।
परन्तु यह गौर करने की बात है कि, इतनी मिसाइलों का उपयोग चौंका देने वाली संख्या है और यह इस बात का सबूत है कि रूस युद्ध को लेकर कितने बड़े पैमाने पर तैयार था क्योंकि इन मिसाइलों की संख्या वाक़ई, वॉर-स्टॉक का बड़ा हिस्सा है लेकिन रूसी हवाई हमलों में अनगाइडेड बमों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण ये काफ़ी हद तक संभव है कि उनके पास अब तो इसकी कमी हो रही होगी पर इसके बावजूद भी रूस पीछे हटने को तैयार नहीं है। ये युद्ध आने वाले समय में कहां तबाही करेगा और कब तक चलेगा यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि इस युद्ध ने कई लोगों से उनके घर छिन लिये, लोगों को खाने-रहने और जीने के लिए रोजाना संर्घष करने के लिए विवश कर दिया।
- निधि जैन