फेंके गए कूड़े खाने को मजबूर
इंसानों की भूख के किस्से तो कई बार उजागर हो ही जाते है लेकिन क्या कभी जानवरों की भूख और कुपोषण की कहानी सुनी है। पूरी दुनिया में हर रात लाखों लोग खाने का दुर्पयोग करते है और दूसरी तरफ करीब 69 करोड़ लोग भूखे पेट भी सोते हैं लेकिन करोड़ों जंगली जानवरों की भी यही कहानी है। लोग अपना बुरा भला तो समझते हैं, कम से कम पर मासूम जानवर तो वह भी नहीं कर सकते। लोग अपना सुख-दुःख एक दूसरे के साथ बाट तो लेते हैं परन्तु जानवर तो वह भी नहीं कर सकतें।
बहरहाल दुनिया में इस समय बड़े आकार के क़रीब 130 करोड़ जंगली जानवर हैं परन्तु इंसानों के लालच ने इन जानवरों को भूखा मरने पर मजबूर कर दिया है। श्रीलंका में हाथियों का एक बड़ा दल मजबूर है, कूड़े के ढेर में रोज़ अपने लिए खाना ढूंढने के लिए। श्रीलंका में एक बडा लैंडफिल है, जिसका नाम अमपारा हैं व उस लैंडफिल के आस पास जंगल है जहां 200 से 300 हाथी रहते हैं लेकिन भूख से परेशान यह हाथी अक्सर इस कूड़े के ढेर में खाना ढूंढने आ जाते हैं एंव कई हाथी तो कूड़ा और प्लास्टिक खाकर मर भी जाते हैं। हाल ही में एक तस्वीर ने पूरी दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि जो हाथी इंसानों से भी पहले से इस पृथ्वी का हिस्सा रहे हैं व जिन्हें कभी प्रकृति ने भूखा नहीं रहने दिया, आज वो हाथी इतने मजबूर कैसे हो गए कि उन्हें इंसानों द्वारा फेंके गए कूड़े में अपना खाना ढूंढना पड़ रहा है।
हालांकि हाथियों के रक्षा हेतु अब उस लैंडफिल के लिए वहां एक खाई का निर्माण किया जा रहा है लेकिन यह कहने में हमें शर्म आनी चाहिए कि इंसानों ने जंगलों की ज़मीनों पर कब्ज़ा करके प्रकृति और अपने बीच एक ऐसी खाई का निर्माण कर लिया है, जिसमें एक ना एक दिन इंसानों का गिरना तय है। पृथ्वी पर इंसानों का अस्तित्व तीन लाख वर्ष पुराना है जबकि हाथी यहां छह करोड़ वर्षों से रह रहे हैं। हाथी शुद्ध शाकाहारी होते हैं परन्तु अब इंसानों की भूख ने इन हाथियों के लिए वो वनस्पतियां छोड़ी ही नहीं हैं जिन्हें खाकर यह अपनी भूख मिटा सकें। रोजाना लोग अपनी भूख मिटाने के लिए कई न कई जानवरों के साथ अन्याय कर रहे हैं अर्थात करीब 200 वर्ष पहले तक 50 प्रतिशत पृथ्वी पर जंगल थे लेकिन अब यह घटते घटते सिर्फ़ 31 प्रतिशत ही रह गए हैं व ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इंसानों ने बड़े पैमाने पर जंगलों को काटकर ख़त्म कर दिया और जंगली जानवरों को अपना घर मजबूरन छोड़ना पड़ा तथा जलवायु परिवर्तन के कारण जंगलों में उगने वाले पेड़ पौधे और घास धीरे धीरे अपनी गुणवत्ता खोने लगे हैं व इनमें अब उतना प्रोटीन भी नहीं बचा है जो शाकाहारी जानवरों को पर्याप्त पोषण दे सके।
एक हाथी को एक दिन में पीने के लिए 200 लीटर पानी की ज़रूरत होती है लेकिन अब जंगलों में न तो पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त पेड़ पौधे बचे हैं और न ही तालाब और पोखर जिनसे हाथी अपनी भूख और प्यास मिटाते हैं एंव जो हाथी जंगलों से बाहर नहीं आ पाते उन्हें कई बार तो गर्मी के दिनों में पानी की कमी हो जाने की वजह से हीट स्ट्रोक भी हो जाता है जिससे कई बार हाथियों को अपनी जान तक गवानी पढ़ जाती हैं। खाने की तलाश में इंसानों की बस्तियों में आए जानवर और इंसानों के बीच यहीं से एक द्वंद की शुरुआत हो जाती है। श्रीलंका से आए वीडियो में जंगल के बीच सड़क पर एक हाथी खड़ा है, यह हाथी भूखा है और इस भूख की वजह से ही हाथी यहां से आने जाने वाली गाड़ियों को रोककर उनमें सवार लोगों से इशारे से खाना मांगता है, जो लोग खाना दे देते हैं उन्हें हाथी आगे बढ़ने देता है वरना यातायात प्रभावित करता हैं।
गौरतलब है कि सरकार को जानवर के हित में सख़्त कदम उठाने चाहिए ताकि यह भी अपनी जीवन शांति से व्यतीत कर सकें व जिस दिन भूख और गरीबी से आज़ादी मिल जाएगी, उस दिन यह देश हकीकत में आजाद हो जाएगा।
-निधि जैन