धरा की पुकार
धरा ने हमको सब कुछ दिया। रहने के स्थल से लेकर उड़ने के लिए आसमान दिया। श्वसन के अधिकार के लिए वृक्ष का वरदान दिया। प्यास बुझाने के लिए नदियों का संसार दिया। तो क्यूं ना हम सहेज कर रख ले इस प्रकृति को आने वाले कल के लिए, आने वाले अपनों के लिए। यह कटते वृक्ष, सूखती नदियां, व सिमटते पर्वत एक दिन यूं ही खत्म हो जाएंगे।
तो इससे पहले जरूरी है, कि हम अपनी प्रकृति को बचा ले। 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने के साथ-साथ हमें संकल्प लेना चाहिए कि प्रकृति के रास्ते में खड़ी चुनौतियों को हल करने का रास्ता हम निकालेंगे। सन 1972 में सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र ने इस दिवस को मनाया था। इस दौरान स्वीडन में हुए एक आयोजन में करीब 115 देशों ने हिस्सा लिया था। जिसके बाद से यह दिवस भारत समेत अन्य देशों में विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।इस दिवस को मनाने का उद्देश्य यह होता है कि, लोगों के मन में पर्यावरण के लिए जागरूकता पैदा कर सकें। क्योंकि मनुष्य भी तो पर्यावरण और पृथ्वी का एक हिस्सा ही है। प्रकृति के बिना मनुष्य का जीवन संभव ही नहीं है। परंतु इस साल मनाया जाने वाला पर्यावरण दिवस पिछले सालों के मुकाबले अलग होगा। इस वर्ष लॅाकडाउन के कारण पहले से ही प्रदूषण की मात्रा में कमी हुई है। पिछले वर्षों तक जहां हम पर्यावण को लेकर अधिक चिंता में थे इस साल हमारी चिंताएं थोड़ी कम हुई है, क्योंकि वातावरण शुद्ध हो गया है।
इसलिए इस बार का पर्यावरण दिवस पिछले वर्षों से अलग होगा। परंतु फिर भी हमारा कर्तव्य है, कि हम अपनी प्रकृति का ख्याल रखें। विश्व पर्यावरण दिवस को तब ही सफल बनाया जा सकता है, जब हम पर्यावरण को स्वच्छ व साफ सुंदर रखेंगे। हर व्यक्ति को यह समझना होगा कि जब पर्यावरण स्वच्छ रहेगा तब ही इस धरा पर जीवन संभव होगा।
-निधि जैन