सख़्त कानून कब?
रेप पर फांसी का बिल पास नहीं हो रहा लेकिन किसानों के न चाहते हुए भी उनके लिए बनाए जा रहे बिल को पास किया जा रहा हैं। देश में न बेटी सुरक्षित, न ही किसान, न नौकरियां और न ही जवान यह क्या हो रहा है अपने देश में।
बेशक़ युग बदल रहा हैं लेकिन लोगों की मानसिकता सदियां बीतने के बाद भी नहीं बदल रहीं।ऑटो से चलो तो बगल वाला सटने की कोशिश करता है, बस में जाए तो कोई पीछे से चिपकने की कोशिश करता है, कपड़े कैसे भी पहन कर निकल जाओ परन्तु फिर भी लोग घूरेगे और अकेली सुनसान राह पर चलो तो कोई उठा कर रेप करने का ही प्रयास करता हैं। क्यालड़की होना सजा है?
बहरहाल घरेलू हिंसा दुनिया के लगभग हर समाज में मौजूद है। जिसको विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है। शारीरिक शोषण, भावनात्मक शोषण, मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार या वंचितता, आर्थिक अभाव जो आदि, सबसे आम प्रकार की गालियाँ हैं जो पीड़ितों द्वारा रोजाना सामना की जाती हैं।
गौरतलब है कि हम रोजाना कई ऐसी खबर सुनते हैं कि उत्तरप्रदेश,रामपुर में छेड़छाड़ का विरोध करने पर मनचलों ने नाबालिग को छत से नीचे फेंका, किशोरी को अगवा कर दुष्कर्म की वारदात, किशोरी को बंधक बनाकर किया दुष्कर्म, पीड़ितों की शिकायत नहीं दर्ज हुआ केस, यूपी के मुजफ्फरनगर मे बंदूक के बल पर एक अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ी के साथ किया दुष्कर्म,
दरिंदा रेप की वीडियो बनाकर लंबे समय से ब्लैकमेल कर रहा था, बिहार में नाबालिग लड़की के साथ रेप कर उसकी निर्मम हत्या की, बिहार के भागलपुर में पत्नी को जुए में हार गया पति,जुआरियों के साथ जाने से जब पत्नी ने इंकार किया तो बेरहम पति ने ड़ाला तेजाब, नवादा में रेप के बाद महिला की हत्या, अर्ध नग्न अवस्था में पेड़ से लटकती मिली लाश, यूपी बुलंदशहर में बाजार जा रही एक किशोरी को दरिंदों ने रास्ते में अगवा कर लिया और बर्बरतापूर्ण गैगरेप करके उसे दर्द से तड़पते हुए अवस्था में जंगल में फेंक दिया। ऐसी कई घटनाएं है जो प्रतिदिन सामने आती हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती, पीड़िता को न्याय नहीं मिलता।
अब यहीं सवाल है कि सरकार आखिरकार कब महिलाओं की सुरक्षा के लिए जागेगी और जब हमारे देश में एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सुरक्षित नहीं तो आम महिलाएं कैसे सुरक्षित रहेंगी ? हालांकि सरकार ने विभिन्न धाराएं तो बना रखी है महिलाओं की सुरक्षा के लिए जैसे धारा 4 जिसमें घरेलू हिंसा किया जा चुका हो या किया जाने वाला है या किया जा रहा है , की सूचना कोई भी व्यक्ति संरक्षण अधिकरी को दे सकता है जिसके लिए सूचना देने वाले पर किसी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं तय की जाएगी तथा धारा 12 जिसमें पीड़िता या संरक्षण अधिकारी या अन्य कोई घरेलू हिंसा के बारे में मुआवजा या नुकासान के लिए मजिस्ट्रेट को आवेदन दे सकता है। इसकी सुनवाई तिथि तीन दिनों के अन्दर की निर्धारित होगी एवं निष्पादन 60 दिनों के अन्दर होगा लेकिन धाराओं का फायदा जब तक जमीनी स्तर पर वह काम न आए। योगी सरकार फिल्म सिटी बना रही हैं लेकिन क्या उससे पहले उन्हें लड़कियों की सुरक्षा के लिए सख़्त कदम नहीं उठाने चाहिए।
अब तो ऐसा ही लग रहा है योगी सरकार की मिशन शक्ति एक ढोंग है। यहां हर रोज रेप की घटनाएं हो रही है। सच तो यह है कि कभी दहेज के खातिर आग में जलती बेटियां तो कभी दरिंदों की हवस की शिकार होती बेटियों की सुरक्षा के लिए सभी देशवासी आवाज नहीं उठाते,सरकार से इन बेटियों के लिए न्याय की मांग करना बेमानी होगी क्योंकि सरकार के संरक्षण में कई दरिंदे आज खुलेआम घूम रहे हैं। सरकारों में कानून बनाने की होड़ लगी हुई है पर रेप पर कडे कानून बनाने को कोई तैयार नहीं ? अफसोस की बात तो यह है लोकसभा में कुल 78 महिला सांसद को जनता ने चुन के भेजा है, परन्तु अफसोस यह भी है कि महिलाओं के लिए आवाज़ उठाने को डर रही है।
हालांकि हाल ही में खबर आई थी कि पाकिस्तान में रेप के दोषियों को नपुंसक बना दिया जाएगा, जिसको इमरान कैबिनेट ने मंजूरी भी दे दी हैं। बेशक़ पाकिस्तान भारत का दुश्मन है लेकिन
कुछ चीज़ें पाकिस्तान से भी देश को सीखनी चाहिए।
-निधि जैन