पीछे नहीं हटेगा चीन
चीन से जन्मा कोरोना वायरस पहले से ही समूचे विश्व में तांडव मचा रहा है। जिससे संक्रमितों के आकड़े प्रतिदिन बढ़ते जा रहे है। लेकिन चीन इस महामारी को फैलाने के बाद भी चुप नहीं बैठ रहा है, चाइना अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।
गलवान घाटी पर हमारे देश के बीस से अधिक सैनिकों को मारकर भी चीन संतुष्ट नहीं हुआ है। ईस्टन लद्दाख में एलएसी यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर गतिरोध ख़तम करने के लिए हालही में जो कोर कमांडर स्तर की मीटिंग हुई थी उसमें चीन पीछे हटने को कतई राजी नहीं हुआ। 14 घंटे तक चली इस मीटिंग में दोनों देशों ने ड़ीएस्केलेशन के लिए यानी सैनिकों की तैनाती कम करने के लिए अपनी-अपनी शर्तें रखी थी। जिसमें भारत ने साफ कहा कि चीन को पैंगोंग एरिया में फिंगर-8 से पीछे हटना होगा परन्तु चीन इससे बिलकुल भी सहमत नहीं हुआ। यह चौथी कोर कमांड़र की सबसे बड़ी चलने वाली मीटिंग थी। इस मीटिंग में दोनों देशों के बीच सैनिकों की तैनाती कम करने पर बेहद कड़ी बातचीत हुई लेकिन मीटिंग के बारे में अधिकारिक तौर पर अभी तक कोई भी स्टेटमेंट समाने नहीं आई है।मीटिंग में दोनों देशों की शर्तों को लेकर किसका क्या रुख रहा, किस बात पर सहमति बनी, किस बात की निंदा हुई, इस पर उच्च स्तर पर चर्चा होने के बाद ही जमीनी स्तर पर कुछ किया जाएगा। और अगर आवश्यक हुआ तो यकीनन ही एक बार फिर एक ओर राउंड की मीटिंग दोनों देशों के बीच हो सकती है। वैसे इस बातचीत का अहम बिंदु पैंगोंग और ड़ेपसांग एरिया ही रहा। पैंगोंग एरिया में चीनी सैनिक डिसइंगेजमेंट के पहले फेज में भले ही फिंगर-4 से फिंगर-5 की तरफ पीछे हो गए है लेकिन रिजलाइन पर यानी पहाड़ी छोटी पर चीनी सैनिक अभी भी मौजूद है जबकि भारत फिंगर-4 से फिंगर-3 पर आ गया है।
लेकिन भारत की तरफ से चीन को यह साफ-साफ कह दिया गया है कि, चीनी सैनिकों को अपनी पुरानी स्थिति में लौटाना ही होगा मतलब चीनी सैनिकों को फिंगर-8 के पीछे जाना ही होगा। वैसे तो एलएसी के दोनों तरफ हजारों की संख्या में सैनिकों की तैनाती की गई है साथ ही युद्ध स्तर पर तोप, टैंक, मिसाइल सहीत फाइटर जेट और दूसरे सैन्य साजो सामान तैनात है। और इन सब को पीछे करने की ही टाइमलाइन पर बात हुई है। बहरहाल, फेज-वन में तो दोनों देशों के सैनिकों को बस आमने सामने से हटाकर एक बफर जोन बनाना था लेकिन अब फेज-2 की प्रक्रिया काफी मुश्किल है। जिसमें कम से कम एक महीने का समय लग सकता हैं।
गौरतलब है कि, अब भारत के खिलाफ चीन का बेहद ही आक्रमण व्यवहार नजर आ रहा है। जिससे यह बात स्पष्ट हो गई है, कि चीन असल में है क्या। पहले तो चीन ने घात लगाकर भारतीय बलों पर हमला किया। और अब चीन एलएसी पर पीछे हटने को राजी नहीं हो रहा है जो कि बेशक ही चिंता की बात है और अब पता नहीं ना जाने चीन क्या सोचे बैठा है।
-निधि जैन