कोई दुश्मन कोई दोस्त नहीं है राजनीति में
25 वर्ष की उम्र में विधायक व सांसद बनने का सपना देखने वाले, पूर्व कांंग्रेस के पाटीदार नेता, जो 9 महीने जेल में रहें एवं एक ही देश में एक ही राज में, जिनके ऊपर देशद्रोह के दो-दो मुक़दमें दर्ज है अब वह बीजेपी में शामिल हो गए हैं।
जिस भाजपा के खिलाफ़ पाटीदार आंदोलन खड़ा करके वो नेता बने, जिस भाजपा के मुख्यमंत्री की कुर्सी उनकी वजह से गई, जिस भाजपा नेतृत्व को पहले वो 'गुंडा' कह कर संबोधित करते हुए नहीं थकते थे, जिस भाजपा ने उन पर देशद्रोह जैसा संगीन आरोप लगाया था, आज उसी भाजपा का उन्होंने दामन थाम लिया।वैसे राजनीति में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता है और इस नाते ही भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने हार्दिक पटेल का स्वागत किया है।
महज सात वर्ष पूर्व, अपना सियासी सफ़र आरम्भ करने वाले हार्दिक 2015 में चर्चा में आए थे, जब उन्होंने पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग को लेकर अपने कड़े विरोध प्रदर्शन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीजेपी और गुजरात को हिला कर रख दिया था लेकिन फिर उन्होंने साल 2019 में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली और महज एक साल बाद उन्हें गुजरात कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था परन्तु उन्होंने कांग्रेस से अभी तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है। हालांकि उन पर कुल 23 मुक़दमे दर्ज है जिनमें विरमगाम और देशद्रोह का मुक़दमा भी शामिल है। विरमगाम से आने वाले हार्दिक पटेल मेहसाणा के विधायक के दफ़्तर पर तोड़फोड़ के एक मामले में क़ानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं और इसी मामलें की वजह से वह वर्ष 2019 का कोई भी चुनाव नहीं लड़ पाए थे लेकिन वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए, जहाँ से उन्हें इसी साल चुनाव लड़ने की इजाजत मिली है, जिसके बाद अनुमान लग रहा था कि इस बार वह विधानसभा का चुनाव लड़ सकते हैं परन्तु कांग्रेस में उनकी सीट फाइनल होने में देरी हो रही थी तो वहीं दूसरे कई बड़े पाटीदार नेताओं का कांग्रेस में शामिल होने की भी, काफ़ी चर्चा थी और इसलिए कहा जा रहा है कि चुनाव लड़ने के उद्देश्य से वो बीजेपी में ज्वाइन हुए है और ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या बीजेपी हार्दिक को चुनाव लड़ने के लिए टिकट देंगी।
बहरहाल, गुजरात की राजनीति में ये चर्चा है कि हार्दिक को पार्टी में शामिल करने का फैसला केंद्रीय नेतृत्व ने लिया है। जिसकी वजह से, राज्य बीजेपी, पटेल की जॉइनिंग को लेकर दो खेमों में विभाजित हो गई है।
हार्दिक पटेल ने 18 मई 2022 को कांग्रेस से इस्तीफा दिया और 2 जून 2022 को बीजेपी में शामिल हो गए लेकिन बड़ा सवाल ये खड़ा हो रहा है कि आखिर हार्दिक की विचारधारा का ये परिवर्तन कैसे हुआ, क्यां वह अपने ऊपर लगें हुए आरोपों के खिलाफ़ चल रहे मुक़दमों के डर से बीजेपी में दाखिल हुए हैं?
-निधि जैन
