हो रहा हे क्या लोकतंत्र का हनन?

 135 वर्ष पुरानी कांग्रेस पार्टी में असहमति और असहनशीलता जैसी गंभीर बीमारियों का नतीजा यह हो रहा है कि कांग्रेस में गांधी परिवार के ख़िलाफ़ बोलने वालों के लिए अब शायद कोई जगह ही नहीं बची है और इसका सबसे ताज़ा उदाहरण हैं, कांग्रेस के बड़े नेता गुलाम नबी आज़ाद और आनंद शर्मा। हाल ही में आनंद शर्मा ने पश्चिम बंगाल में इंडियन सर्कुलर फ्रंट के साथ कांग्रेस के गठबंधन की आलोचना की थी और इसे कट्टरपंथी पार्टी बताया।

 हालांकि आनंद शर्मा ने ये सब बातें कह तो दीं लेकिन इसके बाद उनका विरोध शुरू हो गया और कई नेताओं ने उन पर कार्रवाई की भी मांग कर दी। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करने के लिए गुलाम नबी आज़ाद के भी पुतले फूंके गए और उनका अपमान किया गया। गौरतलब है कि क्या लोकतंत्र में अपनी पार्टी के खिलाफ ही कुछ कहने का हक नहीं है? गुलाम नबी आज़ाद ने जिस पार्टी को अपने जीवन के 47 वर्ष समर्पित कर दिए, आज वही पार्टी उनकी असहमति का किस तरह अपमान कर रही है। जो बिल्कुल भी जायज नहीं है। ऐसे समय में जब पार्टी अंदरूनी झगड़ों और टकराव की वजह से अब तक के सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुज़र रही है, उस वक़्त पार्टी में अपने ही समर्थकों के साथ इस तरह का व्यवहार अवश्य ही निंदनीय है।

- निधि जैन

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