संदेश

विदेशी ताकतों का अधिप्रचार

 किसान आंदोलन अब सिर्फ हमारे देश में ही नहीं बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी तूल पकड़ रहा हैं। जिसमें कई राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ बोलीवुड से लेकर विदेशों की जानी मानी हस्तियाँ अपना उल्लू सीधा कर रही हैं। आलम तो यह है कि दुनिया की इन तीन बड़ी शख्सियतों में इतनी असमानताएं हैं कि इन्हें किसी एक विषय पर साथ देखने के बारे में पहले कभी सोचा ही नहीं जा सकता था लेकिन किसान आंदोलन ने इन तीनों को एक साथ ले आया और जिससे यह बात साबित होती है कि इस आंदोलन के पीछे बहुत बड़ी ताकत का हाथ है। इनमें पहली रिआना है, जो अमेरिका की मशहूर पॉप सिंगर हैं। दूसरी स्वीडन है, जो कि पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग की है और तीसरी एडल्‍ट फिल्‍म इंडस्‍ट्री में काम कर चुकी अमेरिका की एक मॉडल मिया खलीफा की है इन तीनों ने किसान आंदोलन का समर्थन किया है। चाहें वो भारत में अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए किया है या फिर किसी ओर कारण वर्ष जिसका पता तो समय आने पर ही पता चलेगा। अवश्य ही यह रहस्यमय ताकत कितनी बड़ी है कि इसकी साजिश कितनी खतरनाक होगी इसका तो अंदाजा हम लगा ही नहीं सकतें।उल्लेखनीय है कि एक अध्ययन में खु...

बंगाल में होकर रहेगा पोरिवर्तन

 बंगाल में इस बार अवश्य ही पोरिबर्तन होकर रहेगा क्योंकि जिस तरह से बीजेपी पश्चिम बंगाल में कमर कस रहीं है, एक के बाद एक रैली निकाल रही हैं व स्मृति ईरानी से लेकर प्रधानमंत्री मोदी जनसभाओं को संबोधित कर रहे हैं उसके मुताबिक तो बंगाल में टीएमसी का गिरना तय ही माना जा रहा है। हालही में परियोजनाओं का शुभारंभ करने पश्चिम बंगाल के हल्दिया पहुंचे नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर आयोजित सभा में मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर प्रहार किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल पहले से जितना आगे था, अगर बीते दशकों में उसकी वो गति और बढ़ी होती, तो आज बंगाल कहां से कहां पहुंच गया होता। आज यहां जितने भी उद्योग हैं, जितना भी कारोबार है, जितना भी इंफ्रास्ट्रक्चर है, वो बदलाव चाहते हैं, आधुनिकता चाहते हैं लेकिन उनहोंने ममता पर वार करने के लिए कहा आप सोचिए, बीते 10 सालों में यहां की सरकार ने कितनी फैक्ट्रियों का शिलान्यास या उद्घाटन किया? उस बड़े स्टील प्लांट का क्या हुआ जो यहां की अराजक व्यवस्थाओं के कारण शुरू ही नहीं हो सका? पश्चिम बंगाल की इस स्थिति का सबसे बड़ा कारण है यहां की राजनीति। आजादी के बाद जब पश्चि...

पाकिस्तान गए करीब सौ युवा हुए गायब

 पाकिस्तान कभी अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आएगा इसमें तो कोई शक नहीं है लेकिन अब धीरे-धीरे जिस तरह पाकिस्तान नई-नई योजना बना रहा है भारत को परेशान करने के लिए वो बिल्कुल भी जायज़ नहीं है। आलम तो यह है कि पिछले तीन वर्ष में वीजा लेकर पाकिस्तान गए कश्मीर  के करीब 100 का कोई भी अता पता ही नहीं है। जिससे सुरक्षा एजेंसियां के लिए चिंता बढ़ गई है क्योंकि उन्हें आशंका है कि कहीं ये युवा आतंकी संगठनों के चंगुल में फंसकर स्लीपर सेल के तौर पर काम तो नहीं कर रहे हैं व इनमें कुछ युवकों के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के सुराग मिले हैं।सुरक्षा एजेंसियों ने अमृतसर में बाघा सीमा और नई दिल्ली हवाई अड्डे से भी अन्य संबंधित अधिकारियों से ऐसे युवाओं की जानकारी जुटाई है। जिनमें से 100 युवाओं में कुछ लौटे जरूर हैं, लेकिन वो गायब हैं। उनकी किसी को जानकारी नहीं है। बहरहाल यह आशंका उस समय पुख्ता हो गई जब गत वर्ष अप्रैैल में पांच आतंकियों को कश्मीर के हंदवाड़ा में सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। जिनमें से एक स्थानीय युवा साल 2018 में पाकिस्तान गया था, लेकिन नहीं लौटा था एंव एक अप्रैल के...

किसान आंदोलन, शुभ समाचार कब?

 मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन को दो महीने होने वाले हैं लेकिन किसान और सरकार है कि वह अपनी जिद्द छोड़ने को तैयार ही नहीं है। लगातार नौ वे दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही।वहीं सरकार पर दबाव बनाने के लिए किसानों द्वारा अपना शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा हैं। किसानों की तरफ से सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और शाहजहांपुर से कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे के लिए ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। ट्रैक्टर रैली के चलते ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर आम लोगों की आवाजाही बंद कर दी गई थी।हालांकि इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन पर चिंता जाहिर की है। कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि क्या किसान आंदोलन में कोरोना को लेकर क्या नियमों का पालन किया जा सकता है व हमें डर है कि कहीं इस आंदोलन का हाल तबलीगी जमात जैसा न हो जाए। बहरहाल किसान संगठन तीनों कृषि सुधार संबंधी कानूनों को वापस लिये जाने की अपनी मांग पर अड़े हुए है, वहीं सरकार लगातार नए कानून के फायदे गिनाने में लगी हुई है परन्तु कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे के बीच किसान सड़कों पर बैठे हुए हैं। किसानों और सरकार के बीच आज एक बार फिर...

था क्या गम?

 आज भी सुशांत सिंह राजपूत का कोई गाना या कोई मूवी टीवी पर आती है तो एक अजीब सा दुख महसूस होता है। पता नहीं कभी पता भी चल पाएगा कि नहीं कि क्या हुआ था सुशांत के साथ। शायद यह दुख कभी पूरी तरह खत्म न हो लेकिन एक न एक दिन उसके गुनहगारों को सजा जरूर मिलनी चाहिए। सुशांत सिंह राजपूत के फैन्स सोशल मीडिया पर अपने चहेते स्टार के लिए लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा उनके परिवार के लोग भी इस संबंध में पोस्ट लिखते रहते हैं। सुशांत के जीजा विशाल कीर्ति ने भी एक पोस्ट शेयर किया था जिसमें उन्होंने सुशांत के साथ अपनी फोटो शेयर कर पूछा था कि क्या कभी सुशांत को न्याय मिल पाएगा? राजपूत के मासूम चेहरे की यादें हमारे काम के साथ-साथ हमारे सपनों पर भी हावी हैं। हालांकि सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति भी लगातार अपने भाई की मौत के इंसाफ के लिए रोजाना न्याय की गुहार लगा रही हैं। बहरहाल सुशांत ने पवित्र रिश्ता सीरियल से लोगों का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। वहीं सुशांत सिंह राजपूत ने बॉलीवुड में फिल्म काय पो चे से कदम रखा था और इसके बाद वह शुद्ध देसी रोमांस और एम. एस धोनी जैसी कई जबरदस्त...

हिन्दुस्तान हमारा

 भारतीय होने पर गर्व होना चाहिए व मिलकर, खुशी से, गम छोड़कर लोकतंत्र का पर्व बनाने में ही असली खुशियां हैं। देश के दुश्मनों को मिलकर हरायें व अपने घरों में तिरंगा लहरायें। बेशक इस बार का गणतंत्र दिवस बहुत ही खास होने वाला है। बीता साल पूरी तरह से कोरोना संक्रमण की चपेट में था, जिसके कारण स्वतंत्रता दिवस के आयोजन प्रभावित हुए है। हालांकि अब देश में कोरोना नियंत्रण में है और स्वदेशी वैक्सीन भी सफलतापूर्वक काम कर रही है लेकिन सतर्कता बरतनी भी जरूरी है। भारत में गणतंत्र दिवस एक राष्ट्रीय त्योहार की तरह मनाया जाता है। इस दिन भारत की स्वतंत्रता के बाद 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था। इस दिन राजपथ पर और विविधता में एकता, अखंडता का संदेश व सैन्य ताकत दिखाती कई झांकियों का भी प्रदर्शन किया जाता है। हालांकि इस बार वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की वजह से गणतंत्र दिवस पर कम ही दर्शक राजपथ की परेड देख सकेंगे। इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग का भी खास पालन किया जाएगा। गणतंत्र दिवस के पर्व के दिन हम सभी को अपने देश की उन्नति की कामना करनी चाहिए। गणतंत्र दिवस का यह दिन हमें या...

दुर्भाग्य पूर्ण दिन या गौरवान्वित

 कोरोना वायरस के सुरक्षा उपायों के बीच देश की राजधानी दिल्‍ली में 72वीं गणतंत्र दिवस परेड में बीते दिन कुछ चीजें पहली बार देखने को मिलीं, इसमें केंद्र शासित क्षेत्र लद्दाख की झांकी और कोविड-19 की महामारी पर केंद्रित झांकी सबके बीच चर्चा का विषय बनीं। कोरोना महामारी के बीच इस बार की छोटी और कम प्रतिभागियों वाली परेड और कम मेहमान के बीच इन झांकियों में भारत की संस्‍कृति और क्षमता का चित्रण देखने को मिला। वर्ष 2020 में देश सहित पूरी दुनिया ने कोरोना संक्रमण की महामारी का सामना किया, इसकी झांकी भी इस बार परेड में दिखाई दी। हालांकि यह देश में विकसित की गई कोरोना वैक्‍सीन के लिए भी जाना जाएगा। गौरतलब है कि जहां देश में गणतंत्र दिवस का जश्न मनाया जा रहा था तो वहीं दूसरी तरफ किसान आंदोलन ने देश के अहम दिन को शर्मनाक साबित कर दिया। बेशक यह किसान आंदोलन आंदोलन नही रहा बल्कि आरजकता में तब्दील हो गया था। उर्ग किसानों ने दिल्ली में लाल क़िले के ऊपर चढ़कर प्रदर्शन किया। व उत्पात कंट्रोल से बाहर हो गया था। बहरहाल यह जय जवान- जय किसान कहने वाला देश है। जवानों की किसानों पर लाठी बरसाने और क...