रंगभेद पर सियासत

 रंगों से भरे इस विश्व में मैंने हजारों रंग देखे हैं। काले गोरे का भेद तो जरूर होता है इस खुदगर्ज दुनिया में पर मैंने काले को रात होते देखा है। गोरे रंग को देखकर लोगों के ईमान को ड़गमगाते हुए देखा है। क्रीम लगा लो, लेप लगा लो व महंगे-महंगे प्रोडक्ट लगा लो ऐसे शुभ विचार देखें है। मैंने खुद के रंग से लोगों को तार-तार होते देखा है। समाज की इस बनाई हुई प्रतिमा से, लोगों को खुद से खुद हारते हुए देखा है।

कहने को तो इस संसार में हर रंग एक समान है, पर मैंने इस जहां मे रोजाना रंग हजारो देखे हैं। अमेरिका की मिनियापोलिस में अश्वेत जॉर्ज प्लॉयड़ की मौत के बाद से दुनिया भर में रंगभेद पर सियासत शुरू हो गई है। जिसका प्रभाव अब भारत में भी देखने को मिल रहा है। 45 साल पुरानी फेयरनेस क्रीम 'फेयर एंड लवली' का नाम अब बदला जा रहा है। स्किन कलर को लेकर भेदभाव करने के आरोपों को झेलने वाली ग्लोबल कंज्यूमर कंपनी युनिलीवर की इंडियन यूनिट हिंदुस्तान युनिलीवर अब अपनी स्किन क्रीम फेयर एंड लवली के ब्रांड क्रीम की रीब्रांड़िंग करने जा रही है।
कंपनी पर स्किन कलर और गहरे रंग की त्वचा को लेकर दशकों से स्टीरियोटाइप यानी दुराग्रह पैदा करने के आरोप लगाए जा रहे थे। जिसके बाद अब आखिरकार कंपनी ने यह फैसला लिया है कि वह इस पुरानी ब्रांड नेम से फेयर शब्द हटाएगे। और नया ब्रांड नेम सभी की मंजूरी से लॉन्च किया जाएगा।
परंतु गौरतलब यह है कि, कंपनी तो क्रीम का नाम बदलकर अपनी ओर से रंगभेद में भेदभाव नहीं करने का समाचार दे रही है लेकिन चिंतापूर्ण विषय यह है कि इस समाज में रंगभेद का भेदभाव आखिरकार कब मिटेगा। क्योंकि खूबसूरती रंगों से नहीं, अपने नजरिए में होती है, सोच से होती है व दिल से होती हैं।
-निधि जैन

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