क्या सहाय जुर्म हैं?

 बनावटी दुनिया में इंसानियत का तमाशा देखा, अगर कोई इंसानियत से किसी की सहायता करना चाहता है तो उस पर ही लांछन लगते वे देखा। कसूर क्या है उन लोगों का जो किसी की सहायता करना चाहते हैं।

गलती पर उंगली तो बड़ी तेजी से उठा देते हैं परंतु योगदान के लिए क्यों नहीं उठाते इतनी ही शीघ्रता से हाथ। इस समय पूरे विश्व में प्रवासी मजदूर, किसान व गरीब लोगों को सहायता की जरूरत है जिसके लिए कई लोगों ने अपनी-अपनी आय के अनुसार लोगों की सहाय की है। जिसमें से सबसे प्रथम नाम है अभिनेता सोनू सूद का। जिन्होंने निस्वार्थ भाव से कई हज़ारों मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाया है। इस वक्त कोविड-19 का सबसे भयंकर रूप महाराष्ट्र में ही देखने को मिला है। जहां पर कोरोना संक्रमण के सबसे ज्यादा केस पाए गए हैं। एंव मुंबई में प्रवासी मजदूरों की संख्या भी सबसे ज्यादा है। जिसके बाद सोनू सूद ने प्रथम कदम उठाया और प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाया। जिसके कारण उनकी पूरे देश में खूब तारीफ हो रही है।
परंतु कई लोगों को यह तारीफ रास नहीं आ रही है। अब तक सोनू सूद ने कई हजारों प्रवासि मजदूरों को बस, ट्रेन व चार्टर्ड विमान के द्वारा उनको उनके घर तक पहुंचाया है। जो बहुत ही सराहनीय कदम है। मजदूरों को अपने खर्चे पर घर भेजने से लेकर खाने-पीने तक का इंतजाम अभिनेता कर रहे हैं। लेकिन इसी बीच शिवसेना ने सोनू सूद के इस कार्य को राजनीति से प्रेरित बताते हुए एक्टर को बीजेपी का प्यादा कह दिया है। लेकिन मजदूरों के मसीहा बने सोनू सूद के सपोर्ट में कई लोगों ने उनका पक्ष लिया। सोनू सूद ने सबसे पहले सोशल मीडिया के जरिए ही लोगों की मदद करनी शुरू की थी। ट्विटर पर मिले मैसेज के जरिए सोनू सूद ने लोगों की सहायता करी व उनको उनके घर तक पहुंचाया। जिसके बाद लोगों ने उनका आभार भी जताया। लेकिन एक हैरानी वाली बात यह है, कि सोनू सूद ने जिन लोगों की मदद ट्विटर के जरिए की थी, अब उनके वह ट्वीट भी डिलीट होते जा रहे हैं। गौरतलब है कि, जब किसी पर मुसीबत आती है तो दुनिया चर्चे करती है, मतलबी लोग मुंह फेर लेते हैं, बेगाने अफसोस करते हैं व अपने झूठी तसल्ली देते हैं किंतु सहाय का हाथ तो सच्चे लोग ही केवल उठाते हैं। तो ऐसे में अगर सोनू सूद लोगों की सहायता कर रहे हैं तो क्या इसे राजनीति से जोड़ना ठीक है।
माना किसी इंसान की मदद करने पर दुनिया तो नहीं बदलने वाली। परंतु जिस इंसान की आप मदद कर रहे हैं उसकी तो दुनिया जरूर बदल सकती है। व अगर किसी की सहायता करने का मौका मिले तो जरूर कीजिए क्योंकि आज भी कई हजारों सड़कों पर खड़े हैं दर्द लिए, अपने मन में ना जाने कितने ख्वाबों को समेटे।
-निधि जैन

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