अभिव्यक्ति का हनन

 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन यह कैसे नहीं है इसका किसी के पास जवाब नहीं है और वैसे इसका जवाब हो भी नहीं सकता क्योंकि इससे पहले कभी यह सुनने को भी नहीं मिला कि, कोई प्रकाशन किसी किताब को प्रकाशनयोग्य पाने और उसे छापने की स्वीकृति देने के बाद पीछे हट गया हो।

ब्लूम्सबरी इंडिया ने इस साल फरवरी के दिल्ली दंगों से जुड़ी एक किताब दिल्ली रायर्टस 2020: द अनटोल्ड़ स्टोरी का प्रकाशन नहीं करने की हालही में घोषणा की है। इस प्रकाशन ने अंतिम क्षणों में अपना फैसला इस बेतुके बहाने की आड़ में बदला की उक्त किताब का ऑनलाइन लोकार्पण समारोह उनकी अनुमति के बगैर किया गया। व इस प्रकाशन संस्था को उस समय व्यापक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा, जब किताब के लोकार्पण का एक कथित विज्ञापन सामने आया एंव इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता कपिल मिश्रा को दिखाया गया था, जिन पर दिल्ली दंगों के दौरान भड़काऊ भाषण देने की आरोप लगे है। तथा किताब प्रकाशित न होने पर बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने भी अपना गुस्सा जाहिर किया है। बहरहाल, प्रकाशक के पास उक्त किताब को छापने से इंकार करने के पीछे कोई भी तार्किक कारण नहीं है इसलिए ही वह अब जगंहसार्ई का पात्र बनने के साथ ही तमाम लेखकों के निशाने पर भी आ गए हैं और कुछ लेखकों ने तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर दिखाई जाने वाली ब्लूम्सबरी की क्षुद्रता से नाराज होकर उसकी ओर से प्रकाशित की जाने वाली अपनी किताबों को वापस लेने का फैसला भी कर लिया है। उत्तर पूर्वी दिल्ली में तेइस फरवरी को हुई हिंसा को भड़कने के पहले ऐसे आरोप लगाये गये थे कि, मिश्रा समेत कई नेताओं ने भड़काऊ भाषण दिये थे जिससे वहां के लोग और आग बबूला हो गए थे।
वैसे तो ब्लूम्सबरी इंडिया ने अब एक बयान जारी कर कहा कि, वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्के हिमायती हैं परन्तु समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को लेकर भी उतने ही सचेत हैं। ब्लूम्सबरी इंडिया फरवरी में हुए दिल्ली दंगों के बारे में इस वर्ष सितंबर में वह दिल्ली रायट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी प्रकाशित करने वाला था व इस किताब की लेखिका सोनाली चितलकर, प्रेमा मल्होत्रा एवं मोनिका अरोड़ा हैं।
गौरतलब है कि, नागरिता कानून के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के बाद 24 फरवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा में 53 लोगों की मौत भी हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल भी हुए थे। तथा बीजेपी नेताओं ने दिल्ली दंगों की किताब प्रकाशित न हो पर अपनी नाराजगी भी जाहिर की है। नेता का कहना है कि, क्या एक किताब से डर गए अभिव्यक्ति की आज़ादी के फर्जी ठेकेदार, यह किताब छ्प ना जाएं, यह किताब कोई पढ़ ना लें, तुम्हारा यह डर इस किताब की जीत हैं, तुम्हारा यह डर हमारी सच्चाई की जीत हैं। व उन्होंने कहा कि कहीं यह किताब छप न जाए, इसलिए ही प्रकाशकों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। असल में यह माना जा रहा है कि, ब्लूम्सबरी इंडिया ने किसी सनक का शिकार होकर ही स्वीकृत की गई किताब को छापने से इंकार किया है। वास्तविक में तो उसे इसके लिए धमकाया भी गया है कि, वह इस किताब से अपना किनारा कर लें लेकिन किसी भी चीज़ पर प्रतिबंध लगाना समस्या का समाधान नहीं होता है क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करती है। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस और सेलिब्रिटी की मौतों ने तो 2020 को वैसे ही अभिशाप बना दिया है। हालांकि इस साल की अप्रिय घटनाओं में फरवरी में हुए दिल्ली दंगें भी रहे है। और
वैसे भी जिस किताब से कोई सहमत नहीं हैं, उस किताब पर प्रतिबंध लगाना भी उसी किताब पर प्रतिबंध लगाने जैसा है। तथा लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों की जगह है। और लड़ने का तरीका असंतोष और शिक्षा के माध्यम से होता है, व सच्चाई के लिए तो हमेशा संघर्ष ही करना पड़ता है। इसलिए स्वस्थ लोकतंत्र में प्रतिबंध लगाना और उसे वापह लेना समाधान ही नहीं है। व इस किताब के प्रकाशन पर रोक लगाने का भी कोई मतलब नहीं है। बहरहाल, ब्लूम्सबरी इंडिया द्वारा दिल्ली दंगों से जुड़ी किताब के प्रकाशन से मना करने के एक दिन बाद ही गरुड़ प्रकाशन ने कहा कि वह अब डेल्ही रायट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी शीर्षक वाली एक किताब प्रकाशित करेगा। एंव किताब के प्रकाशन से पूर्व एक ऑनलाइन कार्यक्रम को लेकर हंगामा मचने के बाद ब्लूम्सबरी इंडिया ने पुस्तक के प्रकाशन से अपने हाथ खड़े कर दिए थे। गरुड़ प्रकाशन का कहना है कि यह किताब अगले 15 दिनों में बिक्री के लिए भी उपलब्ध हो सकती है।
गरुड़ प्रकाशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संक्रांत सानू ने कहा कि गरुड़ प्रकाशन भारतीय इतिहास यानी प्राचीन और समसामयिक के प्रामाणिक विमर्श के लिए प्रतिबद्ध है। और यह देखकर दुख होता है कि, अन्य प्रकाशक किताब की विषय-वस्तु के बजाय अन्य घटनाक्रमों से प्रभावित होते हैं। व हम किताब के प्रमुख लेखकों का दिल्ली दंगों की असली तस्वीर सामने लाने के लिए समर्थन करते हैं।
-निधि जैन

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