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पहले लादेन फिर जवाहिरी अब अगला Al-Qaeda का चीफ कौन ..?

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-निधि जैन Al-Qaeda Next Chief : अमेरिका द्वारा की गई एयर स्ट्राइक में अल-कायदा का सरगना अयमान अल जवाहिरी मर गया है. जिसकी पुष्टि खुद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने की है. उन्होंने बताया कि मेरे निर्देश के बाद ही शनिवार को, अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) ने अफगानिस्तान के काबुल में सफलतापूर्वक ड्रोन स्ट्राइक की. ओसामा, जवाहिरी ने रची थी 9/11 हमले की साजिश जवाहिरी (Al Zawahiri) की मौत के बाद अब बड़ा सवाल ये उठ रहा हैं कि अब अगला Al-Qaeda का चीफ कौन होगा ..? बता दें कि ओसामा बिन-लादेन (Osama Bin Laden) के मारे जाने के बाद मोस्ट वॉन्टेड आतंकी जवाहिरी को अल-कायदा का सरगना बनाया गया था. ओसामा बिन-लादेन को ‘यूएस नेवी सील्स’ ने 2 मई 2011 को पाकिस्तान के एबटाबाद में एक अभियान में मार गिराया था. गौरतलब है कि ओसामा और जवाहिरी दोनों ने मिलकर अमेरिका में 9/11 के हमलों की साजिश रची थी. जिसके बाद से ही अमेरिका उन दोनों को मारने के लिए तमाम कोशिश कर रहा था, लेकिन हर बार ये बच निकलते थे. 78 करोड़ का इनामी बन सकता हैं अल-कायदा का अगला चीफ जवाहिरी की हत...

रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर, क्या होगा इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर

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-निधि जैन भारतीय रुपये की हालत कई दिनों से बेहद खराब हो गई है. बता दें कि रूपया, डॉलर के मुकाबले 80.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि रूपये गिरने से हम पर यानी आम जनता पर इसका क्या असर होगा.? अमेरिका के मुकाबले 7 पैसे गिरा रूपया अमेरिकी डॉलर, इस वर्ष अब तक भारतीय रुपये के मुकाबले 7.5% ऊपर है यानी भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 80.05 पर आ गया है. डॉलर इंडेक्स, सोमवार को एक सप्ताह के निचले स्तर पर फिसलकर 107.338 पर पहुंच गया. हालांकि पिछले हफ्ते डॉलर इंडेक्स बढ़कर 109.2 हो गया था, जो कि सितंबर 2022 के बाद सबसे अधिक है. रुपया गिरने का क्या है मतलब विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिका मुद्रा (डॉलर) के मुकाबले रुपये में गिरावट का मतलब है, कि ‘भारतीय करंसी कमजोर हो रही है’. जिस वजह से अब हमें अमेरिका से या फिर किसी भी देश से आयात में चुकाने वाली राशि अधिक देनी होगी, क्योंकि विदेशों में भुगतान रुपये में नहीं, बल्कि डॉलर में किया जाता है. जिस कारण अब हमें अधिक पैसे खर्च करने होंगे. विदेशी निवेशक क्...

ऑटोरिक्शा चलाने वाले व्यक्ति ने मचाया महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल

रातोंरात शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे, 35 विधायकों को लेकर गुजरात के शहर सूरत पहुंच गए, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है और अब तो इसमें बगावती नेताओं की संख्या भी बढ़ती जा रहीं है। एकनाथ शिंदे ठाणे की कोपरी-पचपाखड़ी सीट से विधायक के साथ-साथ कई दशकों तक पार्टी के अहम नेता भी रहे हैं तो वहीं उनके बेटे श्रीकांत शिंदे कल्याण लोकसभा क्षेत्र से दूसरी बार सांसद चुने गए हैं। एकनाथ शिंदे कई सालों से शिवसेना के सदस्य रहे हैं व ठाणे नगर निगम में विपक्ष के नेता के रूप में काम करने के बाद वर्ष 2004 में वह, पहली बार विधायक बने थे। हालांकि उनके करियर की शुरुआत एक ऑटोरिक्शा चालक के रूप में हुई थी एवं उन्होंने 18 साल की उम्र में शिवसेना से अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया। पार्टी में क़रीब डेढ़ दशक तक काम करने के बाद 1997 में आनंद दिघे ने शिंदे को, ठाणे नगर निगम के चुनाव में पार्षद का टिकट दिया, पहली ही कोशिश में शिंदे ने न केवल नगर निगम का चुनाव जीता, बल्कि वे ठाणे नगर निगम के हाउस लीडर भी बन गए। उसके बाद उन्होंने साल 2004 में ठाणे विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और यहां...

अग्निपथ योजना युवाओं के हित में है या नहीं

भारतीय सेना में नौसिखिए जवानों की संख्या से वृद्धि हो जाएगी, सशस्त्र बलों की सदियों पुरानी रेजिमेंटल संरचना बाधित हो सकती है, हर वर्ष लगभग 40 हजार युवा बेरोज़गार होंगे व योजना में भर्ती होने वाले लोगों का भविष्य क्या होगा आदि-आदि ऐसे कई ओर सवाल देश की आने वाली पीढ़ी के अंदर चल रहें है। जिसके कारण वह देश के अलग-अलग राज्यों में पथराव, रेल में आग लगाकर, सड़को पर रैली व आगजनी करके इस नई योजना का विरोध कर रहें है। पिछले कुछ सालों से, सेना में भर्तियां रुकी हुई थीं जिसे लेकर देश के युवा, जिनके लिए सेना में भर्ती, जीवन का सबसे बड़ा सपना व नौकरी का महत्वपूर्ण ज़रिया होता है, वह सरकार से कई बार सवाल पूछ रहे थे कि जब भारतीय सेना में 97,000 पद खाली है तो, फिर भी क्यों सेना में भर्ती नहीं निकल रहीं है? जिसके बाद, बीते दिनों रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने, घोषणा की थी कि, 'अग्निपथ' नामक योजना के तहत कम समय के लिए भारतीय सेना में युवाओं की नियुक्ति होगी। योजना के मुताबिक़, भारतीय सेना में चार सालों के लिए युवाओं की भर्तियां होंगी व नौकरी के बाद उन्हें सेवा निधि पैकेज दिया जाएगा एवं उनका नाम ह...

धर्मनिरपेक्ष देश भारत क्यों?

बचपन में दी गई शिक्षा, संस्कार, सीख अवश्य ही इस गुम नाम दुनिया में आगे चलकर बच्चों के व्यक्तित्व को आकार देकर उनके भविष्य की बुनियाद बनती हैं। एकमात्र अच्छी शिक्षा ही बच्चे का भविष्य उज्जवल बनाने में कारगर साबित होती है परन्तु प्रशन यह उठता है कि इस विश्व में कितने मां-बाप ऐसे हैं जो अपने बच्चों को उनके खुशहाल बचपन से अलग करके उन्हें पुजारी, पादरी, मौलवी बनाना चाहते हैं? गौरतलब है कि अगर भारत में सभी को अपना धर्म और पूजा पद्धति चुनने की आजादी है तो फिर भी भारत को एक धर्मनिरपेक्ष देश क्यों कहां जाता हैं? सरकार के खर्चे पर बच्चों को धार्मिक शिक्षा क्यों दी चाहती हैं? हालही में असम सरकार के शिक्षा मंत्री हेमन्ता बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि अब उनके राज्य में चल रहे सभी मदरसों को और संस्कृत स्कूलों को सामान्य स्कूलों में बदल दिया जाएगा व इसके अलावा मदरसों पढ़ाने वाले शिक्षकों का भी नए स्कूलों में ट्रांसफर किया जाएगा। असम सरकार ने यह साफ कर दिया है कि सरकार के पैसों से बच्चों को कुरान नहीं पढ़ाई जा सकती और अगर सरकारी खर्चे पर कुरान को पढ़ाया जा सकता है तो फिर गीता या बाइबल क्यों नहीं पढ़ा...

निरंतर वृद्धि हो रहीं कृषि उत्पादों की मांग में

जिन भारतीय चीजों का, घर के नुस्खे का विदेशों में मजाक उड़ाया जाता था आज उसका ही समूचे विश्व में बड़े चाव से सेवन किया जा रहा हैं। वैश्विक महामारी कोविड़-19 के प्रकोप से लोग बचने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद भी यह जानलेवा बीमारी अपना विकराल रूप धारण करने में जरा सी भी कमी नहीं बरतरी हैं। शोधकर्ताओं तो हर संभव प्रयास कर ही रहे है वैक्सीन की काट खोजने में, परन्तु इसके साथ साथ सम्पूर्ण आबादी भी अपनी तरफ से तमाम उपाय अपना ही रही है अपनी जान बचाने में और इस तमाम कोशिशों में जो सबसे ज्यादा कारगर रहें वो है घरेलू नुस्खे व विदेश में भी लोग भारत के परंपरागत काढ़े को पी रहे है। जो बेशक़ गौरवान्वित बात हैं। और इसी कारण भारतीय वस्तुओं के कुल निर्यात में गिरावट के बावजूद मसाले के निर्यात में बढ़ोतरी हो रही है। स्पाइस बोर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार पता चला है कि, इस साल अप्रैल-जुलाई के दौरान मसाले के कुल निर्यात में दस फीसद की बढ़ोतरी हुई है। जबकि इस साल अप्रैल-जुलाई के बीच वस्तुओं के कुल निर्यात में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले तीस फीसद की गिरावट रही थी। इस वर्ष ...

भेदभाव का सबसे बड़ा केंद्र कहां तक फैलेगा

रेप का सिलसिला आखिर कहाँ जाकर थमेगा इस खुदगर्ज दुनिया में। बेटी किसी की भी हो, वह बेटी तो भारत माता की है ही ना तो इस पर राजनीतिक क्यों की जाती हैं। हमें अवश्य ही इन मामलों में मिलकर आवाज उठानी चाहिए ताकि यह आग कल हमारे घर तक ना पहुंचे। बहरहाल संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार पता चला है कि पूरे विश्व में करीब 35 प्रतिशत महिलाएं किसी ना किसी प्रकार की हिंसा का शिकार होती हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस सोशल मीडिया को अधिकतम दुनिया उपयोग करती हैं। उसी सोशल मीडिया पर दुनिया की करीब 60 प्रतिशत महिलाओं के साथ विभिन्न प्रकार की हिंसा होती है। जिस आंकड़े को देखकर यह तो स्पष्ट हो गया है कि असल जिंदगी में कानून के डर की वजह से महिलाओं के खिलाफ हिंसा करने वाले पुरुषों की संख्या भले ही कम हो लेकिन जैसे ही यह पुरुष सोशल मीडिया पर आते हैं, तो पूरी तरह से स्वछंद हो जाते हैं और खुलेआम महिलाओं के साथ हिंसा करने लगते हैं। भले ही यह हिंसा शारीरिक ना हो परन्तु इस ऑनलाइन हिंसा का शिकार हुई महिलाओं की मानसिक स्थिति भी शारिरिक हिंसा का शिकार होने वाली महिलाओं जैसी ही हो जाती ...