आखिर कहां जाएं आम आदमी?
देश में तेल, सब्जी, पेट्रोल, डीजल के साथ ही एलपीजी गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की हालत पहले ही खस्ता कर दी है। गौरतलब है कि महंगाई के इस दौर में अब लोगों को दवाइयों के लिए भी अपनी जेब ढीली करनी पड़ सकती है। जिसकी पूर्ण आशंका हैं। दरअसल, नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने हाल ही में कहा है कि सरकार ने दवा निर्माताओं को एनुअल होलसेल प्राइस इंडेक्स में 0.5 फीसदी बढ़ोतरी की अनुमति दे दी है। जिसके बाद अनुमान है कि दर्द निवारक दवाइयां, एंटीइंफ्लाटिव, कार्डियक और एंटीबायोटिक्स सहित आवश्यक दवाओं की कीमतें अप्रैल से बढ़ सकती हैं। सरकार ने दवा निर्माताओं को एनुअल होलसेल प्राइस इंडेक्स के आधार पर कीमतों में बदलाव की अनुमति दी है। फार्मा इंडस्ट्री का कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में 15-20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है इसलिए कंपनिया कीमतों में 20 फीसदी बढ़ोतरी की योजना बना रही है। उल्लेखनीय है कि कार्डियो वैस्कुलर, डायबिटीज, एंटीबायोटिक्स, एंटी-इंफ़ेक्टिव और विटामिन के मैन्यूफैक्चर के लिए अधिकांश फार्मा इन्ग्रीडीएंट चीन से आयात किए जाते हैं, जबकि कुछ एक्टिव फार्मास्युटिकल इन्ग्री...