चीन के कर्ज की जाल में फंसा लाओस
धीरे धीरे कर के अब चीन पूरी दुनिया को तेजी से अपने कर्ज की जाल में फंसा रहा है। और इस बार ड्रैगन की इस डेट ट्रैप डिप्लोमेसी का नया शिकार लाओस बना है। अरबों डॉलर के चीनी कर्ज को न चुका पाने की स्थिति में लाओस को अपना पावर ग्रिड चीन की सरकारी कंपनी को सौंपना पड़ गया है।
हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की सरकार और उसकी कंपनियों ने 150 से ज्यादा देशों को 1.5 ट्रिलियन डॉलर यानी 112 लाख 50 हजार करोड़ रुपये का लोन भी दिया है। तथाचीन अपने पड़ोसी देश लाओस में छह बिलियन डॉलर की लागत से हाईस्पीड रेल कॉरिडोर को बनाने पर काम कर रहा है। व इस ट्रैक पर पहली से ही ट्रेन दो दिसंबर, 2021 को लाओ राष्ट्रीय दिवस पर राजधानी वियनतियाने आने वाली है एंव इसी तारीख को 1975 में यह देश कम्युनिस्ट शासन के अंतर्गत आया था।
बहरहाल, हालही की आई रिपोर्टों के अनुसार, लाओस चीन की महत्वकांक्षी योजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का नया शिकार है। वैसे शुरूआत में तो चीन ने इन देश को बड़े पैमाने पर लोन दिया, लेकिन जब वहां की सरकार से उसके रिश्ते खराब होने शुरू हुए तो वह अब लोन को चुकाने के लिए दबाव बना रहा है। और इसी कारण सालाना बकाया कर्ज भुगतान की तुलना में लाओस का विदेशी मुद्रा भंडार एक बिलियन डॉलर से भी नीचे पहुंच गया है व लाओस के सामने अब लोन डिफॉल्टर होने का खतरा मडरा रहा है। एंव लाओस ने अपने सबसे बड़े कर्जदाता चीन से कुछ और समयसीमा की मांग की है। तथा जुलाई में वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने लाओस की रेटिंग को और कम करते हुए जंक स्टेट घोषित कर दिया था। मूडीज के अनुसार, लाओस इस समय गंभीर रूप से धन की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में अगर उसे किसी देश ने कर्ज दिया तो उसके डूबने के आसार ज्यादा हैं। गौरतलब है कि, नेपाल, बांग्लादेश के बाद अब श्रीलंका डोनेशन डिप्लोमेसी से भारत को घेर रहा है चीन।
जो बेशक़ ही शर्मनामक हरकत हैं।
वैसे लाओस ने मेकांग नदी पर कई हाइड्रो पावर और हॉईस्पीड रेल प्रोजक्ट के लिए चीन से अरबों डॉलर का लोन लिया था। जो प्रोजक्ट चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से जुड़े हुए है। व चीन के दक्षिणी प्रांत यून्नान को यह दक्षिण पूर्व एशिया के देशों से जोड़ेगी। रेल प्रोजक्ट की कुल लागत का लगभग 60 फीसदी धन एक्सपोर्ट इम्पोर्ट बैंक ऑफ चाइना ने दिया है। जबकि, शेष का 40 फीसदी बजट चीन की तीन सरकारी कंपनियों के साझा उद्यम से मिला है। इस प्रोजक्ट में 70 फीसदी स्वामित्व चीन का है, जबकि लाओस को 30 फीसदी की हिस्सेदारी दी गई है।
गौरतलब है कि, लाओस सरकार चीन को कर्ज के बदले में नेशनल इलेक्ट्रिक पावर ग्रिड का बड़ा हिस्सा चीन की सरकारी कंपनी चाइना साउथर्न पॉवर ग्रिड कंपनी को देने जा रही है। इससे चीन का कर्च चुकाने के लिए लाओस को कुछ समय मिल जाएगा। वहीं, लाओस के ऊर्जा मंत्री खम्मानी इंथिरथ का कहना है कि, चीनी कंपनी को सरकारी पावर कंपनी में स्वामित्व देने से अनुभव, प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन में लाभ होगा। वैसे तो चीन इस समय दुनियाभर के देशों के साथ डेट-ट्रैप डिप्लोमेसी खेल रहा है। जिसके जरिए चीन पहले इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के नाम पर विदेशी देशों को कर्ज देता है। जब वह देश इस कर्ज को चुकाने में सक्षम नहीं होते तो वह उनके संसाधनों पर कब्जा करना शुरू कर देता है। जिसका ताजा उदाहरण श्रीलंका है। जिसे कर्ज के बदले में अपना एक पोर्ट हंबनटोटा चीन को देना पड़ा है।
गौरतलब है कि, चीन अपनी नापक हरकतों से कतई बाज नहीं आ रहा है और कर्ज की आड़ में मन चाहें पैतरे आजमा रहा है जो बेशक़ ही आपत्तिजनक हैं।
-निधि जैन