वैक्सीन की बर्बादी

 कोरोना काल में जहां लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं कई राज्यों की भी शिकायत है कि टीकाकरण अभियान में उन्हें लोगों को लगाने के लिए वैक्सीन नहीं मिल पा रही है। हालांकि अब यह भी खबर आ रही हैं कि कुछ राज्यों में वैक्सीन की बर्बादी बदस्तूर जारी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वैक्सीन की बर्बादी में झारखंड सबसे ऊपर है, जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय का स्पष्ट निर्देश है कि वैक्सीन की बर्बादी को एक प्रतिशत से कम रखना है। कई राज्यों में जहां वैक्सीन अभी तक समूचे लोगों को लगी ही नहीं है ऐसे समय में वैक्सीन की इतने बड़े पैमाने पर बर्बादी बड़ी चिंता का कारण है। जिन राज्यों में टीके की बड़े पैमाने पर बर्बादी हो रही है, जाहिर है वहां टीकाकरण कार्यक्रम को ठीक से नहीं चला पा रहे है। दस लोगों का डोज है और केवल छह पहुंचते हैं तो बाकी चार डोज बर्बाद हो जाते हैं। दूसरा प्रमुख कारण टीका लगाने वालों का पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित न हो पाना भी है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी ओर से विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। बहरहाल किसी भी बड़े टीकाकरण अभियान में वैक्सीन की बर्बादी की बात का ध्यान रखा जाता है और इसी के हिसाब से वैक्सीन की खरीद और वितरण किया जाता है। इसलिए ऐसी संकट की घड़ी में जहां रोजाना कई लोग अपनी जान गवां रहे हैं ऐसे में राज्यों को यह ध्यान रखना होगा कि टीकाकरण कार्यक्रम में इस तरह की लापरवाही न हो व हर बर्बाद खुराक का मतलब है कि किसी दूसरे व्यक्ति को टीका न मिलना, ऐसे समय जब देश टीकों की पर्याप्त सप्लाई न होने के कारण कमी से जूझ रहा हो, टीकों की यह बर्बादी अक्षम्य है।

- निधि जैन

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वर्ष 2020 की यादें

जम घोटू में सांस लेने के लिए मजबूर

कोरोना से भी बड़ा खतरा है मेंटल हेल्थ, क्या कहती है डब्लूएचओ की रिपोर्ट ?