बांग्लादेश को लुभा रहा है चीन

 कोविड-19 महामारी को जन्मे वाले देश चीन के सामने अब कई देश डट कर खड़े हैं। जिसके भय के कारण अब चीन कई देशों को लुभाने की कोशिश कर रहा है। चीन ने पहले नेपाल को अपनी तरफ किया और अब बांग्लादेश को भी ललचाने के प्रयास कर रहा है।

भारत और नेपाल का रिश्ता बरसों से नहीं बल्कि दो सदियों से मजबूत बना हुआ था। लेकिन चीन ने नेपाल को फुसलाकर अपनी राह पर चलने को विवश कर दिया जिसके बाद नेपाल ने एंटी इंडिया कदम उठाकर भारत से गद्दारी कर ली। हाल ही में नेपाल ने नया नक्शा जारी किया है जिसमें उसने भारत के इलाकों को अपनी सीमा में बताया है, जो हकीकत में भारत के ही इलाके हैं। और अब चीन भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश को भी फुसलाने के पूरे प्रयास कर रहा है। बीते दिनों गलवान घाटी पर बेरहमी से चीन के सैनिकों ने कांटे लगे डंडों से हमारे सैनिकों पर वार किया जिसमें हमारे देश के 20 से ज्यादा जवान शहीद हो गए। जिसके कुछ दिन पूर्व ही चीन बांग्लादेश के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते मजबूत करने में जुट गया। चीन ने बांग्लादेश से आयातित 97 फीसद यानी 8,256 वस्तुओं पर पूरी तरह से शुल्क मुक्त करने का फैसला किया है। अभी तक बांग्लादेश के 3,095 उत्पादों को एशिया-प्रशांत व्यापार करार के तहत चीन के बाजारों में शुल्क मुक्त पहुंचाया जाता था। यह शुल्क छूट एशिया पैसिफिक ट्रेड एग्रीमेंट यानी आप्टा के तहत मिली हुई थी। व इससे पहले भी इंडोनेशिया में आयोजित एशिया-अफ्रीका कॉन्फ्रेंस के दौरान शी चिनफिंग ने कहा था कि वह कम विकसित देशों को शुल्क मुक्त बाजार उपलब्ध कराएंगे।
जिसके बाद अब चीन ने घोषणा की है कि वह बांग्लादेश से सीमा शुल्क नहीं लेने की नई दरें पहली जुलाई से प्रभावी करेंगा। हालांकि चीन के इस फैसले को भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश, नेपाल, भूटान व श्रीलंका को अपने पाले में लाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। क्योंकि इस बयान को केवल एक व्यापारिक फैसले के तौर पर नहीं देखना चाहिए बल्कि चीन की इस चाल को रणनीतिक महत्व के कदम के तौर पर भी देखना अनिवार्य है।
-निधि जैन

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