मजदूरों को राहत

 विश्व वैश्विक महामारी कोरोना के कहर से लगातार जूझ रहा है। पूरे संसार में इस महामारी से मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। लेकिन इस महामारी से जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुए है वो है प्रवासी मूजदूर। क्योंकि लॉकडाउन के कारण वह लोग पलायन के लिए विवश थे।

लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। लॉकडाउन के मारे प्रवासी मजदूर जैसे तैसे अपने गांव तो पहुंच गए लेकिन रोजगार का इंतजाम ना होने के कारण लाखों मज़दूरों को दिनचर्या जीने के लिए हजारों कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिसको देखते केंद्र सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए 50,000 करोड़ रुपये की एक शॉर्ट टर्म मेगा जॉब स्कीम शुरू की है। यकीनन स्कीम की घोषणा में काफी देर जरुर हुई है, लेकिन सकारात्मक बात यह है कि मजदूरों की क्षमता और जरूरतों को परख कर इस स्कीम को शुरु किया गया है। इस योजना के अंतर्गत 125 दिन काम मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है। गरीब कल्याण रोजगार अभियान नाम की इस योजना में देश के उन 116 जिलों तक सीमित रखा गया है जहां शहरों से लौटे प्रवासी मजदूरों की संख्या कम से कम 25,000 है। राज्य सरकार द्वारा करवाई गई मैपिंग के आधार पर हर किसी को यथासंभव उसके कौशल के अनुरूप काम मुहैया कराने वाली इस योजना के तहत उन मजदूरों को रोजगार देने के साथ ही संबंधित जिले में कोई स्थायी निर्माण कार्य भी संपन्न किया जाएगा।
लेकिन गौरतलब यह है कि हर योजना में यह खतरा जरूर होता है की मजदूरों पर जितनी राशि खर्च होनी होती है उससे ज्यादा बाकी मदों के नाम पर निकल जाती है। जिसके कारण सही तरीके से मजदूरों को उनका हक व लाभ नहीं मिल पाता है। यकीनन योजना की धूम भले ही मच जाए परंतु जिसके लिए यह सारी कवायद होती है, वह ही इन योजनाओं का फायदा नहीं उठा पाते हैं। बहरहाल, इस योजना पर अमल होने से पहले ही योजनाकारों ने इस पक्ष पर विचार कर ही लिया होगा। बस अब तो उम्मीद ही कर सकते हैं कि इस योजना का अधिकतम हित ज़रूरतमंदों तबके तक पहुंच जाए।
-निधि जैन

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