भाई बहन का अनकहा बंधन
भाई बहन का अनोखा प्यार, अनकहा बंधन, जो नोक झोंक दर्शाता हैं। भूल कर सब मतभेद एक बार फिर से त्यौहारों के आनन्द में घुल मिल जाता हैं। माना जाता है कि दीपावली हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्योहार में से एई है और पांच दिवसीय त्योहार के पांचवे दिन मनाया जाता है, जिसमें से एक है भाई दूज का पर्व। जिसको यम द्वितीया भी कहा जाता है।
भाई दूज का पर्व भाई-बहन के रिश्ते पर आधारित पर्व है, जिसे बड़ी श्रद्धा व परस्पर प्रेम के साथ मनाया जाता है। रक्षाबंधन के बाद, भाईदूज ऐसा दूसरा त्योहार है, जो भाई बहन के अगाध प्रेम को समर्पित है। बहरहाल भाई दूज का पर्व दीपावली के तीसरे दिन मनाया जाता है। इस दिन विवाहिता बहनें, बहन अपने भाई को भोजन के लिए अपने घर पर आमंत्रित करती है, और गोबर से भाई दूज परिवार का निर्माण कर, उसका पूजन अर्चन कर भाई को प्रेम पूर्वक भोजन कराती है। बहन अपने भाई को तिलक लगाकर, उपहार देकर उसकी लम्बी उम्र की कामना करती है तथा भाई दूज से जुड़ी कई मान्यताएं भी हैं जिनके आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अलग-अलग तरह से मनाया जाता है।
भाई दूज को लेकर यह मान्यता प्रचलित है, कि इस दिन भाई को तिलक लगाकर प्रेमपूर्वक भोजन कराने से परस्पर तो प्रेम बढ़ता ही है, एंव भाई की उम्र भी लंबी होती है। चूंकि इस दिन यमुना जी ने अपने भाई यमराज से वचन लिया था, कि उसके अनुसार भाई दूज मनाने से यमराज के भय से मुक्ति मिलती है, और भाई की उम्र व बहन के सौभाग्य में वृद्धि होती है। गौरतलब है कि भाई का प्रेम अपनी बहनों के लिए बचपन से ही सबसे अलग होता है, और बहन के प्रति बचपन से ही चिंतित रहने वाले भाई के प्रति प्रेम प्रकट करने का इससे अच्छा अवसर दूसरा ओर कोई हो भी नहीं सकता। इसलिए इस त्यौहार को भी पूर्ण अपने पन से मनाया जाता हैं। जितना महत्व रक्षा बंधन को दिया जाता है उतना ही महत्व भाई दूज को भी दिया जाता हैं।
बेशक त्यौहार कोई भी हो सबसे महत्वपूर्ण है कि घरों में, रिश्तो में अपनापन बना रहे, प्यार भरपूर बना रहे, गिले-शिकवे न हो, सब एक दूसरे से खुशी से मिले और क्या चाहिए लोगों को।
-निधि जैन