तख्तापलट का काउंटडाउन शुरू हुआ
देखते ही देखते सियासी पिच पर क्लीन बोल्ड होने जा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान। कयास यही लग रहें हैं कि अब उनकी पीएम की गद्दी से उल्टी गिनती शुरू हो गई है।
इमरान खान 179 सांसदों की बहुमत से सरकार चला रहे थे, लेकिन अब उनके ही लगभग 24 सांसद आसिफ अली ज़रदारी की पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के इशारे पर प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ़ वोट करने का एलान कर चुके हैं। इसी के साथ 5 अन्य सांसद ऐसे हैं जो मौलाना फज़ल-उर-रहमान के साथ हैं।अब धीरे-धीरे
इमरान खान के खिलाफ विपक्षी मोर्चा एकजुट हो रहा है। अविश्वास प्रस्वास पर जल्द से जल्द वोटिंग की मांग की जा रही है। इस बात का पता तो अब 28 मार्च को ही लगेगा कि इमरान, अविश्वास प्रस्ताव का सामना करते हैं या फिर बीच का रास्ता अपनाते हुए इस्तीफा देकर किसी और को प्रधानमंत्री बनाते हैं।
बहरहाल पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने ओ आई सी कॉन्फ्रेंस के बाद इमरान खान को पद से इस्तीफा देने के लिए कह दिया है। जिसके बाद इमरान के पास और कोई रास्ता नहीं बचा है।
24 सांसदों के बगावती तेवर के साथ इमरान नंबर गेम में पीछे छूट गए हैं। वहीं, बागी सांसदों पर सुप्रीम कोर्ट से भी खान को मुंह की खानी पड़ी और सबसे बड़ी अदालत ने संसद का रास्ता दिखा दिया है।
आरम्भ में इमरान सरकार को सत्ता में 176 सांसदों का समर्थन हासिल था, लेकिन 24 सांसदों के बागी होने के बाद अब उनके साथ केवल 152 सांसद ही खड़े हैं यानी 342 सदस्यीय नेशनल असेंबली में इमरान खान बहुमत के 172 के आंकड़े से काफी पीछे हैं।
वैसे भी पाकिस्तान में ये किसी से छिपा नहीं है कि वहां पर गद्दी पर कोई तब तक ही टिक सकता है जब तक वहां की सेना चाहें और न चाहतें हुए भी अब इमरान खान को अपने ही देश की सेना का साथ नहीं मिल रहा है। जनरल बावजा और सेना के तीन सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल की बैठक में इमरान की सियासी किस्मत पर फैसला लिया जा चुका है। सभी का यही मानना है कि इमरान को और समय देना सही नहीं होगा।
हालांकि अपनी पैरवी करने के लिए खुद इमरान पूर्व आर्मी चीफ राहिल शरीफ जनरल बावजा से मिले थे, लेकिन अब साफ नजर आ रहा है कि इस पैरवी का कोई असर नहीं हुआ।
इमरान खान की सरकार अविश्वास के भंवर में बुरी तरह घिर चुकी है। विपक्ष सालों से इमरान को गद्दी से हटाने की मुहिम चलाता रहा, परन्तु अब पहली बार उसे कामयाबी मिलती दिख रही है, क्योंकि इमरान खेमे के करीब दो दर्जन सांसद भी उनसे मुंह मोड़ चुके हैं।
विपक्ष के पाले में अब अनुमान अनुसार 200 से ज्यादा सांसद हैं और यही वजह है कि इमरान फ्लोर टेस्ट से बच रहे हैं और विपक्ष पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए अपनी उपलब्धियां गिनाने में लगे हैं। यही नहीं, इमरान अपने बयानों में एक तरफ इमोशनल कार्ड खेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हर वो हथकंडा अपना रहे हैं जिससे सरकार बच सके लेकिन उनके सारे वार अब खाली जा रहें है लेकिन इमरान सरकार लगातार प्रयास किए जा रही है ताकि सत्ता पर काबिज रह सकें। इमरान सरकार अब ऑटिक्ल 63-A की व्य़ाख्या के लिए सुप्रीम कोर्ट तक चली गई है। इमरान खान जानना चाहते है कि बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की कार्रवाई किस हद तक हो सकती है। उनका मानना है कि पार्टी के खिलाफ वोट करने वालों के वोट ना गिने जाएं।
इस बीच, 28 मार्च को फ्लोर टेस्ट से एक दिन पहले इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ ने अपने 10 लाख समर्थकों को इस्लामाबाद बुलाया है। संदेश साफ है कि बागी सांसदों को पार्टी समर्थकों के गुस्से का भी सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि सियासी संकट और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर मंडरा रहे खतरे के बीच पाक पीएम इमरान खान ने भारत की भी जमकर तारीफ की है। उन्होंने विरोध करने वाले पार्टी के सांसदों से कहा कि मैं कह रहा हूं कि माफ कर दूंगा, वापस आ जाएं। मैं हिंदुस्तान की तारीफ करता हूं। हिंदुस्तान ने हमेशा आजाद विदेश नीति रखी है। हिंदुस्तान अमेरिका का सहयोगी है और खुद को न्यूट्रल कहता है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत रूस से तेल मंगवा रहा है, जबकि प्रतिबंध लगे हुए हैं क्योंकि भारत की विदेशी नीति लोगों की बेहतरी के लिए है।
वहीं इमरान खान ने ये भी कहा कि पाकिस्तान के लोगों के लिए हम नमाज और अजान में सिर्फ एक ही चीज मांगते हैं। हमारे सामने दो रास्ते हैं। एक तरफ पाकिस्तान के बड़े-बड़े डाकू इकट्ठे हो गए हैं और दूसरी तरफ वो लोग हैं, जिसने 25 साल तक इन डाकुओं के खिलाफ जद्दोजहद की है। मुल्क के पास अब फैसला करने का वक्त आ गया है। वो हमें एक मौका दें हम उनका विश्वास नहीं तोड़ेगे।
इमरान की तमाम कोशिशों के बावजूद भी, अब यही नजर आ रहा है कि इमरान खान का खेल खत्म हो गया है। केवल वह अब उस मुकाबले का आखिरी ओवर में खेल रहे हैं, जिसे जीत पाना नामुमकिन है।
- निधि जैन