यह भी परेशानी हैं
हमारे देश में अभी भी कई ऐसे लोग है जो अभी भी यानी इक्कीसवीं शताब्दी में भी गाड़ी, मेट्रो में सफर करने का खर्च नहीं उठा सकतें।
कई ऐसे लोग है जिन्होंने अभी तक गाड़ी में सफर करने का लुफ्त नहीं उठाया है वह अपना पूरा जीवन बस, लोकल ट्रेन में ही धक्के काटकर गुजार देते हैं तो एसे में उन लोगों को अब कई वर्षों से कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि दिल्ली में छह साल से दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी के बेड़े में एक भी नई बस शामिल नहीं हुई है व कम होती बसों की संख्या ने सुबह व शाम के व्यस्त समय में यात्रियों की परेशानियां बहुत बढ़ा दी है और अभी मौजूदा समय में तो यात्रियों को तो ओर ही परेशानी हो रहीं है क्योंकि कोविड़-19 के प्रकोप के कारण बस चालक अब बीस ही यात्रियों को बस में बैठने देते है एंव अधिकांश बसे तो बस डीपो पर ही भर जाती हैं जिससे आगे वाले स्टैंड में यात्रियों को घंटो घंटो तक बसों के लिए वेट करना पड़ता है और कई बार तो घंटों इंतजार करने के बाद भी बस नहीं मिलती हैं।
हालत तो अब यह है कि पुरानी बसें अपनी तय किलोमीटर पूर्ण कर मार्गों से हटती जा रही हैं, डीटीसी के बेड़े में बसों की संख्या घटकर 3762 के करीब रह गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में दिल्ली को करीब 11 हजार बसों की आवश्यकता है। इन बसों में 50-50 फीसद डीटीसी व कलस्टर का अनुपात तय किया गया है ताकि सार्वजनिक परिवहन को बेहतर तरीके संचालित किया जा सके। इस हिसाब से दिल्ली में डीटीसी के पास 5500 बसों की आवश्यकता है और डीटीसी इस समय 3762 बसों का संचालित कर रहा है। वैसे नई बसों की डीटीसी ने निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है तथा सरकार खुद ही मान रही है कि पिछले छह सालों में डीटीसी ने एक भी बस नहीं खरीदी, जबकि केंद्र सरकार ने 2017 में 300 बस और अब 1000 बसों की खरीद के लिए धनराशि की अनुमति दी है।
गौरतलब है कि बसों की संख्या में कमी होने के कारण मध्यवर्गीय परिवार और छोटी जाति के लोगों को आने जाने में कई तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है जिसके बारे में सरकार को जल्द से जल्द फैसला लेने की आवश्यकता हैं।
-निधि जैन
कई ऐसे लोग है जिन्होंने अभी तक गाड़ी में सफर करने का लुफ्त नहीं उठाया है वह अपना पूरा जीवन बस, लोकल ट्रेन में ही धक्के काटकर गुजार देते हैं तो एसे में उन लोगों को अब कई वर्षों से कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि दिल्ली में छह साल से दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी के बेड़े में एक भी नई बस शामिल नहीं हुई है व कम होती बसों की संख्या ने सुबह व शाम के व्यस्त समय में यात्रियों की परेशानियां बहुत बढ़ा दी है और अभी मौजूदा समय में तो यात्रियों को तो ओर ही परेशानी हो रहीं है क्योंकि कोविड़-19 के प्रकोप के कारण बस चालक अब बीस ही यात्रियों को बस में बैठने देते है एंव अधिकांश बसे तो बस डीपो पर ही भर जाती हैं जिससे आगे वाले स्टैंड में यात्रियों को घंटो घंटो तक बसों के लिए वेट करना पड़ता है और कई बार तो घंटों इंतजार करने के बाद भी बस नहीं मिलती हैं।
हालत तो अब यह है कि पुरानी बसें अपनी तय किलोमीटर पूर्ण कर मार्गों से हटती जा रही हैं, डीटीसी के बेड़े में बसों की संख्या घटकर 3762 के करीब रह गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में दिल्ली को करीब 11 हजार बसों की आवश्यकता है। इन बसों में 50-50 फीसद डीटीसी व कलस्टर का अनुपात तय किया गया है ताकि सार्वजनिक परिवहन को बेहतर तरीके संचालित किया जा सके। इस हिसाब से दिल्ली में डीटीसी के पास 5500 बसों की आवश्यकता है और डीटीसी इस समय 3762 बसों का संचालित कर रहा है। वैसे नई बसों की डीटीसी ने निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है तथा सरकार खुद ही मान रही है कि पिछले छह सालों में डीटीसी ने एक भी बस नहीं खरीदी, जबकि केंद्र सरकार ने 2017 में 300 बस और अब 1000 बसों की खरीद के लिए धनराशि की अनुमति दी है।
गौरतलब है कि बसों की संख्या में कमी होने के कारण मध्यवर्गीय परिवार और छोटी जाति के लोगों को आने जाने में कई तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है जिसके बारे में सरकार को जल्द से जल्द फैसला लेने की आवश्यकता हैं।
-निधि जैन