आवाज उठाएंगे

 क्या फ़र्क़ पड़ता है इससे कि हमारे देश ने कितनी तरक्क़ी कर ली इंसान में हैवान तो यहाँ भी हैं, वहाँ भी। इंसान की फितरत तो आज भी नहीं बदली और पहलें भी नहीं बदली थी, देश में बलत्कार तो आज भी हो रहे है और पहले भी होते ही थे व आकड़ों के मुताबिक तो आज के दौर में पहले से कई ज्यादा ही हो रहें हैं जो बेशक़ शर्मनाक हैं।

हाथरस में जो हुआ वह कुछ नया नहीं हुआ ऐसा शिकार तो हमारे देश में हर घंटे एक नई लड़की को होना पड़ता है। गौरतलब है कि जितना समय हम बेटियों को संस्कार सिखाने में लगाते है उसका आधा भी अगर हम बेटों पर लगाये ना, तो एक बेहतर समाज की स्थापना आराम से की जा सकती है। बहरहाल एक रेप पीड़िता के परिवार को बंधक बनाया गया, उनका कॉल टैप किया गया, उनकी आवाज दबायी गयी, उन्हें प्रताड़ित भी किया गया। जो अवश्य ही निंदनीय हैं जिसकी जरूर ही सीबीआई जाँच होनि चाहिए और इस केस से संबंधित सभी अफ़सरों को जवाबतलब करना चाहिए व सच सामने आना चाहिए कि क्या पुलिस छुपाने की कोशिश कर रही है क्योकिं तभी तो पुलिस पत्रकारों को पीड़िता के परिवार से मिलने नहीं दे रही थी, जभी तो पत्रकारों को रोका जा रहा था, उनके साथ बदसलूकी की जा रहीं थी, उनके कपड़े भी फाड़े गयें थे।
बेशक योगी सरकार ने एक बार फिर बहुत बड़ी गलती कर दी। एक महिला पत्रकार और रेप पीड़िता के परिवार का फोन टैप कर सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि उत्तरप्रदेश में निजता का कोई मतलब नहीं है। तनुश्री और परिवार के बीच कोई ऐसी बातचीत नहीं हुई जो गैरक़ानूनी हो पर फोन टैपिंग जरूर गैरक़ानूनी है। और लखनऊ में बैठे, हाथरस की बिटिया के दरिंदो के पैरोकार यह बात अच्छे से समझ ले कि वह कितनी भी कोशिश कर लें, उन्हे फांसी के फंदे से अब कोई नही बचा पाएगा। बाल्मीकियों के बेटी की आत्मा इन्साफ लेकर रहेगी। गुनहगारों की हर साजिश जरूर बेनकाब होगी। चाहें कोई लाख बिठा ले पहरा। उन्हे पर कोई बचा नही पाएगा। तथा सेलेक्टिव कार्रवाई से साफ है कि अनाड़ी निपट गए और खिलाड़ी बच गए पर इंसाफ देना है तो इंसाफ होते हुए दिखना भी चाहिए। गुड़िया के साथ हर मोड़ पर अन्याय हुआ। साजिशकर्ता डीएम, एसडीएम बच गए। सीबीआई से ही गुड़िया को न्याय मिलेगा। पुलिस का हाथ चाहें दरिंदो के साथ कितना भी भटकाओ पर बचा नही पाएगा।वैसे उत्तर प्रदेश के हाथरस केस ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है। यूपी पुलिस से लेकर यूपी सरकार तक निशाने पर है। इस घटना में शुरू से ही पुलिस की लापरवाही सामने आ रही थी। हाथरस पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर शुरू से ही सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस मामले में एक के बाद एक लगातार गलतियां की गईं।
अगर समय रहते पुलिस और प्रशासन स्थितियां नियंत्रित कर लेती तो बात इतनी नहीं बढ़ती। तथापुलिस की पहली गलती यह थी कि पुलिस को मामूली धाराओं में केस दर्ज करना ही नहीं था। गैंगरेप के बाद पीड़िता की हालत गंभीर हो गई। उसे बेहोशी हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। 9 दिनों तक उसे होश नहीं आया, लेकिन पुलिस ने सिर्फ मामूली छेड़खानी की धाराओं में केस दर्ज किया। घरवालों का आरोप है कि पुलिस ने बेटी पर जानलेवा हमले की धाराओं तक में केस दर्ज नहीं किया। व 14 सितंबर को बेटी के साथ घटना हुई थी। जिस घटना के बाद लगातार मीडिया और सोशल मीडिया में गैंगरेप की खबरें आ रही थीं। जिनका पुलिस ने एक भी बार खंडन नहीं किया कि पीड़िता के साथ रेप या गैंगरेप नहीं हुआ है। 15 दिनों बाद जब पीड़िता की इलाज के दौरान मौत हो गई तो मरने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने बयान जारी किया कि पीड़िता के साथ रेप की पुष्टि नहीं हुई है। एंव हाथरस पुलिस और प्रशासन ने तीसरी बड़ी गलती जब की जब गैंगरेप पीड़िता का शव खुद आधी रात जला दिया। पीड़िता के घरवाले हाथरस में शव आने का इंतजार कर रहे थे। बेटी को हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम विदाई देने की तैयारियां चल रही थीं पर आधी रात तक शव घर नहीं आया। रात लगभग साढ़े तीन बजे पुलिस प्रशासन ने लड़की का शव जला दिया। घरवालों को न तो शव दिया गया, और न ही उन्हें दाह संस्कार करने दिया गया। जिस कारगुजारी से पुलिस प्रशासन पर उंगलियां उठनी लाजिमी हैं।उल्लेखनीय है कि जिस पर बलात्कार हुआ हो, वह स्त्री किसी भी प्रकार से तिरस्कार या बहिष्कार की पात्र नहीं होती है। वह तो दया की पात्र है।
ऐसी स्त्री तो घायल हुई है, इसलिए हम जिस तरह घायलों की सेवा करते हैं, उसी तरह हमें उसकी सेवा करनी चाहिए। वास्तविक में शील-भंग तो उस स्त्री का होता है जो उसके लिए सहमत हो जाती है। लेकिन जो उसका विरोध करने के बावजूद घायल हो जाती है, उसके संदर्भ में तो शील-भंग की अपेक्षा यह कहना अधिक उचित है कि उस पर बलात्कार हुआ। शील-भंग शब्द अवश्य ही बदनामी का सूचक है और इस तरह वह बलात्कार का पर्याय नहीं माना जा सकता है। हमें तो हमेशा ही महिलाओं का सम्मान करने की सीख देनी चाहिए ना की उनके साथ बलत्कार होने के बाद की बातों को बढावा देना चाहिए।गौरतलब है कि घटना के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पीड़िता के घर जाने के लिए निकले थे पर उन्हें पीड़िता के गांव जाने से रोकने के लिए बॉर्डर सील कर दिया गया। उन्हें यूपी बॉर्डर पर ही रोक दिया गया। यहां वह गाड़ी से उतरकर पैदल चले तो उन्हें पैदल भी नहीं जाने दिया गया। लोगों ने सवाल उठाया कि अगर पुलिस गलत नहीं है तो वह राहुल-प्रियंका को पीड़ित परिवार से मिलने क्यों नहीं दे रहे और अगर वे पीड़ित परिवार से जाकर मिल लेते तो उससे क्या हो जाता?
बहरहाल बीते दिन पीड़ित परिवार से राहुल और प्रियंका मिले व उनसे उनका दर्द साझा किया।एंव हाथरस डीएम प्रवीण कुमार के बयानों को लेकर लोगों में भी गुस्सा है क्योकिं जिस दिन पीड़िता की मौत हुई डीएम ने पीड़ित परिवार को दिए गए मुआवजे को लेकर बयान जारी किया। उन्होंने हिसाब दिया कि पीड़ित परिवार को इतनी आर्थिक सहायता दी जा चुकी है और इतनी दी जानी बाकी है। इस बयान पर लोगों ने उनकी आलोचना भी की। लोगों ने कहा कि पीड़िता की मौत का हिसाब डीएम रुपयों से कर रहे हैं। यह तो डीएम की निजता जाहिर करती है। व इसके बाद गुरुवार को डीएम पीड़िता के घर गए और उसके परिवार से बातचीत का वीडियो वायरल हुआ। जिसमें आरोप है कि इस वीडियो में डीएम परिवार को धमकी देते नजर आ रहे हैं। हाथरस केस पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में माताओं-बहनों के सम्मान-स्वाभिमान को क्षति पहुंचाने का विचार मात्र रखने वालों का समूल नाश सुनिश्चित है। इन्हें ऐसा दंड मिलेगा जो भविष्य में उदाहरण प्रस्तुत करेगा व आपकी यूपी सरकार प्रत्येक माता-बहन की सुरक्षा और विकास हेतु संकल्पबद्ध है। यह हमारा संकल्प है वचन है। वैसे सीएम योगी ने हाथरस के एसपी, डीएसपी, इंस्‍पेक्‍टर और कुछ अन्‍य अधिकारियों को जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर सस्‍पेंड करने का भी आदेश दिया है। इतना ही नहीं, इन अफसरों और पुलिस अधिकारिया का नार्को टेस्‍ट भी होगा ताकि सच जल्द से जल्द सामने आ सकें। और अब दोषियों को ऐसी सज़ा मिले कि मिसाल क़ायम हो ताकि कोई दरिंदगी फिर ऐसी हरकत करने के बारे में ना सोचें।
गौरतलब है कि जब निर्भया की बात होती है तो उस समय की सत्ता से सवाल पूछते हैं व जब हाथरस की बेटी की बात होगी तो उस समय की सत्ता से सवाल पूछेंगे एंव पीड़ित की आवाज उठाएंगे क्योंकि यह न्याय की बात हैं। यह सच की बात हैं।
-निधि जैन

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