राष्ट्रहित सर्वोपरि- राष्ट्रवाद सर्वोपरि
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में बुरी तरह कांग्रेस की पराजित होने के बाद भी गांधी परिवार विक्टिम कार्ड का सहारा लेकर कांग्रेस को अपने कब्जे में बनाए रखना चाहता है और इस नीजी मानसिकता का प्रमाण यह है कि चुनाव वाले राज्यों के कांग्रेस अध्यक्षों से तो इस्तीफा देने को कह दिया गया है लेकिन गांधी परिवार अपनी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है और वो भी तब, जब सारे फैसले उन्हीं की ओर से लिए जा रहें हैं।
यह भी एक विडंबना है कि पांच राज्यों में शर्मनाक हार के कारणों की समीक्षा की मांग करने वाले कांग्रेस नेता यह कहने का साहस भी नहीं जुटा पा रहे है कि इस हार के लिए गांधी परिवार जिम्मेदार है और वह अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते।गौरतलब है कि गांधी परिवार द्वारा कांग्रेस पार्टी के संचालन के तौर-तरीकों से असहमत नेताओं द्वारा बनाए गए जी-23 समूह के नेताओं में से केवल कपिल सिब्बल को छोड़कर अन्य किसी नेता ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में आस्था जताना बेहतर नहीं समझा है।
हालांकि इस समूह के नेताओं ने अभी तक आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई जवाब नहीं दिया है परन्तु अटकले ये ही कह रही है कि जी-23 के नेता व अन्य कुछ कांग्रेस समर्थन दल के लोगों का मानना है कि अब गांधी परिवार को, किसी अन्य पार्टी की कांग्रेस की कमान सौंप देनी चाहिए। जी-23 समूह के नेता व अन्य कांग्रेसजन हकीकत में पार्टी को बचाने के लिए गंभीर हैं तो उन्हें न केवल साहस दिखाना होगा, बल्कि गांधी परिवार को आईना भी दिखाना होगा और अगर वह साहस नहीं दिखाएगे तो आने वाले समय में अवश्य ही इस पार्टी का कोई भविष्य नहीं रह जाएगा।
बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई बार परिवारवाद और राजनीति को भिन्न रखने की सलाह दी है और ये बात उन्होंने हालिया में हुए विधानसभा चुनावों में साफ भी कर दी है क्योंकि पार्टी के जिन सांसदों के बेटों-बेटी को टिकट नहीं दिए गए है, वे उनके ही कहने पर नहीं दिए गए है। इस बात से ये स्पष्ट है कि उन्होंने भाजपा के उन नेताओं को सख्त संदेश दिया है, जो अपने बेटे-बेटियों को राजनीति में लाना चाह रहे हैं। उनके इस कथन से यह भी तय है कि वह परिवारवाद की राजनीति को पोषित कर रहे राजनीतिक दलों को आगे भी घेरते रहेंगे।
कायदे से ऐसे दलों को सतर्क हो जाना चाहिए, लेकिन इसके आसार कम ही हैं, क्योंकि एक समय जो दल कांग्रेस की परिवारवाद की राजनीति को कोसा करते थे, वे आज उसी की राह पर चल रहे हैं। वे यह देखने को तैयार नहीं कि परिवारवाद की राजनीति ने कांग्रेस को किस तरह पतन की राह पर धकेल दिया है।
असल में तो हर इंसान के दिल में परिवारवाद, वंशवाद, जातिवाद, धर्मवाद, दलितवाद पर हावी सिर्फ और सिर्फ राष्ट्रवाद को होना चाहिए। "राष्ट्रहित सर्वोपरि- राष्ट्रवाद सर्वोपरि"
- निधि जैन