जब तक वैक्सीन नहीं, तब तक ढिलाई नहीं
शायद कभी ना कभी कोविड़-19 का प्रकोप देश से तो चला ही जाएगा लेकिन क्या उन लोगों की जिंदगी वापिस वैसे ही हो जाएगी, जिन्होने इस कोरोना वायरस के कारण अपनो को खोया हैं। इस वर्ष कई लोग अपनों से जुदा हुए हैं। समूचे विश्व के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा हैं और अभी भी कोरोना संक्रमितों के आकड़े प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं।
जिन आकड़ो पर दिल्ली सरकार ने भी चिंता जताई है। जिस पर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि जब एक व्यक्ति संक्रमित होता है तो उसके पूरे परिवार व संपर्क में आए सभी लोगों की टेस्टिंग की जाती है तो इसलिए कोरोना के ज़्यादा मामले आ रहे हैं एंव पहले एक पॉजिटिव व्यक्ति के छह से सात कांटेक्ट की ट्रेसिंग हो रही थी, परन्तु अब यह संख्या 15 से भी ज़्यादा हो गई हैं तथा वर्तमान में तो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चालीस प्रतिशत बेड अभी भरे हुए हैं। जिसके बाद भी सरकार के पास अस्पतालों में लगभग 9,500 बिस्तर उपलब्ध हैं।
वैसे दिल्ली में पिछले चार दिन पूर्व से कोरोना वायरस संक्रमण के 5000 से अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं लेकिन पहली बार दिल्ली में बीते दिन पांच हजार से अधिक 5673 नए मामले सामने आए थे। जो सिलसिला आगे भी जारी रहा और वहीं 41 मौतों के साथ कोरोना के कारण जान गंवाने वालों की संख्या अब 6500 के पार जा चुकी हैव दिल्ली में बीते दिन सबसे अधिक 5891 मामले सामने आए थे। वहीं 5739 नए केस दर्ज हुए थे एंव दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पहले दिन 5062 नए मामलों के साथ ही कुल संक्रमितों की संख्या अब 3 लाख 86 हजार 706 तक पहुंच गई है। कुल मामलों में से 3 लाख 47 हजार 476 लोग इलाज के बाद पूर्णत उपचारित भी हो चुके हैं और जिन्हें अस्पातल से डिस्चार्ज भी कर दिया गया है। वहीं दिल्ली में कोविड-19 की चपेट में आकर अब तक कुल 6511 लोगों की मौत हो चुकी है।
बहरहाल एक नए अध्ययन में दावा भी किया गया है कि घरों के भीतर नोवेल कोरोना वायरस का प्रसार तेजी से फैलता है व घर के एक सदस्य को संक्रमण होने के बाद अन्य सदस्यों के जल्द संक्रमित होने का खतरा भी अधिक बढ़ जाता है और इस अध्ययन के निष्कर्ष के दौरान यह पता चला है कि अनुसंधानकर्ताओं ने अमेरिका में 101 घरों का आकलन किया। जिसके बाद पता चला कि घर के भीतर संक्रमण के प्रसार में तेजी देखी गई हैं और कोरोना संक्रमित व्यक्ति के साथ घरों में रह रहे करीब 51 फीसदी लोग कोरोना से संक्रमित हुए। अमेरिका के वैंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में हेल्थ पॉलिसी के एसोसिएट प्रोफेसर का भी कहना है कि घर के पहले सदस्य के बीमार होने के बाद अन्य सदस्यों में संक्रमण तेजी के साथ फैलता हैं, चाहे पहला बीमार घर का सदस्य बच्चा हो या फिर वयस्क। अध्ययन के अनुसार, घर के भीतर कोरोना का प्रसार बच्चों और वयस्कों दोनों से ही फैल सकता है। अध्ययन में पता चला है कि घर के दूसरे सदस्य को संक्रमण होन के मामलों में 75 फीसदी में संक्रमण पांच दिनों के भीतर फैल रहा हैं और घर के एक सदस्य के संक्रमित होने के बाद दूसरे में यह संक्रमण सिर्फ पांच दिनों के भीतर ही पाया गया जबकि कुछ समय बाद घर के अन्य सदस्यों में भी लक्षण महसूस किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि अभी वायरस की काट आने में काफी समय लगेगा क्योंकि दवा बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने कोविड-19 के लिए अपनी वैक्सीन को अगले वर्ष यानी दूसरी तिमाही में पेश करने की योजना बना रहीं है। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि भारतीय नियामक प्राधिकरणों से अपेक्षित मंजूरी मिल जाने की स्थिति में कंपनी की यह योजना बनाई गई है। वैसे कंपनी फिलहाल देश के विभिन्न स्थानों पर तीसरे चरण के परीक्षण पर ध्यान दे रही है व कंपनी ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी यानी एनआईवी के सहयोग से संभावित टीके कोवैक्सीन को विकसित किया है। भारत बायोटेक इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक साई प्रसाद ने भी कहा है कि यदि वह अपने परीक्षण के अंतिम चरण में मजबूत प्रायोगिक साक्ष्य और डेटा, प्रभावकारिता, सुरक्षा डेटा स्थापित करने के बाद सभी अनुमोदन प्राप्त कर लेते हैं, तो 2021 की दूसरी तिमाही में वैक्सीन आने की पूरी सम्भावना हैं।
कंपनी ने ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी डीसीजीआई से तीसरे चरण का नैदानिक परीक्षण करने के लिए अनुमोदन प्राप्त करने के बाद तीसरे चरण के परीक्षण के लिए स्थलों की तैयारी भी आरम्भ कर दी गई है। आशंका है कि 13 से 14 राज्यों में 25 से 30 स्थलों पर आयोजित होने वाले इस चरण में वैक्सीन और प्लेसबो प्राप्तकर्ताओं को दो खुराकें दी जाएंगी व एक अस्पताल में लगभग 2,000 लोगों को पंजीकृत किया जा सकता है। वैक्सीन में निवेश, विकास और नई विनिर्माण सुविधाओं के लिए लगभग 350-400 करोड़ रुपये है। जिसमें अगले तीन महीनों में चरण के तीन नैदानिक परीक्षण के संचालन के लिए निवेश शामिल हैं। वैसे वैक्सीन की कीमत अभी निर्धारित नहीं की गई है, क्योंकि कंपनी अभी भी उत्पाद विकास की लागत देख रही है व उनका तत्काल ध्यान साइटों पर सफलतापूर्वक चरण तीन का परीक्षण करना है। आलम यह है कि अगर भारत बायोटेक के कोरोना वैक्सीन को यदि भारतीय नियामकों की ओर से मंजूरी मिल जाती है तो कंपनी टीके को अगले साल की दूसरी तिमाही में लॉन्च कर सकती है। कंपनी ने कोवाक्सिन वैक्सीन को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आइसीएमआर के सहयोग से विकसित किया है, जिसमें निष्क्रिय सार्स-कोव-दो वायरस का उपयोग किया गया है। वैसे वायरस को आईसीएमआर लैब में अलग किया गया था। फेज तीन के प्रयोग के मजबूत डेटा और सबूतों के अलावा प्रभाव और सुरक्षा डेटा के बाद यदि कंपनी को मंजूरी मिलती है तो वैक्सीन को 2021 की दूसरी तिमाही में लॉन्च किया जा सकता हैं। वैक्सीन के प्रभाव को जांचने को तीन क्लीनिकल ट्रायल के लिए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से मंजूरी मिलने के बाद ही कंपनी ने फेज 3 के परीक्षण की प्रक्रिया शुरू की है। 13 से 14 राज्यों में 25 से 30 स्थानों पर ट्रायल होने के बाद, वॉलंटियर्स को दो डोज दिए जाएंगी। हर हॉस्पिटल में करीब दो हजार लोगों को टीका लगाया जा सकता है तथा कपंनी सरकार और प्राइवेट प्लेयर्स दोनों को ही वैक्सीन सप्लाई करने पर विचार कर रही हैं।
बहरहाल वैक्सीन की कीमत अभी निर्धारित नहीं हुई है, क्योंकि कंपनी अभी उत्पाद विकास की कीमत देख रही है। कुल मिलाकर एक बात यह है कि जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती और जब तक कोरोना संक्रमितों के आकड़े प्रतिदिन कम नहीं होते तब तक हमें जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं के नारे को केवल याद ही नहीं रखना है बल्कि उसे अपने जीवन में भी उतारना हैं।
-निधि जैन