किसान आंदोलन, शुभ समाचार कब?

 मोदी सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन को दो महीने होने वाले हैं लेकिन किसान और सरकार है कि वह अपनी जिद्द छोड़ने को तैयार ही नहीं है।

लगातार नौ वे दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही।वहीं सरकार पर दबाव बनाने के लिए किसानों द्वारा अपना शक्ति प्रदर्शन किया जा रहा हैं। किसानों की तरफ से सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और शाहजहांपुर से कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे के लिए ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। ट्रैक्टर रैली के चलते ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर आम लोगों की आवाजाही बंद कर दी गई थी।हालांकि इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन पर चिंता जाहिर की है।
कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि क्या किसान आंदोलन में कोरोना को लेकर क्या नियमों का पालन किया जा सकता है व हमें डर है कि कहीं इस आंदोलन का हाल तबलीगी जमात जैसा न हो जाए। बहरहाल किसान संगठन तीनों कृषि सुधार संबंधी कानूनों को वापस लिये जाने की अपनी मांग पर अड़े हुए है, वहीं सरकार लगातार नए कानून के फायदे गिनाने में लगी हुई है परन्तु कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे के बीच किसान सड़कों पर बैठे हुए हैं। किसानों और सरकार के बीच आज एक बार फिर से वार्ता होनी है। जिसके बाद ही यह तय होगा कि 26 जनवरी को किसान आंदोलन को कृषक तेज करेंगे या फिर आंदोलन खत्म होगा। किसान इस बार आर पार लड़ाई के लिए तैयार हैं तो वहीं सरकार भी पीछे हटने का नाम नहीं ले रही है।
गौरतलब है कि अगर दोनों ही पक्ष अपनी जिद्द पर अड़े रहेगे तो आखिरकार बीच का रास्ता कैसे निकलेगा?
-निधि जैन

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