20 तारीख तक ओर क्या होगा?

 अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन के 20 जनवरी को कार्यभार संभालने से पहले वाशिंगटन डीसी में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। जिसमें सुरक्षा, वीजा, चीन और अन्य कई बढ़े मुद्दे हैं।हालांकि निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों के पिछले सप्ताह यूएस कैपिटल पर हमला करने के बाद संभावित खतरों को भांपते हुए वाशिंगटन के सभी प्रमुख व्यवसायिक केन्द्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है तथा

चीनी सेना से जुड़ाव के आरोप में ट्रंप ने कई बड़ी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि पश्चिमी हिमालय से गुजरने वाली पर्वत सीमा को लेकर भारत और चीन के बीच विवाद को सुलझाने में अमेरिका मदद के लिए तैयार है। वहीं ट्रंप ने भारतीय-अमेरिकी वोटरों को अपनी तरफ लाने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। ट्रंप ने एक चुनावी सम्बोधन के दौरान भारत के लोगों की प्रशंसा करते हुए कहा था कि यहां के लोग महान हैं। उन्होंने एक शानदार नेता को चुना है व उन्हें भारतीय लोगों और पीएम मोदी का समर्थन प्राप्त है लेकिन तमाम सारे हथकंडे काम नहीं आए और आखिरकार ट्रंप हार ही गए।
उल्लेखनीय है कि ट्रम्प की विजय सुनिश्चित थी अगर वह अपने प्रथम कार्यकाल में ही सभी लोगों को एकसाथ दुश्मन नहीं बना लेते। सत्ता में आते ही उन्होंने ‘वैश्वीकरण’ का मज़ाक़ उड़ाते हुए ‘राष्ट्रवाद’ को अमेरिका का भविष्य घोषित कर दिया। वहीं अमेरिकियों के रोज़गार को बचाने के लिए उनके वीज़ा प्रतिबंधों का भी किसी ने विरोध नहीं किया। अवैध तरीक़ों से अमेरिका में प्रवेश करने वालों के लिए मेक्सिको के साथ सीमा पर दीवार खड़ी करने को भी मंज़ूरी मिल गई। हालांकि कुछ मुस्लिम देशों के लोगों के अमेरिका आने पर लगी रोक का भी आतंकी हमले की स्मृति में जनता द्वारा स्वागत कर लिया गया। गौरतलब है कि अधिकांश तानाशाह की तरह ट्रम्प ने भी अपने अतिरंजित आत्म-विश्वास के चलते कई बढ़ी ग़लतियां की। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ओबामा की ग़रीबों को मदद करने वाली हेल्थ केयर योजना पर ताला लगाने में पूर्ण प्रयास किया व देश के मीडिया को निरकुंश तरीक़े से तबाह करने लगे एंव चुनावी साल होने के बावजूद भी लोगों ने क्रूरतापूर्ण तरीक़े से बर्दाश्त कर लिया कि जिस तरह एक गोरे पुलिस अफ़सर ने बिना किसी अपराध के एक अश्वेत नागरिक की गर्दन को अपने घुटने के नीचे आठ मिनट से ज़्यादा दबाकर रखा जब तक कि उसकी मौत नहीं हो गई और उसका ही नतीजा हुआ कि अश्वेत की मौत के बाद उठे नागरिकों के देशव्यापी आंदोलन से बचने के लिए ट्रम्प को व्हाइट हाउस में ज़मीन के भीतर बने बंकर में मुँह छुपाने के लिए मजबूर कर दिया।
इतना ही नहीं, अपनी जीत के प्रति पूरी तरह से निश्चिंत राष्ट्रपति ने कोरोना से बचाव के सिलसिले में लाखों लोगों की जान की भी कोई परवाह नहीं की। वह अपने समर्थकों को मास्क न पहनने और किसी भी तरह के अनुशासन का पालन न करने के लिए भड़काते रहे। जिसके बाद यह कहा जा सकता है कि ट्रम्प के अपने ही समर्थकों ने उन्हें हरा दिया लेकिन जो लोग अब ट्रंप को बुरा भला कह रहे हैं उन्हें यह भी याद होना चाहिए कि ट्रंप ने अपने कार्यकाल में कई अहम मुद्दे को सुलझाया है एंव कई बड़ी योजनाओं को साकार किया है जिससे अमेरिका को फायदा हुआ है लेकिन हकीकत तो यहीं है कि इंसान के अच्छे कर्म एक बार को भूलाएं भी जाते हैं परन्तु बुराइयां हमेशा याद रहती हैं।
-निधि जैन

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