संदेश

आखिर कहां जाएं आम आदमी?

 देश में तेल, सब्जी, पेट्रोल, डीजल के साथ ही एलपीजी गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की हालत पहले ही खस्ता कर दी है। गौरतलब है कि महंगाई के इस दौर में अब लोगों को दवाइयों के लिए भी अपनी जेब ढीली करनी पड़ सकती है। जिसकी पूर्ण आशंका हैं। दरअसल, नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने हाल ही में कहा है कि सरकार ने दवा निर्माताओं को एनुअल होलसेल प्राइस इंडेक्स में 0.5 फीसदी बढ़ोतरी की अनुमति दे दी है। जिसके बाद अनुमान है कि दर्द निवारक दवाइयां, एंटीइंफ्लाटिव, कार्डियक और एंटीबायोटिक्स सहित आवश्यक दवाओं की कीमतें अप्रैल से बढ़ सकती हैं। सरकार ने दवा निर्माताओं को एनुअल होलसेल प्राइस इंडेक्स के आधार पर कीमतों में बदलाव की अनुमति दी है। फार्मा इंडस्ट्री का कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में 15-20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है इसलिए कंपनिया कीमतों में 20 फीसदी बढ़ोतरी की योजना बना रही है। उल्लेखनीय है कि कार्डियो वैस्कुलर, डायबिटीज, एंटीबायोटिक्स, एंटी-इंफ़ेक्टिव और विटामिन के मैन्यूफैक्चर के लिए अधिकांश फार्मा इन्ग्रीडीएंट चीन से आयात किए जाते हैं, जबकि कुछ एक्टिव फार्मास्युटिकल इन्ग्री...

क्या भाजपा दोहराएगी बिहार वाला सीन?

 मुंबई के अंटीलिया प्रकरण में एक के बाद एक नया मोड़ आ रहा है, जिससे महाराष्ट्र सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं और इन मुश्किलों से शिवसेना-एनसीपी के बीच दूरी बढ़ने की पूर्ण आशंका हैं लेकिन इस विवाद का सीधा फायदा अगर किसी को होगा तो वो है भाजपा। बहरहाल नया मामला पुलिस आयुक्त पद से हटाए गए परमबीर सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर सनसनीखेज राज खोले हैं। उन्होंने परमबीर सिंह पर आरोप लगाए है कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पुलिस अधिकारियों से हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली करवाना चाहते थे व इतना ही नहीं, पत्र में उन्होंने ये भी लिखा है कि देशमुख अधिकारियों को घर बुलाकर वसूली के गुर भी सिखाते थे। वहीं, देशमुख ने इन आरोपों को झूठा बताया है और जांच से बचने के लिए इसे नया पैंतरा करार दिया है एंव अनिल देशमुख ने इस पर बोला है कि मैं परमबीर सिंह के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराऊंगा। उल्लेखनीय है कि इस चिट्ठी के कारण उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार मुश्किल में आ गई है क्योंकि उद्धव ठाकरे को भेजे गए आठ पेज के लेटर का अ...

4 साल बाद भी योगी सरकार का जलवा कायम

 यूपी की योगी आदित्‍यनाथ सरकार के शासन को हाल ही में चार साल पूरे हो गए हैं। सरकार के बीते चार सालों के कामकाज पर हुए तमाम सर्वे बता रहे हैं कि योगी सरकार पिछली सरकारों से बेहतर रही है। जनता ने न केवल योगी को बेहतर सीएम बताया बल्कि उन्‍हें पीएम मोदी के बाद प्रधानमंत्री बनने के काबिल भी समझा है। सर्वे की मानें तो अगर इसी समय यूपी में चुनाव हो जाएं तो फिर से बीजेपी की सरकार बननी तय हैं। यूपी में विधानसभा उपचुनाव से लेकर एमएलसी चुनाव सभी में योगी के नेतृत्व में बीजेपी ने जीत हासिल की है। गौरतलब है कि मायावती, अखिलेश यादव की मजबूत पार्टियां और प्रियंका के पदार्पण के बावजूद विपक्ष यूपी में काफी हद तक कमजोर नजर आता है। एबीपी-सी वोटर सर्वे के मुताबिक, लोगों ने योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि नौकरियां देना माना है। सवाल पर 28 फीसदी लोगों ने नई नौकरी, 12 फीसदी ने कोरोना महामारी के नियंत्रण, 16 फीसदी ने अपराध नियंत्रण और 16 फीसदी लोगों ने राम मंदिर को योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। सर्वे के मुताबिक, अभी चुनाव हों तो योगी सरकार भारी बहुमत के साथ वापसी करती दिख रही है। सर्वे के मुताबिक...

क्यां लंका में बैन होगा बुर्का?

 एक के बाद एक देश अपने यहां मुस्लिम महिलाओं द्वारा पहने जा रहे बुर्के पर प्रतिबंध लगा रहा हैं और अब इन देशों की सूची में एक ओर नाम श्रीलंका का जुड़ने जा रहा है। श्रीलंका में सार्वजनिक तौर पर बुर्का पहनने से रोक लगाने पर अभी फिलहाल कोई सख्त फ़ैसला नहीं लिया गया है लेकिन प्रस्ताव जरूर रहा गया है जिस पर विचार अवश्य किया जा रहा है। श्रीलंका के विदेश सचिव एडमिरल प्रोफ़ेसर जयंत कोलबाग का कहना है कि ईस्टर बम धमाकों की जांच के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरतों के मद्देनज़र एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं और इस प्रस्ताव की बुनियाद यही है। सभी संबद्ध पक्षों से इस बारे में विस्तार से बात करने के बाद ही लंका में आम सहमति बनने के बाद व पर्याप्त समय देने के बाद ही इस फैसले पर मुहर लगेगी कि श्रीलंका में बुर्का पहना जाएगा या नहीं। गौरतलब है कि साल 2019 में ईस्टर संडे के दिन चर्च और होटलों में सुनियोजित तरीके से हुए चरमपंथी हमलों के दो साल बाद बुर्के पर पाबंदी का प्रस्ताव सामने आया है। जिस पर बेशक़ ही सोच- समझ के निर्णय लिया जाएगा।

दिल्ली का राजा कौन?

 बीजेपी सरकार एक के बाद एक बिल में संशोधन करने को तैयार बैठी है, जिसका विरोध अवश्य ही किसी न किसी विपक्षी पार्टी को करना ही हैं। हालांकि अब हालही में राजधानी दिल्ली में शासन के संबंध में केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में पेश किए गए संशोधन विधेयक को दिल्‍ली के अरविंद केजरीवाल सरकार की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। केजरीवाल सरकार का कहना है कि केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी इस विधेयक के जरिए राजधानी दिल्ली में पिछले दरवाजे से सरकार चलाने की कोशिश कर रही है और इसलिए यह बिल अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक है व इस बिल का विरोध आम आदमी पार्टी सड़क से लेकर संसद तक करेगी। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने बीते दिनों लोकसभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक 2021 पेश किया। जिसमें मुख्य रूप से चार पहलुओं पर संशोधन किया जा रहा है, जिसमें पहला संशोधन है सेक्शन 21 में प्रस्तावित करना है, इसके मुताबिक जब विधानसभा कोई भी कानून बनाएगी तो उसमें सरकार का मतलब उपराज्यपाल होगा जबकि जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने...

सब बर्दाश्त कर, मरते हुए इंसान के लिए खड़े हो जाइए।

  रोजाना कोरोना संक्रमण के बढ़ते आकड़े देख कर बस यही विचार आता है, जिससे जितनी सहायता हो सकें वह उतनी करें क्योंकि जैसे छोटे-छोटे सुख बड़े होते हैं, ठीक उसी तरह छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े होते है। वाट्सएप पर काढ़े का फार्मूला, खान पान की नसीहत और सही-गलत फोन नंबर फारवर्ड करने का वक्त अब जा चुका है। वैसे भी पिछले एक वर्ष में आयुर्वेद से अधिक काढ़े वाट्सएप ने तैयार कर दिए हैं। संसाधनों की कमी का रोना रोने का समय भी गया। इसलिए आपस के मन मोटाव को परे रखकर इन सब बातों से बाहर आकर हमें तन, मन और धन से ज़रूरतमंदों की सहायता करनी है। ऑक्सीजन और बेड के जुगाड़ में सरकारों और उनके अफसर पहले ही जूझ रहे है लेकिन हमें आपदा में अवसर को भूल आपदा को औजार बना लेने की सफल कोशिश करनी है। ताली और थाली बजाने के बजाय इस समय पड़ोसी के साथ खड़े होने का वक्त है। बहरहाल किसी के काम आने के लिए लखपति होना आवश्यक नहीं है प्रतेक व्यक्ति के पास इतनी ज़मा पूंजी तो होती ही है कि संकट के समय वह कुछ दिन बांटकर खा सकें। एक ब्रांडेड टी शर्ट की कीमत से कम खर्च में भी औसत रसोई चल जाती है। उल्लेखनीय है कि इस समय इंसानियत ...

एक बाल फिर खेला हो बेगा

 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में तृणमूल कांग्रेस ने बड़ी जीत हासिल की है। विधानसभा चुनाव में भले ही तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी को पटखनी दी हो लेकिन सूबे की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हार का सामना करना पड़ा है। पश्चिम बंगाल की सबसे हॉट सीट मानी जा रही नंदीग्राम के बारे में जैसा अनुमान लगाया जा रहा था, परिणाम भी वैसा ही दिखाई दिया है। शुरुआत से ही ये स्‍पष्‍ट ही नहीं हो सका कि नंदीग्राम से शुवेंदु अधिकारी की जीत हुई है या फिर ममता बनर्जी ने बाजी मारी है। पहले ममता बनर्जी ने जीत का दावा किया था, लेकिन नतीजे आने के बाद ममता बनर्जी ने खुद प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में अपनी हार स्‍वीकार कर ली लेकिन सवाल ये है कि अगर ममता बनर्जी नंदीग्राम से हार चुकी हैं तो क्या ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी रहेंगी? हालांकि चुनावी विश्‍लेषकों का कहना है कि वह निश्चित रूप से एक बार फिर पश्चिम बंगाल की बागडोर अपने हाथ में लेंगी। गौरतलब है कि अनुच्छेद 164 कहता है कि एक मंत्री जो लगातार छह महीने तक किसी राज्‍य के विधानमंडल का सदस्य नहीं होता है, वह इस समयसीमा के खत्‍म होने के बाद म...