लॉकड़ाउन लगें या नहीं?

जैसे-जैसे भारत में कोरोना के मामलें बढ़ते जा रहे हैं, वैसे ही हमारे देश की आम जनता लापरवाही बरतने में जरा सी भी देर नहीं लगा रही और अब तो लापरवाही का नतीजा भी स्पष्ट दिखने लगा है क्योंकि अब पूरे देश में बस एक ही सवाल पूछा जा रहा है और वह यह है कि सवाल क्या देश में एक बार फिर से लॉकडाउन लगने वाला है? व इस सवाल के केंद्र में मुख्य देश की राजधानी दिल्ली है, जहां स्थितियां ऐसी हो गई हैं कि कभी भी आंशिक या पूर्ण लॉकडाउन लगाया जा सकता है।
दिल्ली में लोग पूर्ण रूप से कोरोना की अनदेखी कर रहे हैं जिसका नतीजा यह है कि दिल्ली में कोविड़-19 अपना प्रकोप का दायरा ओर बढ़ाता जा रहा है और रोजाना केसों में इजाफा हो रहा हैं। जिसके मद्देनजर सरकार ने कई अहम फैसले लेने का निर्णय लिया है, नोएडा प्रशासन ने दिल्ली से नोएडा आने वाले व्यक्तियों की कोरोना जांच कराने का फैसला किया है। हालांकि यह रैंडम टेस्ट होगा यानी नोएडा आने वाले सभी व्यक्तियों की जांच नहीं होगी, उनमें से कुछ लोगों का ही टेस्ट किया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि, दिल्ली में लगातार कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, बहुत सारे लोग दिल्ली से नोएडा काम करने के लिए आते हैं और काम के लिए कई लोग नोएडा से दिल्ली भी जाते हैं।
हालांकि इस दौरान दिल्ली और नोएडा के बीच ट्रैफिक पर कोई पाबंदी नहीं होगी। बहरहाल दिल्ली के कई बाजारों की तस्वीरें भी सामने आई थी, जहां भयानक स्थिति बयां की जा रही हैं एंव एक तरफ दिल्ली देश की कोरोना कैपिटल बन चुकी है तो वहीं दूसरी तरफ दिल्ली के बाजारों में भीड़ इतनी ज्यादा है कि वहां पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना नामुमकिन ही है। सामने आई स्थिति तो यह ही बया कर रही है कि दिल्ली वालों को फिर से लॉकडाउन में जाने का कोई डर नहीं है। दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में भी लोगों की सोच को बदलने की जरूरत है। शायद लॉकडाउन में छूट के बाद यहां के लोग मान रहे हैं कि कोरोना वायरस खत्म हो गया है। दिल्ली के लोग सरकार के आदेशों को भी नहीं मान रहे हैं और इसी का नतीजा है कि यहां पर कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
गौरतलब है कि पिछले सात दिनों में कोरोना संक्रमण के औसत मामलों में दिल्ली पूरी दुनिया में दूसरे नंबर पर है, जो बेशक़ भयावह हैं व दिल्ली में कोरोना इंफेक्शन के औसतन 7 हजार से ज्यादा मामले आ रहे हैं और जिससे ज्यादा मामले अमेरिका के शिकागो में आए हैं एंव देश के दूसरे बड़े शहरों में कोविड़-19 के मामले कम हो रहे हैं लेकिन दिल्ली में यह लगातार बढ़ रहे हैं, जिसका स्पष्ट मतलब है कि दिल्ली कोरोना का एक बड़ा हॉटस्पॉट बन गया है। दिल्ली में पिछले पांच दिनों में कोरोना संक्रमण के 29 हजार से ज्यादा मामलों की पुष्टि हुई है और यह मामले पिछले 24 घंटे में देशभर में आए कुल मामलों के करीब हैं और अगर पूरे देश के कोरोना इंफेक्शन के आंकड़ों में से दिल्ली के आंकड़ों को हटा दें तो भारत की स्थिति ज्यादा बेहतर दिखाई देती है।
हालांकि इस समय संक्रमण के कुल मामलों में अमेरिका के बाद भारत दूसरे नंबर पर है। जिसको देखते हुए दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है और दिल्ली में ऐसे बाजारों में लॉकडाउन लगाने की मंजूरी मांगी है, जहां सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क लगाने के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। जिसके बाद आशंका है कि दिल्ली में कोविड़-19 का संक्रमण इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो यहां के अस्पतालों में बेड की कमी हो सकती है और अगर यही हालात रहे तो जो हॉस्पिटल बेड्स आज दिल्ली में उपलब्ध है उनकी संख्या तेजी से कम हो सकती है।
कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से दुनिया के लगभग 190 देशों में 13 लाख से ज्यादा लोगों की मौत भी हो चुकी है। कुल मिलाकर एक बात यह है कि अगर लोग कोरोना को लेकर गंभीर नहीं होगे तो करोना के मामले ऐसे ही बढ़ते जाएंगे जिसके कारण कई लोगों को अपनी जान से हाथ गंवाना पड़ेगा तो इससे पहले ही अगर सरकार सख़्त कानून या कदम उठा ले तो कोरोना के बढ़ते मामलों पर रोक लग सकती हैं।
-निधि जैन

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