टेक्नोलॉजी की कारस्तानी
अगर किसी दिन किसी का अचानक कंप्यूटर, लैपटॉप या फिर मोबाइल खराब हो जाए या फिर खो जाए तो? शायद यह सोचकर भी वह शख्स परेशान हो जाएगा।
गौरतलब है कि ऐसा सिर्फ उस इंसान के साथ ही नहीं है बल्कि तमाम लोगों के साथ होगा। कई लोग तो ऐसे हैं जिनको अपने मोबाइल और लैपटॉप से इतना लगाव है कि एक मिनट भी उनके बिना रह पाना मुश्किल हो जाता है। टेक्नोलॉजी में अब लोग इतना डूब चुके हैं कि उनके पास न तो खुद के लिए समय बचा है और न ही अपने परिवार के लिए। बेशक़ यह चीजें हमारे लिए फायदेमांद और जरूरी है लेकिन साथ ही साथ इनका नुकसान भी है। टेक्नोलॉजी पर हमारी निर्भरता अवश्य ही हमारे शरीर और दिमाग को नुकसान पहुंचा रही है। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार जो लोग मोबाइल का जरूरत से ज्यादा उपयोग करते हैं उनमें ब्रेन कैंसर की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है।
इसके अलावा मोबाइल पर बात करते वक्त सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं के आंकड़े भी रोजाना काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। लगातार कई घंटे तक मोबाइल या लैपटॉप का प्रयोग करने की वजह से आंखें भी प्रभावित होती हैं। स्क्रीन से निकलने वाली हानिकारक किरणों के कारण आंखों में जलन, आई ड्रायनेस जैसी कई समस्या हो सकती है व धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ती जाती है और धुंधला दिखाई देने लगता है। वहीं आजकल के बच्चे टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट हो गए हैं। यह बच्चे दिनरात मोबाइल और कंप्यूटर पर गेम खलते रहते हैं। जिसकी वजह से उनका मानसिक विकास रुक रहा है और उनका दिमाग ज्यादा विकसित नहीं हो पाता। जो आगे चलकर कठिनाइयां बढ़ाता हैं तथा कई बार ऐसा भी होता है कि सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट जैसे फेसबुक के कारण बहुत लोगों के बीच में लड़ाई हुई हैं, क्योंकि यह ऐसा मंच है जो हमें सोशल रहने का मौका तो देता है, परन्तु काफी हद तक हमारी निजी जिंदगी में भी दखल देता है। जिसकी वजह से रिश्तों में दरार आ जाती है एंव रात को सोते वक्त भी कई लोग अपना मोबाइल और लैपटॉप बिस्तर पर ले जाते हैं। जिसकी वजह से वह न तो समय पर सो पाते हैं और न ही उनका दिमाग शांत रहता है व लगातार मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल करने की वजह से गर्दन और कमर में भी दर्द हो जाता है।बहरहाल अकसर लोग अपनी सारी जानकारी जैसे अपनी बैंक डिटेल्स अपने फोन पर सेव करके रख लेते हैं, जो बाद में हमारे लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन सकती है। कई बार तो जो लोग सोशल मीडिया पर अपनी पर्सनल चीजें शेयर करने लगते हैं वह भी उनके लिए बड़ी परेशानी बन जाती हैं और तो और टेक्नोलॉजी से घिरे रहने वाले लोगों में तनाव ज्यादा होता है। लगातार कंप्यूटर पर कामा करना उनके दिमाग को थका देता है। जिसकी वजह से लोगों में तनाव बढ़ जाता है।
उल्लेखनीय है कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि नई टेक्नोलॉजी हमारे देश को नई ऊंचाइयों पर ले कर जा रही है, हमारे देश का विकास हो रहा है लेकिन साथ साथ में इसके कई दुष्परिणाम भी हैं जो कहीं न कहीं लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहे हैं।
-निधि जैन