क्यूं न इस दिवाली

क्यूं न इस दिवाली कुछ नया किया जाए, क्यूं न शहीदों को नमन करके अंखड़ दिया जलाया जाए, क्यूं न इस दिवाली कुछ गरीबों को खुश किया जाए, हर जगह खुशियां बाटी जाए, बेशक़ लकीरे खीच दी है चंद मतलबी लोगों ने भावनाओं में वरना क्या फर्क है उनकी ईद और हमारी दिवाली में। दिवाली के इस विशेष त्योहार के लिए हिंदू धर्म के लोग बहुत उत्सुकता से इस दिन का इंतजार करते हैं।
यह बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए हर किसी का सबसे महत्वपूर्ण और पसंदीदा त्यौहार में से एक है। दीवाली भारत का सबसे महत्वपूर्ण और मशहूर त्यौहार है। जो पूरे देश में साथ-साथ हर साल मनाया जाता है। बहरहाल रावण को पराजित करने के बाद, 14 साल के निर्वासन के लंबे समय के बाद जब भगवान राम अपने राज्य अयोध्या में लौटे थेजिस दिन का लोग आज भी बहुत उत्साहजनक तरीके से मनाते हैं। भगवान राम के लौटने वाले दिन, अयोध्या के लोगों ने अपने घरों और मार्गों को बड़े उत्साह के साथ अपने भगवान का स्वागत करने के लिए प्रकाशित किया था। यह एक पवित्र हिंदू त्यौहार है जो कि बुरेपन पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह सिखों द्वारा भी मुगल सम्राट जहांगीर द्वारा ग्वालियर जेल से अपने छह वें गुरु, श्री हरगोबिंद जी की रिहाई मनाने के लिए मनाया जाता है।
दीपावली कहे जाने वाले इस त्यौहार इस दिन महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही कुबेर की पूजा भी की जाती है। शुभ मुहूर्त में लक्ष्मीजी का पाना, सिक्का, तस्वीर अथवा श्रीयंत्र, धानी, बताशे, दीपक, पुतली, गन्ने, साल की धानी, कमल पुष्प, ऋतु फल आदि पूजन की सामग्री खरीदी जाती है। घरों में लक्ष्मी के नैवेद्य हेतु पकवान बनाए जाते हैं। शुभ मुहूर्त, गोधूलि बेला अथवा सिंह लग्न में लक्ष्मी का वैदिक या पौराणिक मंत्रों से पूजन किया जाता है। प्रारंभ में गणेश, अंबिका, कलश, मातृका, नवग्रह, पूजन के साथ ही लक्ष्मी पूजा का विधान होता है। लक्ष्मी के साथ ही अष्टसिद्धियां- अणिमा महिला गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्या, ईशिता और बसिता तथा अष्टलक्ष्मी आदि, विद्या, सौभाग्य, अमृत, काम, सत्य भोग और योग की पूजा भी करना चाहिए। इसके पश्चात महाकाली स्वरूप दवात तथा महासरस्वती स्वरूप कलम व लेखनी की पूजा होती है। बही, बसना, धनपेटी,लॉकर, तुला, मान आदि में स्वास्तिक बनाकर पूजन करना चाहिए। पूजा के पश्चात दीपकों को देवस्थान, गृह देवता, तुलसी, जलाशय, पर आंगन, आसपास सुरक्षित स्थानों, गौशाला आदि मंगल स्थानों पर लगाकर दीपावली करें।
गौरतलब है कि यह ऐसा त्यौहार है जिस पर हर किसी को खुशी का आनन्द होता हैं तो इस दिवाली ध्यान रखना की कहीं बाजारों के सामने इंसानियत छोटी न पढ़ जाए, गरीबों की सहायता करना नहीं भूलना।
-निधि जैन

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