अगले पांच साल बीमारियों के नाम

 मृत्यु ही जीवन का सत्य है जो एक ना एक दिन सबको आनी ही है, बीमारीयां तो महज एक बहाना होती है,

जो इंसान को इस दुनिया से दूर ले जाती हैं। इस वक्त कोरोना महामारी के कारण लाखों लोगों की जान गई व आने वाले समय में और लोगों की भी मृत्यु की आशंका है, कोविड़-19 के कारण। तथा कोरोना के कहर के बीच ही एक और परेशान करने वाली खबर सामने आई है कि,
भारत में कैंसर के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एंव ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि, अगले पांच साल में कैंसर के मामलों में बारह फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी। और यह बात भारतीय चिकित्सा अनुसंधान संस्थान यानी आईसीएमआर और राष्ट्रीय रोग सूचना विज्ञान और अनुसंधान केंद्र यानी एनसीडीआरआई की एक रिपोर्ट में कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल कैंसर के मामले 13.9 लाख रहने का अनुमान है। वहीं साल 2025 तक यह मामले 15 लाख तक हो सकते हैं, जो कि एक गंभीर विषय है। तथा अब कैंसर एक ऐसी बीमारी बन चुकी है जिसके मरीजों की संख्या रोजाना बढ़ती जा रही है। व इसका इलाज काफ़ी महंगा होता है। एंव जब यह बीमारी एक गरीब को हो जाती है तो उसके बचने की सम्भावना बहुत कम होती है। और यदि अगर यह बीमारी अमीरों को होती है, तो वह काफी पैसा खर्च करके इस जान लेवा बीमारी का इलाज करवा लेते है। गौरतलब यह है कि, तीन-चार दशक पहले तो कैंसर मरीजों की संख्या बहुत ही कम थी पर अब यह तो सामान्य बीमारी बनती जा रहीं हैं जो आने वाले समय के लोगों के लिए घातक साबित होगी। चिंतापूणर्ण विषय यह है कि, इस जानलेवा बीमारी का कारण हमारे खान-पान और रहन-सहन में बदलाव ही है व शहरों शुद्ध हवा और जल के अभाव में जहां कई बीमारियाँ हो रही है, वहीं कैंसर की बीमारी की वजह भी बाहर का खाना, खाने-पीने की चीजों को प्लास्टिक में रखना, अगरबत्ती का धुँआ, मच्छर मारने वाली अगरबत्ती का धुँआ, तम्बाकू प्रोडक्ट, फ़ास्ट फ़ूड, पैकट बंद सामान, रिफाइन तेल, अलमुनियम के बर्तन, नॉनस्टिक बर्तन, सिल्वर फॉयल आदि ही है। तथा कैंसर से बचाव के लिए एक मात्र तरिका यहीं ही है कि, अपने रहन-सहन और खान-पाप में बदलाव लाया जाए जैसे कि मच्छर से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें, प्लास्टिक की बोतल की जगह स्टील की बोतल का इस्तेमाल करें, अलमुनियम के बर्तन की जगह स्टील के बर्तनों का उपयोग करें, फ़ास्ट फूड, पैकट और बाहर का खाना न खाएं व घर के खाने का ही सेवन अधिक करें।एंव सिल्वर फॉयल की जगह कॉटन के कपड़े इस्तेमाल करें खाना पैक करने के लिए।
स्वास्थ जीवन जीने के लिए जरुरी है कि हम अपने रहन सहन तथ खाने-पीने में बदलाव अवश्य करें ताकि हम बीमारियों से मुक्त रह सके। बहरहाल, वर्ष 2020 में तंबाकू से होने वाले कैंसर का आंकड़ा 27.1 फीसदी तक होने की पूरी आशंका है। तथा इस तरह के मामले सबसे अधिक देश के उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लोगो में ही देखे जा रहें हैं। व इसके साथ ही गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट और स्तन के कैंसर के मामले भी तेजी से बढ़ने का अनुमान है। एंव पुरुषों में आमतौर पर फेफड़ों, मुंह, पेट और ग्रासनली में कैंसर के मामले ज्यादा पाए जाते हैं। वहीं महिलाओं में स्तन और गर्भाशय में कैंसर के मामले अधिक पाए जाते हैं। राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम 2020 नामक एक रिपोर्ट हालही में बंगलुरू में रिलीज की गई है। जिसमें कैंसर से संबंधित जानकारी दी गई है। और इसी रिपोर्ट के आंकड़े देशभर में स्थित 28 जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री और 58 अस्पताल आधारित कैंसर रजिस्ट्री पर आधारित है। इसी रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 में पुरुषों में कैंसर के नए मामले 679,421 और 2025 में 763,575 रहने का अनुमान है। व महिलाओं में वर्ष 2020 में कैंसर के 712,758 नए मामले और 2025 में 806,218 केस आने की आशंका है। पुरुष और महिला दोनों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट कैंसर के कुल मामले दो लाख 70 हजार यानी 19.7 फीसदी हो सकते हैं।
जो अवश्य ही एक गंभीर समस्या है। गौरतलब है कि, हमें कैंसर को हराना है उससे हारना नहीं है यह समझाना है कि यह बीमारीयां सिर्फ सब्र का इम्तिहान लेती है इनसे घबराना नहीं है बेशक अपनों को तोड़ देती है, यकीनन यह परेशानी दिल और दिमाग में जद्दोजहद चलती है लेकिन अपनी हिम्मत से हर परेशानीयों का सामना करना ही जिंदगी है।
-निधि जैन

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