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2021 अब क्या दिखाएगा?

यकीनन आंसुओ से लिखी जाएगी वर्ष 2020 की तहरीर क्योंकि कई घरों में इस साल हुआ है अंधेरा, कई चिराग भुजाएं है इसने। बेशक यह साल एक सुनामी की तरह रहा समूचे विश्व के लिए। जहां पर अधिकतम वक्त दुनिया में लॉकड़ाउन ही देखने को मिला। लोग घरों से बाहर निकलने के लिए बेबस हो रहे हैं, लोगों के काम-धंधे बंद पढ़े हैं, भय का माहौल ही बना रहा पूर्ण वर्ष, हर तरफ सिर्फ नकारात्मक ही नकारात्मक खबरें सुनने को मिल रही हैं, हर जगह स्ट्रेस, बेचैनी और तनाव का ही माहौल देखने को मिला। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से तो लोग ज्यादातर मेंटली डिस्टर्ब हीं नजर आए, वर्क फ्रॉम होम से तो लोग भयावह ही हो चुके हैं, जिससे आगे की जिंदगी पर तो एक प्रश्न चिन्ह लग चुका हैं। अपनों की फिक्र अब पहले से भी ज्यादा होने लगी है, डर बढ़ता जा रहा है, अब आगे आने वाले साल में क्या होगा? अब आगे का वक्त कैसे-कैसे दिन दिखाएगा? बस यही सवाल बाकी है। अभी तक कोरोना वायरस महामारी के कारण विश्व में हाहकार मचा हुआ है। जिसमें हर व्यक्ति यही चाहता है कि जल्द से जल्द यह साल बीत जाए ताकि नया साल आए तो लोग कुछ सूकून की सांस ले सके लेकिन चिंता पूर्ण विषय ...

आत्महत्या या साजीशे मर्डर?

जिंदगी से तो हर किसी को शिकवे होते हैं परंतु आत्महत्या। यह नहीं है एकमात्र द्वार। मुसीबतें तो हर किसी की जिंदगी में आती है लेकिन अपने आप को पहचान कर ही तो नई दास्तान लिखी जाती हैं। यद्यपि अत्यंत परेशानी है, तो जिंदगी जीने का हुनर उन लोगों से सीख लेना चाहिए जिनके पास यह रंगीन कारवां देखने के लिए आंखें भी नहीं होती। बॉलीवुड इंडस्ट्री के एक ऐसे कलाकार जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन से छोटे पर्दे पर ही नहीं बल्कि बड़े पर्दे पर भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया। 'किस देश में है मेरा दिल' नाम के शो से अपने करियर की शुरुआत करने वाले बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने कुछ महीने पेर्व अपने बांद्रा स्थित घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी जो हकीकत में आत्महत्या थी ही या नहीं इसका हुलासा अभी तक नहीं हुआ हैं। जिसकी अभी उम्मीद भी नहीं दिखाई दे रही है क्योंकि यह जो मामला सुशांत की मौत की गुत्थी से शुरू हुआ था वो धीरे-धीरे भाई-भतीजाबाद, मर्डर थ्योरी से होता हुआ बॉलीवुड ड्रग्स पर जा अटका है। सुशांत की मौत पर होने वाली एफआईआर ड्रग्स की जाँच के चक्कर में असली मुद्दे को तो दरकिनार कर दिया गया हैं। सीब...

इसमें कोई दोहराय नहीं है कि चीन हमेशा से फेक न्यूज़ दर्शाता है, जिसका कई बार पर्दाफाश भी हुआ हैं व पिछले कुछ दिनों से लद्दाख के बारे में चीन एक फेक न्यूज़ फैला रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि चीन ने लद्दाख में भारतीय सेना के खिलाफ माइक्रोवव हथियारों का उपयोग किया है एंव यह खबर कई अंतरराष्ट्रीय अखबारों ने भी रिपोर्ट की है। इस खबर को ऐसे दिखाया जा रहा है कि यह सच्ची खबर है परन्तु वास्तविक में ऐसा नहीं है, यह खबर फेक हैं। खबर यह है कि चीन के एक प्रोफेसर ने दावा किया है कि इसी वर्ष 29 अगस्त को लद्दाख की पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर चीन की सेना ने माइक्रोवेव हथियारों का प्रयोग किया है और इस फेंक न्यूज़ के मुताबिक, चीन की सेना ने पैंगोंग झील के पास पहाड़ की चोटियों को माइक्रोवेव ओवन में बदल दिया। जिससे वहां पर मौजूद भारतीय सैनिकों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया गया और अब वहां की चोटियों पर चीन का कब्जा है लेकिन यह खबर पूरी तरह से गलत है। हकीकत तो यह है कि 29 अगस्त 2020 की रात को भारतीय सेना ने पैंगोंग झील के दक्षिणी हिस्से में कई ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था और तब भारतीय सैनिक इस जगह पर चीन के मुकाबले बेहतर स्थिति में थे। बहरहाल चीन के सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा पर असली युद्ध जीत नहीं पाए और चीन की सरकार ने अब तक यह भी नहीं बताया है कि गलवान घाटी के संघर्ष में उसके कितने सैनिक मारे गए थे परन्तु अब चीन की सरकार, सूचना युद्ध का सहारा लेकर फेक न्यूज़ फैला रही है। जो अवश्य ही आपत्तिजनक हैं। गौरतलब है कि भारत की सरकार और भारतीय सेना ने भी माइक्रोलेव हथियारों से चीन की सेना के हमले की खबर को फेंक न्यूज़ बताया है और लद्दाख में हथियारों का इस्तेमाल करने की खबर चीन का वो प्रॉपेगेंडा है, जिसकी मदद से वो भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि उसकी यह कोशिश कुछ हद तक सफल हो गई है क्योंकि, अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नकल करने वाले कुछ भारतीय संस्थानों ने इस खबर को अपनी हेडलाइन बना लिया और ऐसा करके वो चीन के इस प्रॉपेगेंडा का हिस्सा बन गए। तथा यह माइक्रोवेव हथियार उसी प्रकार से हमला करते हैं जैसे किसी के घर में मौजूद माइक्रोवेव ओवन काम करता है। जब माइक्रोवेव ओवन में खाना पकाते हैं तो उसमें एक प्रकार का इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेडिएशन उत्पन्न होता है, जो उस ओवन में मौजूद खाद्य पदार्थों का तापमान बढ़ा देता है और फिर कुछ ही मिनटों में खाना तैयार हो जाता है, तो ठीक इसी तरह जब माइक्रोवेव हथियार से किसी व्यक्ति पर हमला किया जाता है, तो यह उस व्यक्ति के शरीर की त्वचा यानी चमड़ी के नीचे मौजूद पानी का तापमान बढ़ा देता है, जिससे उसे असहनीय दर्द होता है। ओवन में खाना भी इसी प्रकार से तैयार होता है, जिसमें किसी खाद्य पदार्थ की सतह बहुत ज्यादा गर्म नहीं होती लेकिन अंदर में ज्यादा गर्मी होती है व जिस व्यक्ति पर इस माइक्रोवेव हथियार का इस्तेमाल किया जाता है उसके लिए उस दर्द को बर्दाश्त करना असहनीय हो जाता है एंव अमेरिका ने ऐसे ही एक हथियार को अफगानिस्तान में तैनात किया था। वर्ष 2014 में चीन ने अपने माइक्रोवेव हथियार को दुनिया के सामने रखा था।हालांकि लद्दाख में ऐसे किसी माइक्रोवेव हथियार से भारत के सैनिकों पर हमला नहीं किया गया है लेकिन असली मोर्चे पर लड़ने के बदले चीन की सेना आभासी दुनिया में फेक न्यूज़ वाला युद्ध कर रही है ताकि दुनिया में उसे भी एक सुपर पावर माना जाए। -निधि जैन

इसमें कोई दोहराय नहीं है कि चीन हमेशा से फेक न्यूज़ दर्शाता है, जिसका कई बार पर्दाफाश भी हुआ हैं व पिछले कुछ दिनों से लद्दाख के बारे में चीन एक फेक न्यूज़ फैला रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि चीन ने लद्दाख में भारतीय सेना के खिलाफ माइक्रोवव हथियारों का उपयोग किया है एंव यह खबर कई अंतरराष्ट्रीय अखबारों ने भी रिपोर्ट की है। इस खबर को ऐसे दिखाया जा रहा है कि यह सच्ची खबर है परन्तु वास्तविक में ऐसा नहीं है, यह खबर फेक हैं। खबर यह है कि चीन के एक प्रोफेसर ने दावा किया है कि इसी वर्ष 29 अगस्त को लद्दाख की पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर चीन की सेना ने माइक्रोवेव हथियारों का प्रयोग किया है और इस फेंक न्यूज़ के मुताबिक, चीन की सेना ने पैंगोंग झील के पास पहाड़ की चोटियों को माइक्रोवेव ओवन में बदल दिया। जिससे वहां पर मौजूद भारतीय सैनिकों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया गया और अब वहां की चोटियों पर चीन का कब्जा है लेकिन यह खबर पूरी तरह से गलत है। हकीकत तो यह है कि 29 अगस्त 2020 की रात को भारतीय सेना ने पैंगोंग झील के दक्षिणी हिस्से में कई ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था और तब भारत...

इसमें कोई दोहराय नहीं है कि चीन हमेशा से फेक न्यूज़ दर्शाता है, जिसका कई बार पर्दाफाश भी हुआ हैं व पिछले कुछ दिनों से लद्दाख के बारे में चीन एक फेक न्यूज़ फैला रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि चीन ने लद्दाख में भारतीय सेना के खिलाफ माइक्रोवव हथियारों का उपयोग किया है एंव यह खबर कई अंतरराष्ट्रीय अखबारों ने भी रिपोर्ट की है। इस खबर को ऐसे दिखाया जा रहा है कि यह सच्ची खबर है परन्तु वास्तविक में ऐसा नहीं है, यह खबर फेक हैं। खबर यह है कि चीन के एक प्रोफेसर ने दावा किया है कि इसी वर्ष 29 अगस्त को लद्दाख की पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर चीन की सेना ने माइक्रोवेव हथियारों का प्रयोग किया है और इस फेंक न्यूज़ के मुताबिक, चीन की सेना ने पैंगोंग झील के पास पहाड़ की चोटियों को माइक्रोवेव ओवन में बदल दिया। जिससे वहां पर मौजूद भारतीय सैनिकों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया गया और अब वहां की चोटियों पर चीन का कब्जा है लेकिन यह खबर पूरी तरह से गलत है। हकीकत तो यह है कि 29 अगस्त 2020 की रात को भारतीय सेना ने पैंगोंग झील के दक्षिणी हिस्से में कई ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था और तब भारतीय सैनिक इस जगह पर चीन के मुकाबले बेहतर स्थिति में थे। बहरहाल चीन के सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा पर असली युद्ध जीत नहीं पाए और चीन की सरकार ने अब तक यह भी नहीं बताया है कि गलवान घाटी के संघर्ष में उसके कितने सैनिक मारे गए थे परन्तु अब चीन की सरकार, सूचना युद्ध का सहारा लेकर फेक न्यूज़ फैला रही है। जो अवश्य ही आपत्तिजनक हैं। गौरतलब है कि भारत की सरकार और भारतीय सेना ने भी माइक्रोलेव हथियारों से चीन की सेना के हमले की खबर को फेंक न्यूज़ बताया है और लद्दाख में हथियारों का इस्तेमाल करने की खबर चीन का वो प्रॉपेगेंडा है, जिसकी मदद से वो भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि उसकी यह कोशिश कुछ हद तक सफल हो गई है क्योंकि, अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नकल करने वाले कुछ भारतीय संस्थानों ने इस खबर को अपनी हेडलाइन बना लिया और ऐसा करके वो चीन के इस प्रॉपेगेंडा का हिस्सा बन गए। तथा यह माइक्रोवेव हथियार उसी प्रकार से हमला करते हैं जैसे किसी के घर में मौजूद माइक्रोवेव ओवन काम करता है। जब माइक्रोवेव ओवन में खाना पकाते हैं तो उसमें एक प्रकार का इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेडिएशन उत्पन्न होता है, जो उस ओवन में मौजूद खाद्य पदार्थों का तापमान बढ़ा देता है और फिर कुछ ही मिनटों में खाना तैयार हो जाता है, तो ठीक इसी तरह जब माइक्रोवेव हथियार से किसी व्यक्ति पर हमला किया जाता है, तो यह उस व्यक्ति के शरीर की त्वचा यानी चमड़ी के नीचे मौजूद पानी का तापमान बढ़ा देता है, जिससे उसे असहनीय दर्द होता है। ओवन में खाना भी इसी प्रकार से तैयार होता है, जिसमें किसी खाद्य पदार्थ की सतह बहुत ज्यादा गर्म नहीं होती लेकिन अंदर में ज्यादा गर्मी होती है व जिस व्यक्ति पर इस माइक्रोवेव हथियार का इस्तेमाल किया जाता है उसके लिए उस दर्द को बर्दाश्त करना असहनीय हो जाता है एंव अमेरिका ने ऐसे ही एक हथियार को अफगानिस्तान में तैनात किया था। वर्ष 2014 में चीन ने अपने माइक्रोवेव हथियार को दुनिया के सामने रखा था।हालांकि लद्दाख में ऐसे किसी माइक्रोवेव हथियार से भारत के सैनिकों पर हमला नहीं किया गया है लेकिन असली मोर्चे पर लड़ने के बदले चीन की सेना आभासी दुनिया में फेक न्यूज़ वाला युद्ध कर रही है ताकि दुनिया में उसे भी एक सुपर पावर माना जाए। -निधि जैन

इसमें कोई दोहराय नहीं है कि चीन हमेशा से फेक न्यूज़ दर्शाता है, जिसका कई बार पर्दाफाश भी हुआ हैं व पिछले कुछ दिनों से लद्दाख के बारे में चीन एक फेक न्यूज़ फैला रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि चीन ने लद्दाख में भारतीय सेना के खिलाफ माइक्रोवव हथियारों का उपयोग किया है एंव यह खबर कई अंतरराष्ट्रीय अखबारों ने भी रिपोर्ट की है। इस खबर को ऐसे दिखाया जा रहा है कि यह सच्ची खबर है परन्तु वास्तविक में ऐसा नहीं है, यह खबर फेक हैं। खबर यह है कि चीन के एक प्रोफेसर ने दावा किया है कि इसी वर्ष 29 अगस्त को लद्दाख की पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर चीन की सेना ने माइक्रोवेव हथियारों का प्रयोग किया है और इस फेंक न्यूज़ के मुताबिक, चीन की सेना ने पैंगोंग झील के पास पहाड़ की चोटियों को माइक्रोवेव ओवन में बदल दिया। जिससे वहां पर मौजूद भारतीय सैनिकों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया गया और अब वहां की चोटियों पर चीन का कब्जा है लेकिन यह खबर पूरी तरह से गलत है। हकीकत तो यह है कि 29 अगस्त 2020 की रात को भारतीय सेना ने पैंगोंग झील के दक्षिणी हिस्से में कई ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था और तब भारत...

फेक न्यूज़ से युद्ध

इसमें कोई दोहराय नहीं है कि चीन हमेशा से फेक न्यूज़ दर्शाता है, जिसका कई बार पर्दाफाश भी हुआ हैं व पिछले कुछ दिनों से लद्दाख के बारे में चीन एक फेक न्यूज़ फैला रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि चीन ने लद्दाख में भारतीय सेना के खिलाफ माइक्रोवव हथियारों का उपयोग किया है एंव यह खबर कई अंतरराष्ट्रीय अखबारों ने भी रिपोर्ट की है। इस खबर को ऐसे दिखाया जा रहा है कि यह सच्ची खबर है परन्तु वास्तविक में ऐसा नहीं है, यह खबर फेक हैं। खबर यह है कि चीन के एक प्रोफेसर ने दावा किया है कि इसी वर्ष 29 अगस्त को लद्दाख की पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर चीन की सेना ने माइक्रोवेव हथियारों का प्रयोग किया है और इस फेंक न्यूज़ के मुताबिक, चीन की सेना ने पैंगोंग झील के पास पहाड़ की चोटियों को माइक्रोवेव ओवन में बदल दिया। जिससे वहां पर मौजूद भारतीय सैनिकों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया गया और अब वहां की चोटियों पर चीन का कब्जा है लेकिन यह खबर पूरी तरह से गलत है। हकीकत तो यह है कि 29 अगस्त 2020 की रात को भारतीय सेना ने पैंगोंग झील के दक्षिणी हिस्से में कई ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था और तब भारत...

यूट्यूबर बनने के सपने देख रहे बच्चे

आज की दुनिया में हर कोई लाइमलाइट में आना चाहता हैं, हर कोई आज के युग में अपनी पहचान बनाना चाहता है जिसके लिए लोग न जाने क्या-क्या कर जाते हैं लेकिन इस युग में प्रसिद्ध होने के लिए कई तरीके लोगों ने खोज निकाल लिए हैं। बहरहाल भारत सहित लगभग सभी देशों में इंटरनेट के आगमन के बाद कई बड़े बदलाव हुए हैं। बच्चे अब डॉक्टर, इंजीनियर के साथ-साथ पेशेवर यूट्यूबर भी बनने के सपने देख रहे हैं। एक शोध के मुताबिक, अब जितने बच्चे अंतरिक्ष यात्री बनना चाहते हैं, उससे तीन गुना ज्यादा यूट्यूबर बनने की ख्वाहिश रखते हैं व एक्रीडेटेड डेब्ट रिलीफ ने भारत सहित दुनिया के 187 देशों के सबसे लोकप्रिय यूट्यूबर की सूची भी जारी की हैं। जिसके आधार पर विजुअल कैपिटलिस्ट ने बताया है कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय यूट्यूबर प्यूडाईपाई हैं। जिसका असली नाम फीलिक्स कियलबर्ग है और वह स्वीडन के रहने वाले हैं। उन्हें अपने लेट्स प्ले वीडियो के लिए जाना जाता है। वर्ष 2010 में वह यूट्यूब पर आए जिनके बाद से अब तक उनके करीब 10.5 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर हैं एंव वह वैसे इंग्लैंड में हैं लेकिन उनका चैनल अमेरिका में पंजीकृत है। वहीं...

फेंके गए कूड़े खाने को मजबूर

इंसानों की भूख के किस्से तो कई बार उजागर हो ही जाते है लेकिन क्या कभी जानवरों की भूख और कुपोषण की कहानी सुनी है। पूरी दुनिया में हर रात लाखों लोग खाने का दुर्पयोग करते है और दूसरी तरफ करीब 69 करोड़ लोग भूखे पेट भी सोते हैं लेकिन करोड़ों जंगली जानवरों की भी यही कहानी है। लोग अपना बुरा भला तो समझते हैं, कम से कम पर मासूम जानवर तो वह भी नहीं कर सकते। लोग अपना सुख-दुःख एक दूसरे के साथ बाट तो लेते हैं परन्तु जानवर तो वह भी नहीं कर सकतें। बहरहाल दुनिया में इस समय बड़े आकार के क़रीब 130 करोड़ जंगली जानवर हैं परन्तु इंसानों के लालच ने इन जानवरों को भूखा मरने पर मजबूर कर दिया है। श्रीलंका में हाथियों का एक बड़ा दल मजबूर है, कूड़े के ढेर में रोज़ अपने लिए खाना ढूंढने के लिए। श्रीलंका में एक बडा लैंडफिल है, जिसका नाम अमपारा हैं व उस लैंडफिल के आस पास जंगल है जहां 200 से 300 हाथी रहते हैं लेकिन भूख से परेशान यह हाथी अक्सर इस कूड़े के ढेर में खाना ढूंढने आ जाते हैं एंव कई हाथी तो कूड़ा और प्लास्टिक खाकर मर भी जाते हैं। हाल ही में एक तस्वीर ने पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि जो हाथी ...