पाकिस्तान गए करीब सौ युवा हुए गायब

 पाकिस्तान कभी अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आएगा इसमें तो कोई शक नहीं है लेकिन अब धीरे-धीरे जिस तरह पाकिस्तान नई-नई योजना बना रहा है भारत को परेशान करने के लिए वो बिल्कुल भी जायज़ नहीं है।

आलम तो यह है कि पिछले तीन वर्ष में वीजा लेकर पाकिस्तान गए कश्मीर  के करीब 100 का कोई भी अता पता ही नहीं है। जिससे सुरक्षा एजेंसियां के लिए चिंता बढ़ गई है क्योंकि उन्हें आशंका है कि कहीं ये युवा आतंकी संगठनों के चंगुल में फंसकर स्लीपर सेल के तौर पर काम तो नहीं कर रहे हैं व इनमें कुछ युवकों के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के सुराग मिले हैं।सुरक्षा एजेंसियों ने अमृतसर में बाघा सीमा और नई दिल्ली हवाई अड्डे से भी अन्य संबंधित अधिकारियों से ऐसे युवाओं की जानकारी जुटाई है।
जिनमें से 100 युवाओं में कुछ लौटे जरूर हैं, लेकिन वो गायब हैं। उनकी किसी को जानकारी नहीं है। बहरहाल यह आशंका उस समय पुख्ता हो गई जब गत वर्ष अप्रैैल में पांच आतंकियों को कश्मीर के हंदवाड़ा में सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। जिनमें से एक स्थानीय युवा साल 2018 में पाकिस्तान गया था, लेकिन नहीं लौटा था एंव एक अप्रैल के बाद दक्षिण कश्मीर के शोपियां, कुलगाम और अनतंनाग जिलों के युवा घुसपैठ करने वाले आतंकियों के दलों में शामिल मिले थे। वहीं सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि यह युवा कई स्लीपर सेल का काम तो नहीं कर रहे हैं और पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर काम तो नहीं कर रहे। सुरक्षा अधिकारियों  का कहना है कि कई युवा दो साल पहले भी पाकिस्तान गए थे परन्तु वह लौट आए थे।
जिनसे सुरक्षा एजेंसियों ने पूछताछ भी की थी। जिससे उन्हें परेशानी जरूर हुई है लेकिन सुरक्षा के लिए यह जरूरी था। इन युवाओं से पाकिस्तान जाने का पुख्ता कारण पूछा गया। यही नहीं इन युवाओं की पारिवारिक पृष्ठभूमि का भी पता लगाया गया। बहरहाल सुरक्षा एजेंसियों को लगता है कि आतंकी गुटों में शामिल होने वाले नए युवाओं को छह सप्ताह की ट्रेनिंग दी जाती है व कुछ युवाओं को विस्फोटक बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है एंव कई आतंकी संगठन युवाओं को अपने यहां भर्ती करने की साजिश भी रच रहे हैं। जो युवा गायब हुए हैं,उनमें से अधिकांश मध्यम वर्गीय परिवारों से संबंध रखते हैं। यह लोग कश्मीर में आतंक का नया चेहरा हो सकते हैं।
गौरतलब है कि कुछ वर्षों से बेहद कड़ी चौकसी की वजह से भारत-पाक नियंत्रण रेखा पार करना आतंकियों के लिए मुश्किल हो गया है। पहले तो पाकिस्तान कश्मीर के युवाओं को बहका कर हथियार की ट्रेनिंग के लिए नियंत्रण रेखा पार करवाते थे लेकिन अब पाकिस्तान ने कश्मीरी युवाओं को सीधे वीजा देने का रास्ता बनाया है। कुल मिलाकर एक बात यह है कि खुफिया एजेंसियां इन सभी पर नजर रखती हैं।
-निधि जैन

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