हनुमानजी की ज़ियारत

उत्तर प्रदेश के अयोध्या को करोड़ों हिंदुओं के अराध्य भगवान श्री राम का जन्मस्थान के रूप में माना जाता है। कहा जाता है कि, एक समय अयोध्या में भगवान राम का राज-पाट चलता था, परन्तु वास्तविक में आज भगवान राम की मूर्ति तंबू में है।
अपने ही राज्य में भगवान राम के रहने के लिए घर में एक मंदिर तक नहीं है। व प्राचीन काल में अयोध्या को कौशल देश भी कहा जाता था। एंव अयोध्या हिंदुओं का प्राचीन और सात पवित्र तीर्थस्थलों में से एक स्थल है। बहरहाल, अयोध्या के हनुमान गढ़ी में भगवान श्रीराम के सबसे महान भक्त बजरंगबली विराजते हैं। तथा वह जगह अयोध्या में रामलला के अहम दरवाज़े की तरह ही है। रामजन्मभूमि में प्रवेश करने के बाद सबसे पहले हनुमान गढ़ी के ही दर्शन किए जाते हैं, उसके बाद ही रामलला की जियारत होती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अयोध्या आकर इस रिवायृत पर अमल का पालन किया। साकेत हेलीपैड से आकर सबसे पहले वज़ीरे आज़म मोदी हनुमान गढ़ी के ही दरबार में गए थे और हनुमानजी के दर्शन करें। अयोध्या की तारीख सदियों पुरानी है। जदीद हिंदुस्तान में भी न जाने कितने लीडर अयोध्या पहुंचे लेकिन आज तक कोई भी वज़ीरे आज़म हनुमान गढ़ी की ज़ियारत करने नहीं गया। यह पहला मौका था जब अयोध्या के राजा कहे जाने वाले हनुमानजी की ज़ियारत के लिए मुल्क के वज़ीरे आज़म खुद पहुंचें। पीएम नरेंद्र मोदी किसी भी सकाफती विरासत के मंदिर का भूमिपूजन करने वाले भी पहले वज़ीरे आज़म होंगे।
नरेंद्र मोदी साल 1991 में एकता यात्रा के दौरान ही अयोध्या गए थे। और उसके बाद वह कभी अयोध्या नहीं गए। और अब पीएम 29 साल बाद वज़ीरे आज़म के तौर पर राम मंदिर की बुनियाद रखने बीते दिन अयोध्या गए थे।
-निधि जैन

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