प्लाज्मा पर भी तस्करी

 कोविड़-19 पहले ही समूचे संसार को अपनी चपेट में ले चुका है। जिसके प्रकोप के कारण रोजाना कोरोना के केस बढ़ते जा रहे हैं। बेशक, वायरस से मरने वालों की दर घटकर 2.64% हो गई है।

परन्तु पिछले 13 दिन में तीन लाख से ज्यादा संक्रमित आकड़े भी सामने आए हैं। जो अवश्य ही चिंतापूर्ण विषय है। लेकिन गौरतलब यह है कि, प्लाज्मा थेरेपी जो कोरोना पॉजिटिव मरीजों के लिए एक उम्मीद बनकर आई थी उन पर भी कुछ लोगों ने पैसा कमाना शुरू पर दिया है। कुछ खुदगर्ज लोग इस संकट की घड़ी में भी पैसे कमाने के लिए प्लाज्मा की तस्करी कर रहे हैं। पूरी योजना के साथ एक नेटवर्क तैयार किया गया है, जो इस काले धंधे को चला रहा है।
जो कहते हैं, कि वह लोगों को प्लाज्मा डोनर उपलब्ध कराएंगे लेकिन इसके बदले उनको पैसे चुकाने होंगे एवं देश के किसी भी राज्य में वह डोनर उपलब्ध करा सकते हैं। जिससे यह स्पष्ट होता है, कि यह रैकेट देश भर में चल रहा है। और अगर यह नेटवर्क देश के कई राज्यों तक फैल चुका है तो यकीनन ही, इस नेटवर्क में कई लोगों की उपस्थिति होगी। शायद प्लाज्मा डोनर भी पैसे कमाने के लिए जुड़ सकते हैं इन संगठन में। क्योंकि अगर किसी को प्लाज्मा चाहिए तो वह सरकार उपलब्ध करा ही रही है। तथा अगर किसी को प्लाज्मा डोनेट भी करना है तो वह सरकारी बैंक में जाकर डोनेट कर सकते हैं। जहां सरकार आने-जाने तक की भी सुविधा उपलब्ध करा रही है। परन्तु अगर सरकारी प्लाज्मा बैंक से हटकर प्लाज्मा डोनेट किया जा रहा है तो जाहिर है, कि इसके जरिए पैसा कमाने की कवायद हो रही है। पता चला है कि, यह नेटवर्क कई हॉस्पिटलओं से भी जुड़ा हुआ है। क्योंकि जब कोई पेशेंट कंटेनमेंट जोन से छुट्टी लेता है, तो हर हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने वाले लोगों की एक सूची जारी होती है और यह नेटवर्क अपने कांटेक्ट से इस सूची को हासिल कर लेता है। सूची में मरीजों के नाम, उम्र, पता व फोन नंबर होते है। मोबाइल नंबर के माध्यम से यह लोग मरीजों से संपर्क करते हैं और अगर मरीज़ मान जाता है तो उसे भी अपने ग्रुप में शामिल कर लेते हैं। व यह सारा खेल व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए ऑपरेट होता है। एंव यह लोग प्लाज्मा देने के लिए कम से कम 70,000 रुपयों की मांग करते हैं।
बहरहाल, अगर वास्तविक में ऐसा कोई नेटवर्क चल रहा है तो उस पर जल्द से जल्द कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि यह बहुत गंभीर मसला है। इस गिरोह का पर्दाफाश होना अनिवार्य है।
-निधि जैन

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