इसमें कोई दोहराय नहीं है कि चीन हमेशा से फेक न्यूज़ दर्शाता है, जिसका कई बार पर्दाफाश भी हुआ हैं व पिछले कुछ दिनों से लद्दाख के बारे में चीन एक फेक न्यूज़ फैला रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि चीन ने लद्दाख में भारतीय सेना के खिलाफ माइक्रोवव हथियारों का उपयोग किया है एंव यह खबर कई अंतरराष्ट्रीय अखबारों ने भी रिपोर्ट की है। इस खबर को ऐसे दिखाया जा रहा है कि यह सच्ची खबर है परन्तु वास्तविक में ऐसा नहीं है, यह खबर फेक हैं। खबर यह है कि चीन के एक प्रोफेसर ने दावा किया है कि इसी वर्ष 29 अगस्त को लद्दाख की पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर चीन की सेना ने माइक्रोवेव हथियारों का प्रयोग किया है और इस फेंक न्यूज़ के मुताबिक, चीन की सेना ने पैंगोंग झील के पास पहाड़ की चोटियों को माइक्रोवेव ओवन में बदल दिया। जिससे वहां पर मौजूद भारतीय सैनिकों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया गया और अब वहां की चोटियों पर चीन का कब्जा है लेकिन यह खबर पूरी तरह से गलत है। हकीकत तो यह है कि 29 अगस्त 2020 की रात को भारतीय सेना ने पैंगोंग झील के दक्षिणी हिस्से में कई ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था और तब भारतीय सैनिक इस जगह पर चीन के मुकाबले बेहतर स्थिति में थे। बहरहाल चीन के सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा पर असली युद्ध जीत नहीं पाए और चीन की सरकार ने अब तक यह भी नहीं बताया है कि गलवान घाटी के संघर्ष में उसके कितने सैनिक मारे गए थे परन्तु अब चीन की सरकार, सूचना युद्ध का सहारा लेकर फेक न्यूज़ फैला रही है। जो अवश्य ही आपत्तिजनक हैं। गौरतलब है कि भारत की सरकार और भारतीय सेना ने भी माइक्रोलेव हथियारों से चीन की सेना के हमले की खबर को फेंक न्यूज़ बताया है और लद्दाख में हथियारों का इस्तेमाल करने की खबर चीन का वो प्रॉपेगेंडा है, जिसकी मदद से वो भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि उसकी यह कोशिश कुछ हद तक सफल हो गई है क्योंकि, अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नकल करने वाले कुछ भारतीय संस्थानों ने इस खबर को अपनी हेडलाइन बना लिया और ऐसा करके वो चीन के इस प्रॉपेगेंडा का हिस्सा बन गए। तथा यह माइक्रोवेव हथियार उसी प्रकार से हमला करते हैं जैसे किसी के घर में मौजूद माइक्रोवेव ओवन काम करता है। जब माइक्रोवेव ओवन में खाना पकाते हैं तो उसमें एक प्रकार का इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेडिएशन उत्पन्न होता है, जो उस ओवन में मौजूद खाद्य पदार्थों का तापमान बढ़ा देता है और फिर कुछ ही मिनटों में खाना तैयार हो जाता है, तो ठीक इसी तरह जब माइक्रोवेव हथियार से किसी व्यक्ति पर हमला किया जाता है, तो यह उस व्यक्ति के शरीर की त्वचा यानी चमड़ी के नीचे मौजूद पानी का तापमान बढ़ा देता है, जिससे उसे असहनीय दर्द होता है। ओवन में खाना भी इसी प्रकार से तैयार होता है, जिसमें किसी खाद्य पदार्थ की सतह बहुत ज्यादा गर्म नहीं होती लेकिन अंदर में ज्यादा गर्मी होती है व जिस व्यक्ति पर इस माइक्रोवेव हथियार का इस्तेमाल किया जाता है उसके लिए उस दर्द को बर्दाश्त करना असहनीय हो जाता है एंव अमेरिका ने ऐसे ही एक हथियार को अफगानिस्तान में तैनात किया था। वर्ष 2014 में चीन ने अपने माइक्रोवेव हथियार को दुनिया के सामने रखा था।हालांकि लद्दाख में ऐसे किसी माइक्रोवेव हथियार से भारत के सैनिकों पर हमला नहीं किया गया है लेकिन असली मोर्चे पर लड़ने के बदले चीन की सेना आभासी दुनिया में फेक न्यूज़ वाला युद्ध कर रही है ताकि दुनिया में उसे भी एक सुपर पावर माना जाए। -निधि जैन

इसमें कोई दोहराय नहीं है कि चीन हमेशा से फेक न्यूज़ दर्शाता है, जिसका कई बार पर्दाफाश भी हुआ हैं व पिछले कुछ दिनों से लद्दाख के बारे में चीन एक फेक न्यूज़ फैला रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि चीन ने लद्दाख में भारतीय सेना के खिलाफ माइक्रोवव हथियारों का उपयोग किया है एंव यह खबर कई अंतरराष्ट्रीय अखबारों ने भी रिपोर्ट की है।
इस खबर को ऐसे दिखाया जा रहा है कि यह सच्ची खबर है परन्तु वास्तविक में ऐसा नहीं है, यह खबर फेक हैं। खबर यह है कि चीन के एक प्रोफेसर ने दावा किया है कि इसी वर्ष 29 अगस्त को लद्दाख की पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर चीन की सेना ने माइक्रोवेव हथियारों का प्रयोग किया है और इस फेंक न्यूज़ के मुताबिक, चीन की सेना ने पैंगोंग झील के पास पहाड़ की चोटियों को माइक्रोवेव ओवन में बदल दिया। जिससे वहां पर मौजूद भारतीय सैनिकों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया गया और अब वहां की चोटियों पर चीन का कब्जा है लेकिन यह खबर पूरी तरह से गलत है।
हकीकत तो यह है कि 29 अगस्त 2020 की रात को भारतीय सेना ने पैंगोंग झील के दक्षिणी हिस्से में कई ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था और तब भारतीय सैनिक इस जगह पर चीन के मुकाबले बेहतर स्थिति में थे। बहरहाल चीन के सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा पर असली युद्ध जीत नहीं पाए और चीन की सरकार ने अब तक यह भी नहीं बताया है कि गलवान घाटी के संघर्ष में उसके कितने सैनिक मारे गए थे परन्तु अब चीन की सरकार, सूचना युद्ध का सहारा लेकर फेक न्यूज़ फैला रही है। जो अवश्य ही आपत्तिजनक हैं। गौरतलब है कि भारत की सरकार और भारतीय सेना ने भी माइक्रोलेव हथियारों से चीन की सेना के हमले की खबर को फेंक न्यूज़ बताया है और लद्दाख में हथियारों का इस्तेमाल करने की खबर चीन का वो प्रॉपेगेंडा है, जिसकी मदद से वो भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि उसकी यह कोशिश कुछ हद तक सफल हो गई है क्योंकि, अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नकल करने वाले कुछ भारतीय संस्थानों ने इस खबर को अपनी हेडलाइन बना लिया और ऐसा करके वो चीन के इस प्रॉपेगेंडा का हिस्सा बन गए। तथा यह माइक्रोवेव हथियार उसी प्रकार से हमला करते हैं जैसे किसी के घर में मौजूद माइक्रोवेव ओवन काम करता है।
जब माइक्रोवेव ओवन में खाना पकाते हैं तो उसमें एक प्रकार का इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेडिएशन उत्पन्न होता है, जो उस ओवन में मौजूद खाद्य पदार्थों का तापमान बढ़ा देता है और फिर कुछ ही मिनटों में खाना तैयार हो जाता है, तो ठीक इसी तरह जब माइक्रोवेव हथियार से किसी व्यक्ति पर हमला किया जाता है, तो यह उस व्यक्ति के शरीर की त्वचा यानी चमड़ी के नीचे मौजूद पानी का तापमान बढ़ा देता है, जिससे उसे असहनीय दर्द होता है। ओवन में खाना भी इसी प्रकार से तैयार होता है, जिसमें किसी खाद्य पदार्थ की सतह बहुत ज्यादा गर्म नहीं होती लेकिन अंदर में ज्यादा गर्मी होती है व जिस व्यक्ति पर इस माइक्रोवेव हथियार का इस्तेमाल किया जाता है उसके लिए उस दर्द को बर्दाश्त करना असहनीय हो जाता है एंव अमेरिका ने ऐसे ही एक हथियार को अफगानिस्तान में तैनात किया था।
वर्ष 2014 में चीन ने अपने माइक्रोवेव हथियार को दुनिया के सामने रखा था।हालांकि लद्दाख में ऐसे किसी माइक्रोवेव हथियार से भारत के सैनिकों पर हमला नहीं किया गया है लेकिन असली मोर्चे पर लड़ने के बदले चीन की सेना आभासी दुनिया में फेक न्यूज़ वाला युद्ध कर रही है ताकि दुनिया में उसे भी एक सुपर पावर माना जाए।
-निधि जैन

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