साइलेंट किलर

 साइलेंट किलर नामक बीमारी हेपेटाइटिस-बी की चपेट में हर वर्ष लाखों की संख्या में लोग आते हैं। यह एक ऐसा वायरस होता है, जो सबसे पहले लोगों के लिवर को प्रभावित करने का काम करता है। जिसमें अनेक तरह की बीमारियां मौजूद होती हैं, व घातक बीमारी कैंसर जिसके नाम से ही लोग कोसों दूर भागते है वह भी इसमें शामिल है।

इस बीमारी के प्रति लोगों के मन में जागरूकता बढ़ाने के इरादे से हर साल 28 जुलाई को समूचे विश्व में विश्व हेपेटाइटिस-बी दिवस मनाया जाता है
और इस वर्ष विश्व हेपेटाइटिस-बी दिवस के दिन पर विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी ड़ब्लूएचओ की तरफ से एक अच्‍छी खबर सामने आई है। संगठन द्वारा बनाईं गई एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि, वर्ष 2019 में दुनिया भर में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में संभावित जानलेवा हेपेटाइटिस-बी की मौजूदगी में अच्छी-खासी कमी आई है। ड़ब्लूएचओ के मुताबिक साल 1980-2000 के दौर में यह बीमारी करीब पांच फीसद थी। व उस दौर में इस बीमारी की तब तक काट भी नहीं बनी थी। एवं विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की तरफ से हेपेटाइटिस मुक्त भविष्य को इस वर्ष की थीम भी बनाया गया था। जिसमें इस बीमारी के खात्‍मे पर ज्यादा जोर दिया गया है। बहरहाल, लंदन के इंपीरियल कॉलेज और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किये गए एक संयुक्त अध्ययन में यह कहा गया है कि, कोविड-19 महामारी की वजह से संगठन द्वारा चलाए जा रहे हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण कार्यक्रम में रुकावट पैदा हुई है जिससे भविष्‍य के तय लक्ष्‍यों को हासिल करने में भी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ेगा। और डब्‍ल्‍यूएचओ का अनुमान भी है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो वर्ष 2020-2030 के बीच पैदा होने वाले लगभग 53 लाख अतिरिक्त बच्चों में दीर्घकालिक संक्रमण के मामले दर्ज अवश्य ही हो सकते हैं। व उसी के कारण दस लाख बच्चों की मौत हेपेटाइटिस-बी से संबंधित बीमारियों की वजह से भी हो सकती है।
इस रिपोर्ट को जारी करते समय विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडेनहॉम घेबरेयेसस ने यह भी कहा है कि, कोई भी नवजात शिशु अपनी उम्र में आगे चलकर हेपेटाइटिस-बी का शिकार हो सकता है।
और उनके मुताबिक आज की उपलब्धि हमें बताती है, कि हमनें लिवर क्षति के मामलों में कितनी कमी कर रखी है। एंव संयुक्‍त राष्‍ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख ने इस मौके पर यह भी कहा कि, हेपेटाइटिस-बी को मां से बच्चे में फैलने से जल्द ही रोकना होगा ताकि इस बीमारी से छुटकारा पाने और लोगों की जिंदगियां बचाने का कार्य आरंभ हो सके। व उन्‍होंने पूरी दुनिया से इस बात की भी अपील की है कि, सभी देश गर्भवती महिलाओं का परीक्षण सुनिश्चित करवाने का प्रयास करें। तथा हेपेटाइडिस बी का टीकाकरण बढ़ाने और जन्म के समय बच्चों को दी जाने वाली वैक्सीन की खुराक भी बढ़ाई जाए। संगठन को आशंका भी है कि, दुनिया भर में 25 करोड़ से ज़्यादा लोग हेपेटाइटिस-बी के दीर्घकालीन संक्रमण के शिकार में हैं। और जो बच्चे अपने जन्म के पहले वर्ष में हेपेटाइटस-बी के संक्रमण का शिकार हो जाते हैं उनमें से 90 फीसद बच्चों में यह संक्रमण लंबे समय तक रहता ही है। जिसको रोकने के लिए सरकार को जल्द ही अहम कदम उठाने होंगे। और इस हेपेटाइटिस-बी बीमारी से हर वर्ष लगभग नौ लाख लोगों की मौत भी हो जाती है। नवजात शिशुओं को हेपेटाइटिस-बी से एक ऐसी वैक्सीन के माध्‍यम से बचाया जा सकता है। व वर्ष 2019 के दौरान नवजात बच्चों की 85 प्रतिशत आबादी को इसकी तीन खुराक देने के अभियान से भी जोड़ा जा चुका था। एंव साल 2000 में यह केवल 30 फीसद तक ही सीमित था।
गौरतलब है कि संगठन तो अपनी तरफ से पूरे प्रयास कर ही रही है लोगों को जागरुक करने से लिए लेकिन, लोगों को खुद भी जागरूक होना होगा इन जानलेवा बिमारियों को लेकर।
-निधि जैन

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