लूप्त हो रहीं है जैन धरोहर
वो एक दौर था जब लोगों के मन में मंदिर, मस्जिद, चर्च आदि के लिए भावनाएं थी, भगवान के प्रति श्रद्धा थी, मस्जिद, मंदिर जाने का जुनून था पर अब यह सब धीरे धीरे लुप्त हो रहा हैं। गौरतलब है कि हमारे देश में ना जाने कितने ऐसे मन्दिर है चाहें वो किसी भी धर्म से ताल्लुक क्यों ना रखते हो जिनकी धरोहर की आज क़दर नहीं की जा रहीं हैं।
विश्व में हिन्दुओं के सबसे प्रचानी धर्मों में से एक जैन धर्म के भी कई ऐसे मंदिर है जिनका कोई संज्ञान नहीं ले रहा हैं। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के भोगोली गांव (तहसील चांदगढ)-416509 में स्तिथ लगभग 8से10वी सदी के दो श्री पार्श्वनाथ दि. जैन मंदिर और एक मन्दिर में स्थापित श्री पार्श्वनाथ भगवान की प्राचीन विशाल खड्गासन प्रतिमा को भी उपेक्षित किया जा रहा है। गांव वालों का कहना है कि गांव में जैन समाज न होने के कारण ही जैन मंदिरों की देखभाल की अनदेखी की जा रही है और मन्दिरों के देखरेख के अभाव व बिजली कनेक्शन न होने के कारण रात्रि में तो मन्दिर में बल्ब तक नही जलता।वैसे कोल्हापुर से 130 किमी और बेलगांव यानी कर्नाटक से 53 किमी दूर कई निवासी जैन धर्मं के ही हैं। जिनसे विनती है कि वह जैन समाज की प्राचीन जैन धरोहर को संरक्षित करने हेतु प्रयास करें।
-निधि जैन