ऑटोरिक्शा चलाने वाले व्यक्ति ने मचाया महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल
रातोंरात शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे, 35 विधायकों को लेकर गुजरात के शहर सूरत पहुंच गए, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है और अब तो इसमें बगावती नेताओं की संख्या भी बढ़ती जा रहीं है।
एकनाथ शिंदे ठाणे की कोपरी-पचपाखड़ी सीट से विधायक के साथ-साथ कई दशकों तक पार्टी के अहम नेता भी रहे हैं तो वहीं उनके बेटे श्रीकांत शिंदे कल्याण लोकसभा क्षेत्र से दूसरी बार सांसद चुने गए हैं। एकनाथ शिंदे कई सालों से शिवसेना के सदस्य रहे हैं व ठाणे नगर निगम में विपक्ष के नेता के रूप में काम करने के बाद वर्ष 2004 में वह, पहली बार विधायक बने थे। हालांकि उनके करियर की शुरुआत एक ऑटोरिक्शा चालक के रूप में हुई थी एवं उन्होंने 18 साल की उम्र में शिवसेना से अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया। पार्टी में क़रीब डेढ़ दशक तक काम करने के बाद 1997 में आनंद दिघे ने शिंदे को, ठाणे नगर निगम के चुनाव में पार्षद का टिकट दिया, पहली ही कोशिश में शिंदे ने न केवल नगर निगम का चुनाव जीता, बल्कि वे ठाणे नगर निगम के हाउस लीडर भी बन गए। उसके बाद उन्होंने साल 2004 में ठाणे विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और यहां भी वह पहली ही कोशिश में जीतने में कामयाब रहे। इसके बाद 2009 से वो लगातार कोपरी-पचपाखड़ी विधानसभा क्षेत्र के विधायक चुने गए हैं तथा 2015 से 2019 तक राज्य के लोक निर्माण मंत्री भी रहे और अब वह राज्य के शहरी विकास मंत्री होने के साथ-साथ ठाणे जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं।
बहरहाल विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे का, राज्य के बाहर चले जाना और शिवसेना का उनसे संपर्क न होना वाकई कई सवालों को जन्म देता है।
हालांकि शिवसेना नेताओं का एकनाथ शिंदे के बारें में ये कहना है कि वह कई सालों से हमारे सहयोगी रहे हैं। वे बहुत ही कुशल और मेहनती नेता हैं। उन्होंने विधान परिषद चुनाव के लिए कई दिन काम भी किया है। उनके पास अहम विभागों की ज़िम्मेदारियां भी हैं। भले ही हर नेता हर दिन एकदूसरे से नहीं मिलते लेकिन एकनाथ शिंदे हमेशा नेताओं से मुलाक़ात करते रहे हैं लेकिन अब हमें ये नहीं समझ आ रहा है कि उन्हें हमसे शिकायत क्या है और इस बगावत से उन्हें क्या हासिल होगा। हालांकि शिवसेना के ख़िलाफ़ साज़िशें होती रहती हैं और ये ऐसी ही दुश्मनों की साज़िश है।
बहरहाल एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र की राजनीतिक में आक्रामक शिवसैनिक से शाखा प्रमुख और फिर ज़िम्मेदार मंत्री की भूमिका निभाई है लेकिन इसमें आगे क्या होगा ये तो आने वाले वक्त में ही पता चलेंगा।
-निधि जैन
एकनाथ शिंदे ठाणे की कोपरी-पचपाखड़ी सीट से विधायक के साथ-साथ कई दशकों तक पार्टी के अहम नेता भी रहे हैं तो वहीं उनके बेटे श्रीकांत शिंदे कल्याण लोकसभा क्षेत्र से दूसरी बार सांसद चुने गए हैं। एकनाथ शिंदे कई सालों से शिवसेना के सदस्य रहे हैं व ठाणे नगर निगम में विपक्ष के नेता के रूप में काम करने के बाद वर्ष 2004 में वह, पहली बार विधायक बने थे। हालांकि उनके करियर की शुरुआत एक ऑटोरिक्शा चालक के रूप में हुई थी एवं उन्होंने 18 साल की उम्र में शिवसेना से अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया। पार्टी में क़रीब डेढ़ दशक तक काम करने के बाद 1997 में आनंद दिघे ने शिंदे को, ठाणे नगर निगम के चुनाव में पार्षद का टिकट दिया, पहली ही कोशिश में शिंदे ने न केवल नगर निगम का चुनाव जीता, बल्कि वे ठाणे नगर निगम के हाउस लीडर भी बन गए। उसके बाद उन्होंने साल 2004 में ठाणे विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और यहां भी वह पहली ही कोशिश में जीतने में कामयाब रहे। इसके बाद 2009 से वो लगातार कोपरी-पचपाखड़ी विधानसभा क्षेत्र के विधायक चुने गए हैं तथा 2015 से 2019 तक राज्य के लोक निर्माण मंत्री भी रहे और अब वह राज्य के शहरी विकास मंत्री होने के साथ-साथ ठाणे जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं।
बहरहाल विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे का, राज्य के बाहर चले जाना और शिवसेना का उनसे संपर्क न होना वाकई कई सवालों को जन्म देता है।
हालांकि शिवसेना नेताओं का एकनाथ शिंदे के बारें में ये कहना है कि वह कई सालों से हमारे सहयोगी रहे हैं। वे बहुत ही कुशल और मेहनती नेता हैं। उन्होंने विधान परिषद चुनाव के लिए कई दिन काम भी किया है। उनके पास अहम विभागों की ज़िम्मेदारियां भी हैं। भले ही हर नेता हर दिन एकदूसरे से नहीं मिलते लेकिन एकनाथ शिंदे हमेशा नेताओं से मुलाक़ात करते रहे हैं लेकिन अब हमें ये नहीं समझ आ रहा है कि उन्हें हमसे शिकायत क्या है और इस बगावत से उन्हें क्या हासिल होगा। हालांकि शिवसेना के ख़िलाफ़ साज़िशें होती रहती हैं और ये ऐसी ही दुश्मनों की साज़िश है।
बहरहाल एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र की राजनीतिक में आक्रामक शिवसैनिक से शाखा प्रमुख और फिर ज़िम्मेदार मंत्री की भूमिका निभाई है लेकिन इसमें आगे क्या होगा ये तो आने वाले वक्त में ही पता चलेंगा।
-निधि जैन