सर्वोच्च अदालत के आदेश के बावजूद भी ऑपरेशन बुलडोज़र पर रोक नहीं लगीं, क्यों?

-By Nidhi Jain 

हाल ही में हनुमान जयंती शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा से, दिल्ली का जहांगीरपुरी इलाका सुर्खियों में आ गया है। शोभायात्रा के दौरान हुई हिंसा पर तो सियासत आरम्भ हो ही गई थी लेकिन इसे तूल ओर जब मिला जब जहांगीरपुरी में बुधवार सुबह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। बुधवार सुबह से ही जहांगीरपुरी में माहौल पहले से कहीं ज़्यादा तनावपूर्ण दिख रहा था। पिछली शाम से ही खबर आ रही थी कि एमसीडी ने दिल्ली पुलिस से क़रीब 400 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की मांग की है। जिसका कारण, सरकारी ज़मीन से अतिक्रमण हटाने का बताया गया था। जिसमें ज़ाहिर से, बुलडोज़र का प्रयोग होना था। जो आजकल ख़ासा चर्चा में है। सुबह दस बजे के आसपास ही, पुलिस की निगरानी में बुलडोज़र ने आकर अवैध सम्पत्तियों को हटाने शुरू कर दिए थे। हालांकि गैरकानूनी एवं असंवैधानिक घरों, दुकानों पर काफी लंबे समय से योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बुलड़ोजर चल रहें थे लेकिन जहांगीरपुरी इलाका इसलिए सुर्खियों में आया क्योंकि यह वहीं इलाका था जहां शनिवार को एक धार्मिक जुलूस निकलते वक़्त हिंसा भड़की थी। पिछले दो दिनों से वहां कर्फ़्यू जैसा माहौल था। मकान ड़हाते ही सियासत इसलिए शुरू हो गई क्योंकि चंद लोगों का कहना था कि बुलड़ोजर केवल मुसलमानों के मकानों और दुकानों एवं मस्जिद में दाखिल होने वाले 'रास्ते' पर ही चलाया जा रहा है और तो और जगह खाली करने की जानकारी व कोई लीगल नोटिस उन्हें नहीं दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि, कोई दंगाइयों को संरक्षण देने का आरोप लगा रहा है तो कोई बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को बसाने का आरोप लगा रहा है तो वहीं बीजेपी ने आम आदमी पार्टी पर दंगा करने वालों का साथ देने का आरोप लगाया है। जिसके जवाब में आम आदमी पार्टी ने बीजेपी के दफ़्तर पर बुल्डोज़र चलाने की बात कही है।
दंगे के बाद से ही इलाके में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी मौजूद थे, लेकिन बुधवार सुबह उनकी संख्या और बढ़ गई। जिसके बाद धीरे-धीरे इस क्षेत्र में बुलडोज़र पहुंचना शुरू हो गए। हालांकि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू करने से पहले दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) दीपेंद्र पाठक ने पूरे इलाके का जायज़ा भी लिया था परन्तु जहां एक ओर जहांगीरपुरी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ रही थी तो वहीं लगभग 11 बजकर 10 मिनट के आसपास चीफ़ जस्टिस एनवी रमन्ना की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने जहांगीरपुरी में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए बुलडोज़र की कार्रवाई पर स्टे दे दिया और यह आदेश पारित होते ही पुलिस विभाग समेत तमाम अन्य महकमों के पास आदेश पहुंच गया था लेकिन इसके बावजूद भी कार्रवाई चलती रही और ये कार्रवाई तब तक चलती रही जब तक सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने दोबारा कोर्ट के समक्ष इस मामले का ज़िक्र नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद, कयास लग रहें थे कि अब तत्काल प्रभाव से बुलडोज़र आगे बढ़ने बंद हो जाएंगे लेकिन वास्तविक में ऐसा हुआ नहीं और एमसीडी की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रहीं एवं बुलडोज़र से तोड़-फोड़ जारी रहा। तोड़-फोड़ से कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
गौरतलब है कि, मौके पर मौजूद अधिकारी ये हवाला दे रहे थे कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश उनके पास अब तक नहीं पहुंचा है लेकिन ये बात आज के ज़माने में अजीब लगती है क्योंकि जहां तकनीक के दम पर एक मिनट में सूचना पहुंच जाती है। ऐसे में ये अहम जानकारी उनके पास नहीं पहुंची। जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से यह ख़बर टीवी से लेकर मोबाइल फोन आदि पर जारी हो चुकी थी और बहुत तेजी से वायरल हो रही थी।
घंटो चली कार्रवाई के बाद दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त दीपेंद्र पाठक ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जहांगीरपुरी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को रोक दिया गया है पर सवाल यह है कि सर्वोच्च अदालत की ओर से आदेश आने के बावजूद भी उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को तत्काल क्यों नहीं रोका?
आख़िर क्यों उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों ने आदेश को पढ़ने पर जोर नहीं दिया? क्या वजह थी जिसके चलते अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं रुकी?

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